राजधानी में 78 पीलिया पीडि़तों का अस्पतालों में चल रहा इलाज, 3 नए मरीज मिले

राजधानी में पीलिया पीडि़तों की संख्या अब 722 पहुंच गई है, जबकि दो लोगों की मौत हो चुकी है। 3 अप्रैल से पीलिया का प्रकोप फैला हुआ है। एक माह बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम का अमला अंकुश नहीं लगा पा रहा है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 05 May 2020, 11:02 PM IST

रायपुर. शहर के शासकीय और निजी अस्पतालों में 78 पीलिया पीडि़तों का इलाज चल रहा है। सोमवार को 102 संभावितों की ब्लड जांच के लिए भेजा गया था, जिसमें ३ पीलिया पीडि़त मिले हैं। मंगलवार को 92 संभावितों का ब्लड जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। राजधानी में पीलिया पीडि़तों की संख्या अब 722 पहुंच गई है, जबकि दो लोगों की मौत हो चुकी है। 3 अप्रैल से पीलिया का प्रकोप फैला हुआ है। एक माह बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम का अमला अंकुश नहीं लगा पा रहा है।

पीलिया प्रभावित इलाकों में से आमापारा, दलदल सिवनी, शिवनगर, मौलीपारा तेलीबांधा और सड्डू में स्थिति गंभीर है, जहां से प्रतिदिन पीलिया के मरीज मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से पानी के शुद्धिकरण के लिए पानी को 20 मिनट तक उबालकर ठंडा करके पीने की अपील की है। जिला चिकित्सालय और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क जांच, दवा, इलाज की सुविधा दी जा रही है।

आंबेडकर, आयुर्वेदिक अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्था

पीलिया पीडि़तों को भर्ती कर इलाज के लिए आंबेडकर, आयुर्वेदिक अस्पताल और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्था की गई है। आयुर्वेदिक अस्पताल में 50 बिस्तर लगाए गए हैं। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 3, आंबेडकर में 20 तथा आयुर्वेदिक अस्पताल में 11 मरीज भर्ती हैं। निजी अस्पतालों में 44 मरीजों का इलाज चल रहा है।

पीलिया के लक्षण

स्किन (त्वचा) का पीला पडऩा, आंखों का सफेद होना, पेशाब का रंग गहरा पीला होना, मल का रंग सामान्य न होना, बुखार, पेट में दर्द, बदन में खुजली और वजन कम होना।

पीलिया से बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय टीकाकरण है। चूंकि पीलिया में लीवर पर असर पड़ता है, इसलिए एल्कोहल का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए। खुले में रखे खाने खासतौर पर स्ट्रीट फूड और गंदे पानी के सेवन से जॉन्डिस का खतरा रहता है, इसलिए इनसे बचना चाहिए। ताजा खाना और उबला हुआ पानी काफी फायदेमंद हैं।

प्रभावित वार्डों में शिविर का आयोजन कर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। मितानिन घर-घर जाकर सर्वे कार्य कर रही हैं तथा पीडि़तों को शिविर तक पहुंचा रही हैं।

- डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, उप संचालक व प्रवक्ता, स्वास्थ्य विभाग

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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