राजनीति में धर्म का बेजा इस्तेमाल मुद्दे पर शंकराचार्य बोले... देखें विडियो...

Chandu Nirmalkar

Publish: Jul, 13 2018 06:56:39 PM (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India


धर्म एक विशाल अवधारणा है। राजनीति उसका एक अंश है। हमारी वैदिक, पौराणिक परंपरा में धर्म के बिना राजनीति संभव नहीं है। नेहरू ने भारत साधु समाज की परिकल्पना रखी। इसका काम तबके गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा को दिया। उन्होंने यहां तक कहा कि जो साधु इस संस्था के साथ नहीं है, वह भिखारी है। इस संस्था में कई धन-मान वाले लोग चले गए। कांग्रेस के प्रचारक बन गए। बाद में यही कुछ विश्व हिंदू परिषद ने धर्म संसद के नाम पर उठाया। तब फिर एक वर्ग भाजपा के गुणगान में लग गया। यह दरअसल करपात्री जी महाराज के विशाल गौ-आंदोलन को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया था।

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