शरद पूर्णिमा: रात में स्वास्तिक बनाकर इस विधि से करें मां लक्ष्मी की पूजा, 7 जन्मों तक नहीं होगी धन की कमी

शरद पूर्णिमा: रात में स्वास्तिक बनाकर इस विधि से करें मां लक्ष्मी की पूजा, 7 जन्मों तक नहीं होगी धन की कमी

Chandu Nirmalkar | Updated: 12 Oct 2019, 04:13:38 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

Sharad Purnima 2019: ऐसा भी माना जाता है कि इस रात को मां लक्ष्मी (Lord Laxmi) पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और जो भक्त देवी की आरधना करता है, उस पर माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है।

रायपुर. आश्विन माह की पूर्णिमा के दिन शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2019) मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस तिथि पर चंद्रामा सोह कलाओं से परिपूण्ज्र्ञ उदित होता है। जिसकी किरणों से अमृत ( Lord Laxmi)टपकता है। कहते हैं कि इसी दिन माता लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थी। इसे मां लक्ष्मी के अवतरण दिवस के रूप में भी (Sharad Purnima Puja Vidhi) मनाया जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि इस रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और जो भक्त देवी की आरधना करता है। उस पर माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। इसीलिए इसे कोजगरी पूर्णिमा भी कहते हैं।

इस बार 13 अक्टूबर रविवार को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। राजधानी के पंडितों का कहना है कि इस बार 30 साल बाद शरद पूर्णिमा पर दुर्लभ योग बन रहा है। ये शुभ योग चंद्रमा और मंगल के आपस में दृष्टि संबंध होने से बन रहा है जिसे महालक्ष्मी योग भी कहा जाता है।

पं. मनोज शुक्ला के अनुसार शरद पूर्णिमा पर चांद पृथ्वी के अधिक नजदीक होने से किरणें सीधी पड़ती है, इस रात महामाया मंदिर (Mahamaya Mandir) में खुले आसमान के नीचे 51 किलो दूध का खीर पकाई जाएगी।

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बना दें एक स्वास्तिक

- इस व्रत को मुख्य रूप से स्त्रियों द्वारा किया जाता है।
- इस दिन चंद्रमा उदय की दिशा में लकड़ी की चौकी पर (सातिया) स्वास्तिक बनाकर उस पर पानी का लोटा भरकर रखें।
- एक गिलास में गेहूं भरकर उसके ऊपर रुपया रखें और गेहूं के 13 दाने हाथ में लेकर कहानी सुनें।
- गिलास और रुपया कथा कहने वाली को पैर छूकर भेंट करें।
- चांद से अमृत के साथ बरसेगा इतना धन कि 7 पीढिय़ों तक नहीं होगी कोई कमी।

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ऐसी रहेगी ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति

इस साल शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा मीन राशि और मंगल कन्या राशि में रहेगा। इस तरह दोनों ग्रह आमने-सामने रहेंगे। वहीं मंगल, हस्त नक्षत्र में रहेगा। जो कि चंद्रमा के स्वामित्व वाला नक्षत्र है। इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिति 14 अक्टूबर 1989 में बनी थी। हालांकि 6 अक्टूबर 2006 और 20 अक्टूबर 2002 में भी चंद्रमा और मंगल का दृष्टि संबंध बना था, लेकिन मंगल, चंद्रमा के नक्षत्र में नहीं था। इनके अलावा चंद्रमा पर बृहस्पति की दृष्टि भी पडऩे से गजकेसरी नाम का एक और शुभ योग भी बन रहा है।

शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त

-पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 13 अक्‍टूबर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से
-पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 14 अक्‍टूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक
-चंद्रोदय का समय: 13 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

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