ऑनलाइन पढ़ाई के साईड इफेक्ट अब सामने आने लगा

ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों के दिन में कई-कई घंटों तक मोबाईल, टैबलेट और कम्प्यूटर के सामने बैठने के साईड इफेक्ट भी सामने आने लगे हैं।

By: dharmendra ghidode

Published: 05 Apr 2021, 05:53 PM IST

बलौदाबाजार. कोरोना संक्रमण काल के दौरान बीते एक सालों से जहां एक ओर बच्चों की पूरी पढ़ाई ऑनलाइन हो चुकी है, वहीं अब ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों के दिन में कई-कई घंटों तक मोबाईल, टैबलेट और कम्प्यूटर के सामने बैठने के साईड इफेक्ट भी सामने आने लगे हैं। बीते एक सालों के दौरान बच्चों की आंखों की समस्याएं दो गुने से भी अधिक बढ़ गई हैं। वहीं बहोत से बच्चों को अब कम उम्र में ही चश्मा लग गया है। ऑनलाईन पढ़ाई के साथ ही साथ अब बच्चे मोबाइल गेम में भी अधिक समय देने लगे हैं, जिसका असर उनके पूरे व्यक्तित्व पर नजर आने लगा है।
बीते एक सालों से कोरोना संक्रमण काल के दौरान लगभग पूरे साल बच्चों के स्कूल बंद रहे हैं और पढ़ाई से लेकर परीक्षा तक पूरी तरह से ऑनलाइन ही हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार क्लासवार बच्चे बीते एक सालों के दौरान प्रतिदिन 2 घंटे से लेकर 6 घंटे तक मोबाइल, लैपटापए टेबलेट पर दे रहे हैं, जिसका साईड इफेक्ट अब सामने आने लगा है। बलौदा बाजार नगर में ही बीते एक सालों के दौरान नेत्र चिकित्सकों के क्लिनिक पर बच्चों की संख्या बहोत तेजी से बढ़ी है जिसका प्रमुख कारण बच्चों का जरूरत से अधिक देर तक मोबाइल, लैपटाप, टेबलेट पर आंखे गड़ाए रखना है।
नगर की प्रमुख चश्मा दुकान संचालक रोहित साहू ने बताया कि एक साल पूर्व तक उनकी दुकान में पहले माह भर में चार-पांच बच्चों के नजर वाले चश्मा बनते थे, परंतु अब प्रतिमाह 15-20 बच्चों के नजर वाले चश्मे बन रहे हैं। बच्चों की आंखों में लालीपन, सूजन से लेकर नजर का चश्मा तक लगने लगा है। बावजूद इसके बहुतेरे पालक अभी भी गंभीर नहीं है।
जानकारी के अनुसार बीते एक सालों के दौरान पहली से लेकर आठवीं क्लास के बच्चे औसतन तीन से चार घंटे और आठवीं से बारहवीं क्लास तक के बच्चे छह से आठ घंटे मोबाइल, लैपटाप, टेबलेट पर दे रहे हैं, जिसमें क्लासए,असाईनमेंट, कोचिंग, प्रैक्टिकल शामिल हैं। कई पालकों की शिकायत है कि ऑनलाइन क्लास शुरू होने के बाद उनके बच्चे सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक लैपटॉप के सामने ही बैठे रहते हैं इससे बच्चों को कंधे, पीठ और आंखों में दर्द होने लगा है। आंखों में दर्द और थकान होने के साथ ही साथ खाने में मन ना लगना भी कॉमन समस्या हो गई है।
चिकित्सकों की क्या राय
शासकीय चिकित्सालय के सेवानिवृत्त नेत्र चिकित्सक डॉ. आरएस तिवारी ने बताया कि मोबाईलए लैपटापए टेबलेट का रेडियेशन काफी नुकसानदायक होता है। उम्र के साथ-साथ बच्चों की आई बॉल धीरे-धीरे बढ़ती है, परंतु मोबाईल के छोटे स्क्रीन पर बच्चों के अधिक देर तक आंख गड़ाकर देखने का असर उनकी आई बॉल पर पड़ता है। बच्चों को मोबाइल के बजाए बड़े स्क्रीन यानि टैबलेट, कम्प्यूटर पर पढ़ाई करने की आदत डालें। बच्चों को प्रत्येक आधे घंटे में 15-20 मिनट का ब्रेक दिया जाए। बच्चों को नियमित रूप से दूध, डेयरी प्रोडक्ट, घर का पौष्टिक भोजन और पर्याप्त नींद भी दिया जाना चाहिए।
इन परेशानियों को हल्के में न लें
बच्चों में यदि कभी कभी सिर में दर्द, टीवी या लैपटॉप की क्रीन पास जाकर या आंखों को छोटी करके देखना, आंखों में लालपन आना, आंखों को सूखेपन के कारण मसलना, आंखों में जलन होना जैसे लक्षण यदि नजर आएं तो तत्काल नेत्र चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। वहीं बच्चों के बैठने की पोजिशन, लैपटॉप या फोन लेटकर न देखें, कुर्सी और टेबल का इस्तेमाल करें, लैपटॉप या फोन बच्चों की आंखों के स्तर पर होना चाहिए। ध्यान रखें कि कमरे में पर्याप्त रोशनी हो। प्रतिदिन बच्चों को फिजिकल एक्टिविटी जैसे कसरत, साइकिल चलाना या चलने दौडऩे वाले खेल खिलाए जाने चाहिए।

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