scriptsoldiers are committing suicide by shooting in bastar | जवान खुद पर चला रहे डिप्रेशन की गोली | Patrika News

जवान खुद पर चला रहे डिप्रेशन की गोली

बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात जवानों के मनोरंजन के लिए भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध करवाए गए है।

रायपुर

Published: November 18, 2021 11:11:42 pm

रायपुर। नक्सल मोर्च पर तैनात जवान इन दिनों तनाव (डिप्रेशन) के शिकार हो रहे हैं। यह तनाव ज्यदातर पारिवारिक ही होता है, जो अक्सर जानलेवा बन जाता है। इस तनाव के चलते या तो वे खुद को गोली मार लेते हैं या फिर कैंप में मौजूद अपने साथियों की हत्या कर देते हैं। पिछले कुछ साल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें से ज्यादातर मामलों की वजह तनाव ही सामने आई है। पिछले 14 साल में करीब 139 जवान तनाव के चलते अपने जीवन खो चुके हैं। हालांकि तनाव से दूर रखने के लिए जवानों को आला अधिकारियों ने मनोरंजन के तमाम साधन उपलब्ध कराएं हैं। समय-समय पर उनकी काउंसलिंग भी की जाती है। लेकिन फिर भी इस तरह की घटनाएं हो ही जाती है। हाल ही में सुकमा में हुआ हत्याकांड की एक वजह यह भी रही है।

मनोवैज्ञानिक भी कहते हैं कि बड़ी बात तो यह है कि नक्सल मोर्चे पर तैनात जवान डिप्रेसन के चलते अपनी सर्विस राइफल से दुश्मन की जगह खुद को गोली मार रहे हैं। साल दर साल जवानों की आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। पुलिस से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2007 से 2021 तक 139 जवानों ने आत्महत्या की है, इनमें वह आंक ड़ा भी शामिल है जिसमें जवानों ने अपने ही साथियो को गोली मार कर हत्या कर दी है। इनमें 91 जवान राज्य पुलिस के तो वहीं 48 अर्धसैनिक बल के हैं। सबसे ज्यादा आत्महत्या के मामले बस्तर संभाग से सामने आए हैं। आंकड़े बताते हैं कि छग में तैनात राज्य पुलिस व अर्ध सैनिक बलों के औसतन 10 जवान हर साल डिप्रेशन की वजह से मौत को गले लगा रहे हैं।

कैंप में पारिवारिक माहौल की जरूरत
मेडिकल कॉलेज डिमरापाल की मनोरोग विभाग की प्रमुख डॉ. वत्सला मरियमन जवानों की आत्महत्या की प्रमुख वजह उनके अकेलेपन को मानती हैं। डॉ. मरियम कहती हैं कि कैंप में पारिवारिक माहौल की जरूरत है। अफसरों को चाहिए कि वे जवानों की समस्या सुनें। उनके साथ एक गार्जियन की तरह व्यवहार करें। पुलिस विभाग कुछ ऐसे विभागों में से एक है जहां तनाव अधिक होता है। नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवान जो लगातार नक्सल विरोधी अभियान में रहते हैं, उन्हें ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह परेशानी पारिवारिक समस्याओं की जानकारी मिलने पर और बढ़ जाती है और कभी-कभी यही आत्महत्या का कारण बन जाती है।

काउंसलिंग कराते हैं
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात जवानों के मनोरंजन के लिए भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध करवाए गए है। इसके साथ-साथ जवानों की समय-समय पर काउंसलिंग भी करवाई जाती है। मनोरोग विशेषज्ञों की भी मदद ली जाती है। जवानों को तनाव मुक्त माहौल उपलब्ध करवाने के लिए अफसरों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जिन जगहों पर मोबाइल नेटवर्क नहीं है, वहां डिजीटल सेटेलाइट फोन के जरिए उनकी बातचीत परिजनों से करवाई जाती है। साथ ही समय समय पर ऐसा माहौल बनाया जाता है, जिसमें जवान अपने अफसरों के साथ खुल कर बात कर सके। इस दौरान पारिवारिक माहौल रहता है ऑफिसर और सबऑर्डिनेट का दायरा नही रहता है।

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