ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने स्टॉफ कम, लोग भी नहीं मानते नियम

मानो या ना मानो। सच यही है कि शहर की यातायात व्यवस्था केवल छह जवान संभाल रहे हैं।

By: dharmendra ghidode

Published: 10 Sep 2021, 06:07 PM IST

भाटापारा. मानो या ना मानो। सच यही है कि शहर की यातायात व्यवस्था केवल छह जवान संभाल रहे हैं। जिले का सबसे बड़ा अपना भाटापारा ना केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि भरपूर आवाजाही वाला शहर भी है। इस लिहाज से यातायात को चुस्त बनाए रखने के लिए 28 पद स्वीकृत हुए हैं, लेकिन कड़वा सच यही है कि आधा बल ही उपलब्ध है।
महत्वपूर्ण और भारी आवाजाही वाले 9 चौक-चौराहे कैसे संभाले जाते होंगे, यह वही बता सकता है जिसे यातायात सिपाही के नाम से जाना जाता है। नियम तोडऩा हमारी आदत में शामिल है। ऐसे में चौक-चौराहों की भीड़ के बीच किस तरह निकलना है, यह कोई हमसे सीखें। नियंत्रित करने के लिए जवान तो हैं, लेकिन यह बेचारा काम के बोझ का मारा की तर्ज पर ड्यूटी दे रहे जवान की मनोदशा सहज ही समझी जा सकती है। रही बात अधिकारियों की, तो इस वक्त उनकी दिलचस्पी नो-एंट्री एरिया में ज्यादा दिखाई देती है।
जिला बनने के बाद इस शहर की अस्त.व्यस्त आवाजाही पर नियंत्रण के लिए 28 पद स्वीकृत किए गए थे। इसमें दो ए एस आईए तीन हेड कांस्टेबल और 23 कांस्टेबल की तैनाती की गई थी। लेकिन लक्ष्य के विरुद्ध एक ए एस आई 2 हेड कांस्टेबल और 11 कांस्टेबल की ही तैनाती की गई। याने 28 के विरुद्ध 14 ही ले .देकर काम संभाल रहे हैं।
चाहिए थे 28, मिले केवल 14 जवान
भाटापारा शहर की यातायात को नियंत्रित करने जवानों की स्वीकृति की तुलना में आधे की उपस्थिति है। रही सही कसर उस वक्त पूरी हो गई, जब इन 14 में से एक जवान को अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के कार्यालय, एक को दैनिक कामकाज के लिए मुख्यालय जाने का फरमान जारी हुआ। वहीं 3 अन्य को यातायात चौकी पर ही काम करने के आदेश जारी हुए। इस तरह बचे हुए 6 जवान शहर की यातायात व्यवस्था को किसी तरह नियंत्रण में रखे हुए हैं। आधा दर्जन से ऊपर ऐसे चौक-चौराहे हैं, जहां गाडिय़ों की बेतरतीब पार्किंग, सड़क पर उतर आतीं दुकानों ने मिलकर व्यवस्थित करने के प्रयासों को जैसा झटका दिया है। उसकी मिसाल शायद ही मिले। खासकर सदर और हटरी बाजार में तो ऐसे दृश्य आम हैं। फव्वारा चौक की सड़क को ही पार्किंग का रूप दिया जाना हैरत में डालने वाला है।

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