छत्तीसगढ़ के खाते में आई ये उपलब्धि, स्टार्टअप को बढ़ावा देने में देश के टॉप-10 राज्यों में

छत्तीसगढ़ के खाते में आई ये उपलब्धि, स्टार्टअप को बढ़ावा देने में देश के टॉप-10 राज्यों में

Anupam Rajiv Rajvaidya | Updated: 20 Dec 2018, 08:57:03 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

स्टार्टअप रैंकिंग 2018 जारी। यह अपने तरह की देश की पहली रैंकिंग है। इस रैंकिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य टॉप पर रहा, वहीं छत्तीसगढ़ को आठवीं रैंक मिली है।

अनुपम राजीव राजवैद्य / रायपुर. छत्तीसगढ़ में बदलाव की बयार के बीच एक और अच्छी खबर आई है। स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ देश के टॉप-10 में आया है। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने 20 दिसम्बर को नई दिल्ली में राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग-2018 के परिणाम जारी किए। यह अपने तरह की पहली रैंकिंग है। डीआईपीपी ने इसकी कवायद जनवरी 2016 से शुरू कर दी थी।
गुजरात शीर्ष स्थान पर
शानदार प्रदर्शन- गुजरात
बेहतरीन प्रदर्शन- कर्नाटक, केरल, ओडिशा और राजस्थान
मार्गदर्शक- आंध्रप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और तेलंगाना
आकांक्षी मार्गदर्शक- हरियाणा, हिमाचलप्रदेश, झारखंड, उत्तरप्रदेश, और पश्चिम बंगाल
पर्वतीय राज्य- असम, दिल्ली, गोवा, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तराखंड
आरंभकर्ता- चंडीगढ़, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, पुदुच्चेरी, सिक्किम और त्रिपुरा
इन बिंदुओं पर किया गया आकलन
स्टार्टअप नीति नेतृत्त्व, नवाचार, नवाचार प्रगति, संचार, पूर्वोत्तर नेतृत्त्व, पर्वतीय राज्य नेतृत्त्व इत्यादि विभिन्न श्रेणियों में राज्यों का आकलन किया गया। इन श्रेणियों में किए जाने वाले प्रदर्शन के आधार पर राज्यों को शानदार प्रदर्शन, बेहतरीन प्रदर्शन, मार्गदर्शक, आकांक्षी मार्गदर्शक, उभरते हुए राज्य और आरंभकर्ता के रूप में पहचान की गई है।
51 अफसर चैंपियन
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 51 अधिकारियों को चैंपियन के रूप में चुना गया। इन्होंने अपने राज्यों की स्टार्टअप इको प्रणाली के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इस पूरी प्रक्रिया में 27 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों ने हिस्सा लिया। मूल्यांकन समिति में स्टार्टअप इको प्रणाली से संबंधित स्वतंत्र विशेषज्ञों को रखा गया था। उन्होंने विभिन्न मानकों के ऊपर सभी राज्यों का मूल्यांकन किया। कई मानक लाभार्थियों के फीडबैक से संबंधित भी थे। लाभार्थियों से बातचीत करने के लिए 9 विभिन्न भाषाओं में 40 हजार से अधिक टेलीफोन कॉल किए गए, ताकि मैदानी हकीकत जानी जा सके।

 

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