निगम ने दी सख्त हिदायत- डस्टबिन में ना फेंके मेडिकल वेस्ट, अस्पताल लगातार कर रहे अनसुना

निगम ने दी सख्त हिदायत- डस्टबिन में ना फेंके मेडिकल वेस्ट, अस्पताल लगातार कर रहे अनसुना

Deepak Sahu | Publish: Apr, 17 2018 02:38:21 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

चौक-चौराहों पर रखे गए बड़े डस्टबिन में तो आसपास के अस्पताल का मेडिकल वेस्ट तक डाला जा रहा है।

रायपुर . शहर में सफाई व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के मामले में निगम प्रशासन फिर से फेल दिख रहा है। निगम प्रशासन ने शहर में करीब 4 लाख डस्टबिन सूखे और गीले कचरा अलग-अलग रखने के लिए बांटा है। यहां तक कि संस्थानों को भी दो-दो डस्टबिन बांटे गए है। इसके बावजूद सूखा और गीला कचरा अलग-अलग नहीं रखा जा रहा है।
नुक्कड़ों और चौक-चौराहों पर रखे गए बड़े डस्टबिन में तो आसपास के अस्पताल का मेडिकल वेस्ट तक डाला जा रहा है।ताजा मामला समता कॉलोनी और पचपेड़ी नाका में रखे डस्टबिन में मेडिकल वेस्ट का डालना है। निजी अस्पताल संचालकों को निगम द्वारा स्पष्ट हिदायत दी गई है कि मेडिकल वेस्ट को यदि डस्टबिन में डाला गया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिर भी अस्पताल का मेडिकल वेस्ट निगम के डस्टबिन में डाला जा रहा है।

पर्यावरण और सेहत के लिए खतरनाक
अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंकने से पर्यावरण के साथ शहरवासियों की सेहत के लिए खतरा है। इसकी दुर्गंध से आसपास के रहवासी तो बीमार पड़ेंगे। साथ ही कचरा बीनने वाले गरीब तबके के लोगों के लिए भयंकर खतरनाक है। यदि सुई या अन्य मेडिकल वेस्ट कचरा बिनते समय उनके हाथ लग गए तो गंभीर बीमारी से जकड़ सकते हैं।

निगम आयुक्त रजत बंसल ने कहा कि निगम के डस्टबिन में कुछ अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा मेडिकल वेस्ट फेंकने की शिकायतें मिली है। मैंने सोमवार को ही अपर आयुक्त आशिष टिकरिहा को तत्काल मेडिकल वेस्ट फेंकने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए है।

नागपुर की कंपनी को मिला है ठेका

शहर के शासकीय और निजी अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट एकत्रित कर डिस्पोज करने के लिए नागपुर की एसएमएस कंपनी को ठेका पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा दिया गया है। इस कंपनी के कर्मचारियों द्वारा हर दिन सुबह मेडिकल वेस्ट एकत्रित कर भिलाई स्थित प्लांट में डिस्पोजल करना है।

कंपनी को मेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल के एवज में निजी अस्पतालों द्वारा निर्धारित दर पर हर माह भुगतान भी करना है। इसके बाद कुछ अस्पतालों के संचालकों द्वारा मेडिकल वेस्ट निगम के डस्टबिन में डाला जा रहा है। कुछ जगहों पर तो डस्टबिन के पास ही बेस्ट अस्पतालों के कर्मचारियों द्वारा फेंका जा रहा है।

सफाई मित्रों को देना है डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन
शहर भर में करीब 500 निजी अस्पताल, पैथोलॉजी लैब और क्लीनिक हैं। इन सभी को मिलाकर हर दिन करीब 50 से 60 टन मेडिकल वेस्ट निकलता है। उक्त सभी संस्थानों को ठेका कंपनी को मेडिकल वेस्ट डिस्पोज करने के लिए हर दिन देना है। इसके अलावा संस्थानों से निकलने वाले अन्य कचरे को निगम के सफाई मित्रों को डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के दौरान दिया जाना है।

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