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Rashi Parivartan 2022: मकर संक्रांति पर सूर्यदेव धनु को छोड़ अपने पुत्र शनि की राशि में करेंगे प्रवेश, इस मंत्र का जाप होगा शुभ

Rashi Parivartan 2022: मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्यौहार पौष माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को इस साल 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य और शनि एक साथ मकर राशि में विराजमान होंगे।

रायपुर

Updated: January 13, 2022 05:10:24 pm

रायपुर. Rashi Parivartan 2022: मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्यौहार पौष माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को इस साल 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य और शनि एक साथ मकर राशि में विराजमान होंगे। भारतीय ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य अपनी नियमित गति से राशि परिवर्तन करता है। सूर्य के इसी राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। इस तरह साल में 12 संक्रांति तिथियां पड़ती हैं। जिनमें से मकर संक्रांति सबसे महत्वपूर्ण है।
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हिंदू धर्म और ज्योतिष के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। कहा जाता है कि इसी दिन से उत्तरायण शुरू हो जाता है। हिन्दू गणना में मकर संक्रांति के दिन को बहुत शुभ और विशेष माना जाता है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। मकर संक्रांति के दिन ग्रहों के राजा सूर्य धनु राशि को छोड़कर अपने पुत्र शनि की राशि में आते हैं।
इस पर्व के साथ ही करीब एक महीने से जारी खरमास समाप्त होता है और रूके हुए सभी शुभ और मांगलिक कार्य एक बार फिर से शुरू हो जाते हैं। ज्योतिर्विद के अनुसार इस वर्ष संक्रांति देवी का वाहन बाघ और उपवाहन अश्व होगा। संक्रांति देवी पीले वस्त्र पहनकर दक्षिण दिशा की ओर चलेंगी। मकर संक्रांति पर इस बार शत्रुओं का हनन होगा और बाधाएं नष्ट होंगी। शुक्रवार का दिन होने की वजह से मां लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहेगी।
ज्योतिषियों के अनुसार उत्तरायण देवताओं का दिन है और दक्षिणायन देवताओं की रात्रि है। दक्षिणायन की तुलना में उत्तरायण में अधिक मांगलिक कार्य किए जाते हैं। सूर्य जब कर्क राशि में प्रवेश करते हैं तो दक्षिणायन शुरू हो जाता है और सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है तो उत्तरायण प्रारंभ हो जाता है।
दान-पुण्य और स्नान का विधान
ज्योतिषियों के अनुसार मकर संक्रांति पर सूर्य और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इस दिन भगवान को तांबे के पात्र में जल, गुड़ और गुलाब की पत्तियां डालकर अर्घ्य दिया जाता है। गुड़, तिल और मूंगदाल की खिचड़ी का सेवन कर इन्हें गरीबों को बांटा जाता है। इस दिन गायत्री मंत्र का जाप करना भी बड़ा शुभ बताया गया है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने, तिल-गुड़ खाने और सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व है। इस दिन दान में वस्त्र, धन और धान का दान भी किया जाता है। साथ ही इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौए स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का अपना महत्व है।
29 साल बाद दुर्लभ संयोग
ज्योतिषियों के अनुसार इस साल 14 जनवरी को 29 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। जब सूर्य और शनि ग्रह एक साथ मकर राशि में होंगे। ऐसा योग पहले 1993 में बना था। पौष माह में मकर संक्रांति के दिन शुक्ल के बाद ब्रह्म योग रहेगा। साथ ही आनन्दादि योग में मकर संक्रांति मनेगी। इस दिन रोहिणी नक्षत्र रहेगा। इस बार मकर संक्रांति शुक्रवार युक्त होने के कारण मिश्रिता है।

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