कोरोना सैंपल रिपोर्ट आए बिना ही कोविड-19 अस्पतालों में संदिग्धों को किया जा भर्ती

स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्राइमरी कॉन्टेक्ट वालों के सैंपल की रिपोर्ट आए बिना ही उन्हें कोविड-19 मरीजों के लिए बनाए गए अस्थायी अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है।

By: Bhawna Chaudhary

Published: 01 Aug 2020, 09:11 AM IST

रायपुर . कोरोना संक्रमण काल के बीच स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्राइमरी कॉन्टेक्ट वालों के सैंपल की रिपोर्ट आए बिना ही उन्हें कोविड-19 मरीजों के लिए बनाए गए अस्थायी अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है। राजधानी का कुकुरबेड़ा क्षेत्र कोरोना संक्रमितों का हॉटस्पॉट बना हुआ है। यहां से 50 से ज्यादा कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। विगत 10-12 दिनों पहले यहां से एक कोरोना पॉजिटिव मरीज मिला था।

20 जुलाई को पीड़ित के कॉन्टेक्ट (हाई व लो रिस्क) में आने वाले परिवार के 7 सदस्यों का सैंपल लिया गया था। टेस्ट रिपोर्ट आए बिना ही पीड़ित के परिजनों को इंडोर स्टेडियम और अन्य कोविड अस्पतालों में भर्ती कर दिया गया। पीड़ित परिजनों के एक सदस्य ने बताया कि परिवार के किसी को सर्दी-खांसी, बुखार, सांस लेने में दिक्कत व अन्य कोरोना वायरस के लक्षण नहीं थे। उन्होंने ने बताया कि सैंपल लेने के करीब 7-8 दिनों बाद स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक मैसेज आया, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव लिखा हुआ था।

कुकुरबेड़ा के ही रहने वाले एक कोरोना संक्रमित मरीज ने बताया कि वह इंडोर स्टेडियम में बने अस्थायी कोविड अस्पताल में भर्ती है, जबकि उसमें कोरोना वायरस का कोई लक्षण नहीं है। पीड़ित मरीज ने बताया कि वह कुकुरबेड़ा में रहता भी नहीं था। वह पत्नी व बेटी के साथ कोटा में रहता है। पत्नी व बेटी का एम्स में जांच कराने पर दोनों निगेटिव आए हैं, जबकि वह 24 घंटे उनके साथ रहता था। पीड़ितों ने बताया कि इंडोर स्टेडियम में ऐसे कई मरीज भर्ती हैं, जिनको कोई लक्षण नहीं है।

यह है नियम
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई कोरोना पॉजिटिव मिला है, तो उसके प्राइमरी कान्टेक्ट में आने वाले हाई रिस्क (माता-पिता, भाई बहन व परिवार में रहने वाले सभी सदस्य) वालों का सैंपल लिया जाता है। सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही सभी को भर्ती किए जाने का नियम है। जिनका सैंपल लिया जाता है उनका मोबाइल नंबर भी नोट किया जाता है।

गजब रिपोर्ट! सैंपल की रिसीविंग डेट 20 जुलाई 2020, टेस्टिंग डेट 1 जनवरी 1970

पीड़ित ने बताया कि 2 दिनों पहले उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, उसने जब स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया और डिस्चार्ज करने के लिए कहा तो सुबह ही उसे पॉजिटिव रिपोर्ट वाली एक स्लीप पकड़ा दिया गया। स्लीप को देखकर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे इसे जल्दबाजी में बनाया गया हो। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जो स्लीप दिया गया है, उसमें सैंपल की रिसीविंग डेट 20 जुलाई 2020 लिखा हुआ है, जबकि टेस्टिंग डेट 1 जनवरी 1970 दर्शाया गया है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को छिपाने के लिए रिपोर्ट को बदल दिया है।

बिना सैंपल लिए बताया पॉजिटिव
इंडोर स्टेडियम में बने अस्थायी अस्पताल में भर्ती एक संक्रमित मरीज ने बताया कि उसके घर के बगल में रहने वाला एक परिवार का प्राइमरी कॉन्टेक्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल लिया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर के सभी सदस्यों का नाम नोट करके ले गई थी। दूसरे दिन सभी की रिपोर्ट पॉजिटिव बताई गई। आज तक परिवार के किसी भी सदस्य को कोई मैसेज भी नहीं मिला है। 20 साल की एक युवती का सैंपल भी नहीं लिया गया था, जिसको पॉजिटिव बताकर कोविड केयर सेंटर में भर्ती कर दिया गया है।

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