किसी एक व्यक्ति की याचिका से करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत न हो इसका भी रखें ख्याल

० शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की बातों का महंत ने किया समर्थन

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 22 Jun 2020, 01:06 PM IST

रायपुर . जगन्नाथ पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा करोड़ों लोगों की आस्था एवं विश्वास का प्रतीक है। अत: इस पर किसी एक व्यक्ति की याचिका को ध्यान में रखकर त्वरित निर्णय लेना उचित प्रतीत नहीं होता। यह बातें श्री दूधाधारी मठ पीठाधीश्वर राजेश्री डॉक्टर महन्त रामसुन्दर दास महाराज ने एक प्रेस वार्ता में कही।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार इस वर्ष जगन्नाथ पुरी में रथ यात्रा पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश प्रदान किया गया है, जिस पर पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद महाराज ने उच्चतम न्यायालय से अपने फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। उनकी बातों का समर्थन करते हुए श्री दूधाधारी मठ पीठाधीश्वर राजेश्री महन्त महाराज ने कहा कि श्री जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा संपूर्ण विश्व के सनातन धर्मावलंबियों की आस्था एवं विश्वास का प्रतीक है। यह सैकड़ों वर्षों से चली आ रही प्राचीनतम परंपरा है, जिसका निर्वाह किसी न किसी रूप में होना ही चाहिए। उच्चतम न्यायालय यदि चाहे तो इसके आयोजन से संबंधित उचित मानदंड निर्धारित करें किंतु पूर्णत: प्रतिबंध उचित प्रतीत नहीं होता।

यदि कोरोना महामारी के कारण ही इसे प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया गया हो तब तो यह और भी विचारणीय हो जाता है। कारण कि लंबे लॉकडाउन के पश्चात भी महामारी के विस्तार में देश को कोई विशेष सफलता प्राप्त नहीं हो सकी है। इसका कारण है कि केवल मनुष्य ही कोरोना वायरस के विस्तार का एकमात्र कारक नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरस मनुष्य के द्वारा छींकने, खांसने से अनेक कारकों के द्वारा संक्रमित होता है जिसमें वायु, कीट, पतंग, मनुष्य आदि अनेक कारक हैं। इसीलिए विश्व के अनेक देशों में एक साथ लॉक डाउन होने के पश्चात भी यह बीमारी शीघ्रता से फैलती चली गई इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर कुछ देशों ने लॉक डाउन का पालन नहीं भी किया किंतु फिर भी अब उन देशों में बीमारी का प्रकोप लगभग थम सा गया है।

इन बातों को ध्यान में रखते हुए हमें भी अब अपने सार्वजनिक क्रियाकलापों को निश्चित नियमों के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। रेल, वायु सेवा, अंतर्राज्यीय बस सेवा आदि प्राय: अनेक राज्यों में बंद पड़े हुए हैं या सीमित मात्रा में संचालित हैं। ऐसे में रथ यात्रा के आयोजन होने पर भी पहले की भांति अत्यधिक भीड़ होने की संभावना कम ही है।

अत: प्राचीन कालीन परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेवारी हम सभी की है। श्री स्वामी शंकराचार्य महाराज का विचार स्वागत के योग्य है। उनके आग्रह पर उच्चतम न्यायालय को उदारता पूर्वक पुनर्विचार करते हुए निश्चित नियमों के आधार पर रथ यात्रा की अनुमति प्रदान करनी चाहिए।

Bhupesh Tripathi
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