शहर की दस बुराई, जिसे दशहरे से हटाने की जरूरत, तभी बनेगी स्मार्ट सिटी

शहर की दस बुराई, जिसे दशहरे से हटाने की जरूरत, तभी बनेगी स्मार्ट सिटी
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Santram Sahu | Updated: 11 Oct 2019, 12:42:19 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल हुए तीन साल हो गए हैं, पर शहर की दस बुराई अभी तक समाप्त नहीं हो पाई हैं।

सिटी रिपोर्टर, रायपुर. राजधानी में दशहरा मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन लोग रावण की तरह जीवन में व्याप्त बुराई को दूर करने का संकल्प लेते हैं। अपनी रायपुर शहर को राजधानी बने १९ साल हो गए। स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल हुए तीन साल हो गए हैं, पर शहर की दस बुराई अभी तक समाप्त नहीं हो पाई हैं। जिसे यदि यहां का प्रशासन दूर कर दें तो अपना शहर स्मार्ट सिटी में तब्दील हो जाएगा। लोगों को आए दिन होने वाली परेशानी से भी निजात मिल जाएगी। ये हैं दस बुराइयां साफ-सफाई का अभाव : राजधानी रायपुर में पिछले दस साल से साफ-सफाई को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। नगर निगम ने पहले रामकी, फिर खुद और अब रामकी को सफाई का ठेका दिया है। निगम प्रशासन ने नाली और सड़कों की सफाई का जिम्मा अपने पास रखा है। रामकी को डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन औरशहर से निकलने वाले कचरे के परिवहन का जिम्मा दिया है। फिर भी शहर में शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन नहीं हो पा रहा है। निगम के प्लेसमेंट के कर्मचारी महीने में एक बार नाली और सड़क की सफाई करने कॉलोनियों और मोहल्ले में आते हैं, जबकि खर्च में कोई कटौती नहीं हुई है। अंडर ग्राउंड सीवेरज-ड्रैनेज सिस्टम नहीं : राजधानी में अंडर ग्राउंड बनाने का प्लान तीन से चार बार बनाया गया। लेकिन आज तक अंडर ग्राउंड डै्रनेज सिस्टम लागू नहीं कर पाया। आज भी ओपन नालियां में सीवरेज बहने से शहर में मच्छरों की भरमार है। खुली नालियां होने से लोग घरों -दुकानों का कचरा भी इसमें डालते हैं। इस कारण से नालियां भी आए दिन जाम होती रही है। बरसात में नालियों का पानी सड़कों पर बहते रहता है। नगर निगम प्रशासन ने ५० लाख रुपए खर्च अंडर ग्राउंड सिस्टम का प्लान भी तैयार किया गया था। लेकिन प्रस्ताव ही अंडर ग्राउंड हो गया है। बेखौफ अतिक्रमण : नगर निगम सीमा में अतिक्रमण भी बदस्तूर जारी है। झुग्गी मुक्त राजधानी का सपना संजोने वाले शासन-प्रशासन आज तक झुग्गियों का विस्थापन नहीं कर पाया है। शासकीय भूमि पर भू-माफियों का कब्जा बदस्तूर जा रही है। कोई नाले, तो कोई तालाब और कोई रिक्त पड़ी शसकीय भूमि पर कब्जा कर रहा है। इसका बड़ा उदारहण भाठागांव में ढेबर सिटी के पास निगम की खाली पड़ी ६० एकड़ जमीन है। इस जमीन के चारों तरफ आज तक बाउंडी वाल तक नहीं बनाई गई है। महराज बंध, सरजू बांधा तालाब के किनारे पाटने का खेल जारी है। कुछ लोगों ने तो प्लॉट भी काट लिए है। सिंगल यूज प्लास्टिक : शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग धड़ल्ले से जारी है। स्मार्ट और नगर निगम द्वारा जागरुकता अभियान लगातार चलाया जा रहा है। पर अभी भी कई बजारों और किराना दुकानों में ्रतिबंधित कैरी बैग का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है।

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