scriptTenders cancelled in CG MSC, pharmaceutical companies don't want | CGMSC में पांच से 6 बार रद्द हो रही हैं निविदाएं, नहीं आना चाहती दवा कंपनियां | Patrika News

CGMSC में पांच से 6 बार रद्द हो रही हैं निविदाएं, नहीं आना चाहती दवा कंपनियां

- सीजीएमएससी में (Chhattisgarh Medical Service Corporation Limited) छह माह में 80 से ज्यादा निविदाएं रद्द .

रायपुर

Published: December 22, 2021 06:32:02 pm

रायपुर। छत्तीसगढ़ दवा निगम में बीते एक साल में दर्जनों निविदाएं बार-बार रद्द हो रही हैं। महज में दो माह में एक दर्जन निविदाएं दवाओं और उपकरणों के रद्द हो चुके हैं। इनमें से अधिकांश जरूरी उपकरण और दवाएं छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) की वेयर हाउस में शून्य की स्थिति में हैं। बता दें कि बीते दो साल में प्रदेश के अस्पतालों में दवाओं और उपकरणों का टोटा बना हुआ है।

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पत्रिका ने सीजीएमएससी (Chhattisgarh Medical Service Corporation Limited) की वेबसाइट से ही जानकारी जुटाई तो पता चला कि यह पहली बार नहीं हुआ है। महज छह माह में 80 से ज्यादा निविदाएं रद्द की गई। कई ऐसी निविदाएं हैं, जिसे पांच से छह बार रद्द किया जा चुका है। अब स्थिति ऐसी है कि 16 वेयर हाउस में दर्जनों दवाएं और कंज्युमेबल आइटम का स्टॉक शून्य है। सीजीएमएससी के अधिकारियों के ढुलमुल रवैए के कारण हर टेंडर में दो से तीन निविदाकर्ता ही भाग ले रहे हैं। बीते एक माह के भीतर निरस्त हुए टेंडर को इसलिए फाइनल नहीं किया गया, क्योंकि टेंडर में एक या दो लोगों ने ही भाग लिया था। टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों की माने तो सीजीएमएससी के एमडी कार्तिकेय गोयल के आने के बाद से टेंडर की प्रक्रिया में मनमानी शर्तें जोड़ दी गई हैं।

कैंसर की दवा का टेंडर पांचवीं बार रद्द
कैंसर के लिए दवा 56 (एम) को पांचवी बार रद्द कर दिया गया। जबकि प्रदेश भर में तकरीबन 12 हजार मरीजों का इलाज सिर्फ आंबेडकर अस्तपाल में होता है।

यह है कारण
सीजीएमएसी में निविदाकर आने को तैयार नहीं हैं। पहला कारण कि समय पर भुगतान नहीं होना है। दूसरा कारण निविदा के नियमों में एमडी कार्तिकेय गोयल के द्वारा मनमाना बदलाव किया जाना बताया जा रहा है। उपकरण की सप्लाई और इंस्टॉलेशन के बाद 80 प्रतिशत भुगतान कर दिया जाता है। उपकरण की कार्यशैली को देखकर 20 प्रतिशत को दो माह बाद भुगतान किया जाता है। इसके परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट के लिए इंस्टॉल किए गए अस्पतालों तक चक्कर लगाना पड़ता है। इसके अलावा क्रय आदेश के बाद पांच प्रतिशत कंपनी के द्वारा बैंक गारंटी के रूप में जमा किया जाता है। उपकरण की अवधि तक तीन साल की वारंटी मिलने तक राशि सीजीएमएससी में जमा रहती है। अन्य शर्त बदलकर अब नया नियम बदलकर वारंटी अवधि के बाद पांच साल और सर्विस देना होगा। अब जो पूर्व में जमा राशि है उसे आठ साल बाद सीजीएमएससी वापस करेगा। इस शर्त के कारण निविदाकार सीजीएमएससी नहीं आ रहे हैं।

इन दवाओं और उपकरणों की स्थिति शून्य
कोरोना के इलाज के लिए उपयोग होने वाली दवाओं की खरीदी का टेंडर भी पूरा नहीं हो पाया है। सीजीएमएससी (Chhattisgarh Medical Service Corporation Limited) के गोदाम में ग्लूको टेस्ट स्ट्रिप (जीटीएस01), ग्लूको टेस्ट स्ट्रिप (जीटीएस01), कैंडुला (सी 7401) फेविपिरा टैबलेट, एलबेंडाजोल टैबलेट, क्लाक्ससिलिन टैबलेट , कोवटोक टोसिलइजुंब टैबलेट, कोविन इनोक्जाप्रिन इंजेक्शन और आइब्रुफेन टैबलेट का स्टॉक शून्य हो गया है।

सीजीएमएससी में टेंडर निरस्त होने संबंधी जानकारी नहीं है। अब समीक्षा बैठक में इसकी जानकारी ली जाएगी कि आखिर बार-बार निविदा रद्द करने की स्थिति क्यों बन रही है।
- डॉ. आलोक शुक्ला, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य विभाग

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