सूखे के बाद किसानों पर मौसम की मार, खड़ी फसल-सब्जियां बर्बाद, अब मुआवजे का इंतजार

सूखे के बाद किसानों पर मौसम की मार, खड़ी फसल-सब्जियां बर्बाद, अब मुआवजे का इंतजार

Ashish Gupta | Publish: Feb, 15 2018 12:25:01 PM (IST) | Updated: Feb, 15 2018 12:25:02 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है।बिगड़े मौसम ने किसानों की फसल और सब्जियों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।

रायपुर . बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। सूखे के बाद भी किसानों को जहां फसल से मुनाफे की उम्मीद थी लेकिन दो दिन के बिगड़े मौसम ने किसानों की फसल और सब्जियों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। जिन किसानों ने बैंक से कर्ज लेकर फसल लगाई थी वे फसल बर्बाद होने से पूरी तरह निराश हो गए हैं।

मौसम का सबसे ज्यादा कहर सब्जियों की फसल गिरा है। प्रदेश में सब्जियों का रकबा 65 लाख हेक्टेयर से अधिक है। इसका ज्यादातर उत्पादन प्रभावित होगा। सबसे ज्यादा क्षति रायपुर और दुर्ग संभाग में हुई है। इसकी भरपाई के लिए सरकार मुआवजे का मलहम लगाने की तैयारी कर रही है,

तो विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने नुकसान के आंकलन के लिए 10 समिति गठित की है। वहीं जोगी कांग्रेस ने किसानों के कर्ज माफी और मुआवजे की मांग की है। एेसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। किसानों के मुताबिक कवर्धा जिले में हुई ओलावृष्टि से चना की 85 हजार हेक्टयर रकबे की फसल को नुकसान पहुंचा है।

दुर्ग और बेमेतरा जिले में 23 हजार हेक्टेयर रकबे की चने की फसल बर्बाद हो गई है। यहां चना, मसूर, धनिया, केला और पपीता की फसल को भी बहुत नुकसान पहुंचा है। अंबिकापुर,जांजगीर-चांपा क्षेत्र में खुले में रखे धान भीग गए हैं। कोरबा व रायगढ़ में ज्यादा बारिश नहीं होने से सब्जियों के उत्पादन पर असर पर ही ज्यादा असर पड़ेगा। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम बदलने से फसल और सब्जियों में कीटों का प्रकोप बढ़ जाएगा।

यह हुआ नुकसान
मौसम के चलते अभी टमाटर व अन्य सब्जियों की आवक तेज हो जाएगी। इससे सब्जियां अभी सस्ती होगी, लेकिन आगे उत्पादन पर असर पडऩे से सब्जियों के दाम बढ़ जाएंगे। फसल कम होने से आने वाले दिनों में चना, मटर, तिवड़ा, राई-सरसो, अलसी, गेहूं के मूल्यों में बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम के बादला का सीधा असर आम, पपीता और केला की पैदावार पर भी पड़ेगा। आंधी-तूफान की वजह से आम के बौर झड़ गए हैं। केल के पौधे फल समेत गिर गए हैं। पपीता का भी यही हाल है।

किसान को यह सुझाव
खेतों में पानी जमा नहीं होने से और निकासी की पर्याप्त व्यवस्था करें। फसल को जल्दी सुखाने की व्यवस्था करें। सब्जियों को पानी नहीं दें। मौसम खुलने के बाद आवश्यकतानुसार दवाओं का छिड़काव करें।

नुकसान के आंकलन के लिए कांग्रेस ने बनाई कमेटी
कवर्धा और बेमेतरा जिले में बेमौसम बारिश और ओला वृष्टि से फसल को हुए नुकसान के आंकलन के लिए कांग्रेस ने १० सदस्यीय समिति गठित की है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कमेटी को क्षेत्र का दौरान कर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

कृषि वैज्ञानिक गजेन्द्र चंद्राकर, ने कहा कि मौसम खुलने के बाद ही किसानों को राहत मिल सकती है। बारिश की वजह से चना, तिवरा, मटर, धनिया, मैथी की फसल को ज्यादा नुकसान होगा। फसल चटखने का खतरा भी बढ़ जाएगा। इस पानी से गेहूं की फसल को थोड़ा फायदा होगा, लेकिन ओला वृष्टि वाले क्षेत्र में फसल सोने से किसानों को नुकसान होगा।

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि पानी और ओलावृष्टि से जहां किसानों की फसल-सब्जियों को नुकसान हुआ है, वहां राजस्व पुस्तिक परिपत्र के तहत मुआवजा दिया जाएगा। जिन्होंने पीएम फसल बीमा योजना का लाभ लिया है, उन्हें बीमा कंपनी से भी मुआवजा मिलेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा कि किसानों के नुकसानों को देखते हुए सरकार मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर कर्ज माफी की घोषणा करें। साथ ही अफसरों को निर्देश दें, नुकसान का आकलन खेत से खेत के आधार पर किया जाए, ताकि वास्तविक नुकसान का आकलन हो सकें।

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