पहले ही बांटी जा चुकी है मलेरिया से बचने की दवा, इसलिए हम कोरोना से जंग में आगे

15 जिलों में बांटी गई थी हाईड्रोक्सी क्लोरोक्वीन टैबलेट, अब कोरोना मरीजों के इलाज में कारगर, सूरजपुर में मिले थे झारखंड के मरीज पॉजिटिव, इन्होंने ही तीन कर्मचारियों को किया था संक्रमित

By: Nikesh Kumar Dewangan

Published: 10 May 2020, 01:02 AM IST

रायपुर. एक तरफ पूरी दुनिया और हमारे अपने देश भारत के कई राज्य कोरोना वायरस की मार झेल रहा हैं तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ इनकी तुलना में काफी सुरक्षित दिखाई पड़ रहा है। प्रदेश में 19 मार्च को पहला कोरोना संक्रमित मरीज मिला था, उसके बाद से अब तक यानी 50 दिनों में 59 कोरोना संक्रमित मरीज ही मिले हैं। इनमें भी लंदन, थाईलैंड और सउदी अरब से लौटे आठ लोग विदेश से ही वायरस लेकर आए। तो वहीं लॉकडाउन में फंसे दूसरे राज्यों के लोग संक्रमित पाए गए हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यहां के लोग कैसे सुरक्षित हैं? इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य मलेरिया प्रभावित है। मलेरिया की दवा हाईड्रोक्सी क्लोरोक्वीन ही है जो कोरोना के इलाज में कारगर साबित हो रही है।
'पत्रिकाÓ पड़ताल में सामने आया कि प्रदेश में जनवरी से मार्च के बाच चले मलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत 1125835 लोगों की जांच की। इस दौरान 10929 पॉजिटिव पाए गए। जो पॉजिटिव थे और जो संदिग्ध भी थे उन्हें हाईड्रोक्सी क्लोरोक्वीन टैबलेट दी गई। यहां तक की माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात अद्र्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस के जवानों को तो नियमित अंतराल में दवा खाने को कहा जाता है। ये खाते भी हैं। इसलिए अभी तक बस्तर और सरगुजा संभाग (सूरजपुर को छोड़ दें, क्योंकि यहां एक आश्रित केंद्र झारखंड के तीन पॉजिटिव मरीज मिले और उन्होंने तीन शासकीय कर्मचारी को संक्रमित किया।) में एक भी केस रिपोर्ट नहीं हुआ है। यहां यह भी बता दें कि जून-जुलाई और नवंबर-दिसंबर में फिर से मलेरिया उन्मूलन अभियान चलने वाला है। गौरतलब है कि राज्य के १५ जिले मलेरिया प्रभावित हैं, अन्य जिलों में भी मरीज मिलते रहते हैं।

डॉक्टरों के ये भी हैं तर्क

बीसीजी का टीका
बैसिलेस केलीमेटी ग्यूरेन (बीसीजी) जो इंसानी शरीर को ट्यूबरक्लोसिस यानी की टीबी की बीमारी से बचाता है। भारत में तो बचपन में ही यह टीका लगा जाता है, इसलिए हमारे देश में अन्य देशों की तुलना में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या और मौत के आंकड़े कम हैंं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता
छत्तीसगढ़ के लोगों की रोक प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है। यहां प्याज की खपत अधिक है। कई प्रकार की भाजियां भी खाई जाती हैं। इसके साथ ही हमारा रहन-सहन भी वायरस के प्रभाव को कम करता है।

एक्सपर्ट व्यू

डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के विभागाध्यक्ष, टीबी एंड चेस्ट डॉ. आरके पंडा ने बताया कि जिस हाईड्रोक्सी क्लोरोक्वीन का इस्तेमाल कोरोना मरीजों के इलाज में प्रमुख दवा के रूप में किया जा रहा है, वही दवा हम वर्षों से मलेरिया के मरीजों को देते आ रहे हैं। मैं कह सकता हूं कि मलेरिया के जिन मरीजों ने यह दवा खाई है, निश्चित तौर पर वे सुरक्षित हैं। या उन पर कोरोना वायरस का हमला हुआ भी है तो वे गंभीर नहीं हो सकते। आप देखिए, बस्तर संभाग से एक भी मरीज रिपोर्ट नहीं है। सरगुजा में जो मरीज मिले वे बाहर हैं और बाहरी मरीजों ने अपने तीन कर्मचारियों को संक्रमित किया।

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Nikesh Kumar Dewangan Desk
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