विधानसभा में पारित हुआ विधेयक : अब शहरी क्षेत्र में आवासीय पट्टों को खरीदने और बेचने का रास्ता हुआ साफ

विधानसभा में पारित हुआ विधेयक : अब शहरी क्षेत्र में आवासीय पट्टों को खरीदने और बेचने का रास्ता हुआ साफ

Deepak Sahu | Publish: Mar, 02 2019 09:03:01 AM (IST) | Updated: Mar, 02 2019 09:03:02 AM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) विधेयक 2019 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया

रायपुर. शहरी क्षेत्र में 10 साल से अधिक समय तक के पट्टाधारियों की जमीन की खरीद-बिक्री हो सकेगी। इसके अलावा 19 नवम्बर 2018 के पहले से कब्जाधारियों को सरकार 30 साल के लिए पट्टा भी देगी। इससे 1 लाख 39 हजार 730 परिवारों को लाभ होगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) (संशोधन) विधेयक 2019 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

इसको सदन में रखते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया ने कहा कि जन घोषणा पत्र में शहरी क्षेत्रों में भूमिविहीन कब्जाधारी परिवारों को पट्टा प्रधान करने और आवासहीन परिवारों को दो कमरों का पक्का मकान दिए जाने का उल्लेख किया गया था। उन्होंने बताया कि इस विधेयक के पारित होने के बाद वर्ष 1984 से लेकर 2003 तक सरकारों द्वारा जिन पट्टों का वितरण किया है और उनकी अवधि समाप्त हो चुकी है। ऐसे पट्टों का भी नवीनीकरण कर नए पट्टों का वितरण किया जाएगा।

प्रदेश के शहरी क्षेत्रों के लगभग 65 हजार 780 परिवार, जिनके पास भूमि का मालिकाना हक नहीं होने के कारण उन्हें पक्का आवास बनाने के लिए राज्य शासन से वित्तीय सहायता प्राप्त होना संभव नहीं था। पट्टा प्राप्त होने पर ऐसे परिवारों को राज्य शासन द्वारा नगरीय क्षेत्रों में अधिकतम 2.29 लाख प्रति आवास के मान से सहायता राशि प्राप्त हो सकेगी।

 

रायपुर निगम के नियम को लेकर विरोध : संशोधित विधेयक में 50 फीसदी की वृद्धि की सीमा रखी गई है। इसके तहत नगर पंचायत वाली शहरों के लिए 1000 वर्गफुट के स्थान पर 1500 वर्गफुट, नगर पालिकाओं 800 वर्गफुट के स्थान पर 1200 वर्गफुट, रायपुर को छोडकऱ अन्य निगमों में 700 वर्गफुट के स्थान पर 1050 वर्गफुट और रायपुर नगर निगम के लिए 600 वर्गफुट के स्थान पर 900 वर्गफुट लागू किया गया है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इसका विरोध किया।

सर्वे कर देंगे मालिकाना हक
इस विधेयक के पारित होने के बाद राज्य सरकार सर्वे कराएगी। इसमें ऐसे व्यक्तियों का पता लगाया जाएगा, जिन्होंने पूर्व में पट्टेधारियों से जमीन की खरीदी की थी। सर्वे के बाद काबिज परिवार को ही पट्टा प्रदान किया जाएगा।

पट्टे के बाद भी कब्जा करने वालों को मिलेगी 50 फीसदी की राहत
प्रदेश में ऐसे परिवार भी है, जिन्हें पट्टा मिलने के बाद अपनी आसपास की कुछ जमीनों पर कब्जा कर लिया था। ऐसे परिवारों को पट्टा क्षेत्र से लगी हुई अधिकतम 50 फीसदी तक अधिक भूमि का भी काबिज परिवार के पक्ष में नियमितीकरण किया जाएगा। वहीं, दूसरी ओर पट्टाधारी परिवार के मुखिया की मृत्यु होने पर उसके वैधानिक वारिसान के पक्ष में भी पट्टे की भूमि का नामांतरण किया जाएगा।

बिलासपुर सिवरेज परियोजना पर भडक़े सीएम
बिलासपुर में एक दशक से चल रही सिवरेज परियोजना में लेटलतीफी पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नाराजगी जताई है। विधानसभा परिसर में शुक्रवार को हुई विभागीय अधिकारियों और बिलासपुर जिले के जनप्रतिनिधियों की बैठक में उन्होंने इस परियोजना को जल्दी पूरा करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा, परियोजना के हाइड्रोलिक ट्रायल के बिना नगर निगम को हैंडओवर नहीं किया जाएगा। गुरुवार को विधानसभा में इस परियोजना पर तीखी चर्चा हुई थी। बिलासपुर विधायक शैलेष पाण्डेय ने इसमें भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनका कहना था कि यह परियोजना कभी सफल नहीं हो पाएगी।

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