scriptThere is no faculty in Kanker, yet MBBS result is 99 percent. | कांकेर में फैकल्टी नहीं, फिर भी एमबीबीएस का रिजल्ट 99 प्रतिशत, डॉक्टरों ने जताई हैरानी | Patrika News

कांकेर में फैकल्टी नहीं, फिर भी एमबीबीएस का रिजल्ट 99 प्रतिशत, डॉक्टरों ने जताई हैरानी

locationरायपुरPublished: Dec 28, 2023 02:19:46 pm

MBBS first year result: पिछले साल सिम्स बिलासपुर के 59 छात्रों को कम अटेंडेंस का हवाला देकर परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया था, वहां का रिजल्ट 98 फीसदी रहा।

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पीलूराम साहू@पत्रिका. प्रदेश में इस बार एमबीबीएस फर्स्ट ईयर का रिजल्ट अब तक के सालों में सबसे बेहतर रहा है। कांकेर मेडिकल कॉलेज, जहां एनाटॉमी में एकमात्र फैकल्टी है, बायो केमेस्ट्री व फिजियोलॉजी में भी पर्याप्त फैकल्टी नहीं है, वहां का रिजल्ट 99 फीसदी रहा। पिछले साल सिम्स बिलासपुर के 59 छात्रों को कम अटेंडेंस का हवाला देकर परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया था, वहां का रिजल्ट 98 फीसदी रहा। नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर में जहां जरूरत से ज्यादा फैकल्टी है और टॉपर प्रवेश लेते हैं,वहां का रिजल्ट 94 फीसदी रहा। वहीं जगदलपुर में 82 फीसदी छात्र पास हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कांकेर में पर्याप्त फैकल्टी नहीं है, ऐसे में पढ़ाई भी प्रभावित होती। ऐसा रिजल्ट संदेहास्पद है। मेडिकल की पढ़ाई को मजाक न बनाएं।
एनाटॉमी में 50 फीसदी छात्र हुए थे फेल
कांकेर मेडिकल कॉलेज का रिजल्ट इस बार सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। पिछले साल तक जहां छात्रों ने डीएमई कार्यालय को पत्र लिखकर पढ़ाई नहीं होने की शिकायत की थी और एनाटॉमी में आधे से ज्यादा छात्र फेल हो गए थे, इस बार रिजल्ट शत-प्रतिशत के आसपास है। छात्रों ने अपने पत्र में फैकल्टी नहीं होने की बात कही थी। फैकल्टी की स्थिति अभी भी वैसी ही है, जैसे पिछले साल थी।
एनाटॉमी में तो केवल एक असिस्टेंट प्रोफसर है, जो नॉन मेडिकल है। यानी वह एमएससी है। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई भी नहीं की है। विशेषज्ञों के अनुसार एमएससी डिग्री वालों को क्लीनिकल नॉलेज भी नहीं होता। बायो केमेस्ट्री व फिजियोलॉजी में भी पर्याप्त फैकल्टी नहीं है। पत्रिका रिजल्ट पर सवाल नहीं उठा रहा है। अगर कमियों के बाद भी रिजल्ट अच्छा आ रहा है तो ये काबिलेतारीफ है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि एमबीबीएस में 98-99 फीसदी रिजल्ट चौंकाने वाला ही है।
मेडिकल कॉलेजों में ही जांच रहे उत्तर पुस्तिका, विशेषज्ञ उठा चुके हैं सवाल
पिछले तीन-चार साल से मेडिकल कॉलेजों में ही एमबीबीएस की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हो रहा है। ऐसे में एक्सटर्नल हो या इंटरनल, छात्रों को मनमाने नंबर दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा न केवल सरकारी कॉलेज, बल्कि निजी कॉलेजों में हो रहा है। पहले सरकारी कॉलेज वाले प्रेक्टिकल नंबर ज्यादा देने में कोताही बरतते थे। अब ऐसा नहीं हो रहा है। इस कारण सरकारी कॉलेजों का रिजल्ट भी बेहतर आ रहा है। जब से कॉलेजों में उत्तर पुस्तिका जांच रहे हैं, रिजल्ट औसतन 80 फीसदी से ऊपर आ रहा है।
निजी में बालाजी मेडिकल का रिजल्ट 89 फीसदी, रिम्स व शंकरा फिसड्डी सबसे खराब नतीजे शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज भिलाई व रिम्स रायपुर का आया है। वहां का औसत रिजल्ट 65 फीसदी के आसपास रहा। वहीं रायपुर स्थित श्री बालाजी मेडिकल कॉलेज रायपुर में 89 फीसदी छात्र-छात्राएं पास होकर सेकंड ईयर में गए हैं। मेडिकल के जानकारों का कहना है कि शंकराचार्य व रिम्स मेडिकल कॉलेज वाले समझ नहीं पाए कि प्रेक्टिकल में किस तरह नंबर देने है। इसलिए वहां का रिजल्ट खराब आया है। पिछली बार वहां 75 से 80 फीसदी रिजल्ट आया था।
ऑब्जर्वर भेजे जाते हैं- कुलपति
मेडिकल कॉलेजों में आब्जर्वर भेजे जाते हैं, जो परीक्षा की निगरानी करते हैं। इस बार अच्छा रिजल्ट तो आया है। कांकेर व सिम्स में नकल का कोई मामला नहीं आया है।
डॉ. एके चंद्राकर, कुलपति हैल्थ साइंस विवि
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मेडिकल की पढ़ाई को मजाक न बनाएं
कांकेर में पर्याप्त फैकल्टी न होते हुए भी रिजल्ट 99 फीसदी आना संदेहास्पद है। जब टीचर ही नहीं है तो पढ़ाई का अंदाजा लगा सकते हैं। मेडिकल की पढ़ाई को मजाक नहीं बनाना चाहिए। इससे समाज में गलत मैसेज जाएगा। छात्र-छात्राओं को मनमानी नंबर देने के बजाय योग्यता के अनुसार नंबर दिया जाए। यह केवल कांकेर की बात नहीं है। किसी भी कॉलेज में मनमानी नंबर न दें। सेंट्रलाइज्ड मूल्यांकन होने पर बेहतर रिजल्ट का पाेल खुल जाएगा।
डॉ. सीके शुक्ला, रिटायर्ड डीन रायपुर मेडिकल कॉलेज

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