तेरह सौ से ज्यादा फैक्ट्रियों और कारखानों में काम शुरू, 1 लाख मजदूरों को मिल रहा रोजगार

उद्योगों के हालातों पर गौर करें तो जिन उद्योगों में काम शुरू हुआ है, उसमें स्टील सेक्टर के उद्योगों के साथ ही स्पंज आयरन, मिनी स्टील प्लांट, रोलिंग मिल, मशीनरी, फैब्रीकेशन, सीमेंट, वायर इंडस्ट्रीज, प्लास्टिक, पैकेजिंग, प्लॉयवुड, फर्नीचर, ऑयल आदि सेक्टर शामिल हैं।

By: Karunakant Chaubey

Published: 23 May 2020, 08:16 PM IST

रायपुर. प्रदेश में लॉकडाउन के दौरान 20 अप्रैल के बाद 1300 से अधिक फैक्ट्रियों में काम शुरू हो चुका है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक फैक्ट्रियां और कारखाने शुरू होने के बाद लगभग 1 लाख मजदूरों को यहां काम मिला है। ये ऐसे मजदूर हैं, जो कि पहले से ही फैक्ट्रियों में काम कर रहे थे। कारखानों में काम शुरू होने के बाद इन्हें फिर से काम मिलने लगा है।

उद्योगों के हालातों पर गौर करें तो जिन उद्योगों में काम शुरू हुआ है, उसमें स्टील सेक्टर के उद्योगों के साथ ही स्पंज आयरन, मिनी स्टील प्लांट, रोलिंग मिल, मशीनरी, फैब्रीकेशन, सीमेंट, वायर इंडस्ट्रीज, प्लास्टिक, पैकेजिंग, प्लॉयवुड, फर्नीचर, ऑयल आदि सेक्टर शामिल हैं। औद्योगिक सूत्रों का कहना है कि सरकारी आंकड़ों के अलावा अन्य ऐसे कई उद्योग हैं, जो कि शुरू हो चुके हैं।

फैक्ट्रियों में उत्पादन के दौरान जरूरी नियमों का पालन करना होगा, जिसमें मॉस्क, सेनिटाइजर, फिजिकल डिस्टेंसिंग आदि शामिल हैं। वर्तमान में कई उद्योग 50 फीसदी से कम केपेसिटी में चल रहे हैं, वहीं कई उद्योग 10 से 20 फीसदी पर सिमटा हुआ है।

रॉ-मटेयिरल्स की किल्लत अभी भी

रॉ मटेरियल्स की किल्लत बनी हुई है। उद्योगों के लिए उपलब्धता की गति काफी धीमी है। कोयला की आपूर्ति भी आधे से भी कम है। फैक्ट्रियों को एक-दूसरे से जोडऩे वाली प्रक्रिया अधूरी है, जिसमें स्पंज आयरन, मिनी स्टील प्लांट, रोलिंग मिल, स्टील फैक्ट्रियों के बीच कॉरीडोर की मजबूती नहीं बन पा रही है। रॉ मटेयिरल्स की परेशानी दूर करने के लिए उद्योगपतियों ने राज्य व केंद्र सरकार को चिठ्ठी लिखी है।

मजदूरों की समस्या अभी भी

उद्योगों में मजदूरों की समस्या अभी भी बनी हुई है। उरला इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विनी गर्ग व रोलिंग मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने बताया कि दूसरे प्रदेशों में लौट चुके मजदूर अब वापस नहीं आ रहे हैं। कुशल श्रमिकों को तलाशने के लिए अभी कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा सकी है। कैंपस प्लेसमेंट जैसी प्रक्रियाओं के लिए अभी कोई ठोस प्रारूप तैयार नहीं किया गया है, जिसकी वजह से समस्याएं खड़ी हो रही है।

बड़े स्टील प्लांट को विदेशों से ऑर्डर

कोर सेक्टर की इंडस्ट्रीज को विदेशों से भी ऑर्डर मिलना शुरू हो चुका है। इसमें सबसे ज्यादा डिमांड फेरोएलाइज की है। राजधानी के उद्योगों से फेरोएलाइज का निर्यात यूरोप, एशिया के देशों में किया जा जा रहा है। स्टील बनाने के लिए जरूरी मटेरियल्स फेरोएलाइज के कुल उत्पादन में से लगभग 40 फीसदी मटेरियल को विदेशों में सप्लाई किया जाता है।

प्रमुख सचिव ने कहा- नीतिगत निर्णय लेना होगा

उद्योग विभाग का मानना है कि दूसरे राज्यों से वापस लौटने वाले मजदूरों में से कई कुशल श्रमिक होंगे, जो कि राज्य के उद्योगों में श्रमिकों की कमी को दूर कर सकते हैं। उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ से जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कई ऐसे मजदूर जो दूसरे प्रदेशों से लौट रहे हैं, उन्हें इन फैक्ट्रियों में नियोजित किया जा सकता है। इस संबंध में राज्य सरकार से मिले दिशा-निर्देशों के मद्देनजर काम किया जाएगा।

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Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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