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पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता के रवैए पर भड़के छत्तीसगढ़ के हजारों ठेकेदार, क्या है वजह पढि़ए पूरी खबर

रायपुर. पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता के एक आदेश पर छत्तीसगढ़ के ठेकेदार भड़क गए हैं।

रायपुर

Updated: March 21, 2022 09:17:59 pm

20 लाख से अधिक और 2 करोड़ के बीच निर्माण करने वाले छोटे ठेकेदारों के लिए इंजीनियरों की नियुक्ति करना अनिवार्य कर दिया है। इतना ही नहीं डिप्लोमा इंजीनियर को 15 हजार हर महीना और बीई इंजीनियर को 25 हजार हर महीना वेतन देने का आदेश जारी किया है। इस तरह के आदेश पर सवाल उठाते हुए कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने विरोध करते हुए कहा है कि प्रोत्साहित करने के बजाय विभाग के अधिकारी उन पर शिकंजा कसने का तरीका अपना रहे हैं। निर्माण कार्यों को लेकर विभाग के इंजीनियरों की जवाबदेही अधिक तय करने के बजाय छोटे ठेकेदारों को परेशान किया जा रहा है, जिसका असर निर्माण कार्यों पर पड़ेगा।

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इसी फार्मूले के तहत डिप्लोमा इंजीनियर, बीई डिग्रीधारी इंजीनियरों को नियुक्त करना ठेकेदारों के लिए लागू किया है, वरना निर्माण कार्य नहीं कर सकेंगे। भले ही वह ठेकेदार कई सालों का अनुभवी क्यों न हो। एेसा आदेश जारी होने के विरोध के साथ ही विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है कि आखिर हर महीने हजारों रुपए सरकारी खजाने से वेतन वाले इंजीनियरों की भूमिका क्या रह जाएगी। आमतौर पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता का पालन कराने और निर्धारित समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के डिवीजनों में पदस्थ इंजीनियरों की होती है। घटिया निर्माण पाए जाने पर विभागीय तौर पर संबंधित कांट्रेक्टर को ब्लैक लिस्टेड की कार्रवाई के साथ ही उस निर्माण कार्य की साइड के इंजीनियरों को भी उतना ही दोषी माना जाता है। एेसे में विभागीय तौर पर डिवीजनों में पदस्थ इंजीनियरों को और अधिक सक्रिय करने के बजाय निर्माण करने वाले ठेकेदारों पर पूरा भार डालने का तरीका अख्तियार किया जा रहा है।

प्रमुख अभियंता के खिलाफ लामबंद होंगे ठेकेदार
पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी के इस तरीके का छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है कि किसी भी निर्माण कार्य की साइड की जिम्मेदारी विभागीय तौर पर ही तय होनी चाहिए। इससे आने वाली दिक्कतों का समाधान होगा और निर्माण कार्यों में तेजी आएगी।

सी और डी श्रेणी के ठेकेदारों के लिए अनिवार्य किया
पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता कार्यालय से जारी आदेश के मुताबिक 20 लाख से लेकर 1 करोड़ तक के निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों को इंजीनियरों को नियुक्त करना होगा। तभी निर्माण कार्य कर सकेंगे। इसके लिए डिप्लोमा इंजीनियर का वेतन 15 हजार रुपए महीना और बीई डिग्रीधारी इंजीनियर का वेतन 25 हजार रुपए तय किया है। 1 से 2 करोड़ रुपए तक के टेंडर कार्य के लिए ३ इंजीनियर नियुक्त करना अनिवार्य किया है। इस पर एसोसिएशन ने आपत्ति किया है कि इस दायरे में अधिकांश डी और सी श्रेणी के ठेकेदार आते हैं। क्योंकि सी श्रेणी के ठेकेदार केवल 4 करोड़ कार्यों की ही पात्रता रखते हैं, उन्हें परेशान करने का तरीका अपनाया जा रहा है। 3-3 इंजीनियर रखना संभव नहीं है। बी श्रेणी के ठेकेदार 10 करोड़ तक के टेंडर लेने की पात्रता रखते हैं, जबकि ए श्रेणी के ठेकेदारों के लिए अनलिमिटेड शर्तें हैं। यानी कि करोड़ों और अरबों रुपए के कार्य करते हैं।

राज्य के छोटे ठेकेदारों को परेशान किया जा रहा
छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला का कहना है कि नित नया तरीका अपनाकर छोटे स्तर के ठेकेदारों को ही परेशान किया जा रहा है। करोड़ों रुपए के ग्लोबल टेंडर लेने वाले ठेकेदारों पर तो कोई फर्क नहीं पड़ता है। पर विभाग के इस आदेश से छोटे स्तर के ठेकेदारों पर शिकंजा कसा जा रहा है, जिनके लिए 15 हजार 25 हजार वेतन देना संभव नहीं है। जो विभाग में कई वर्षों से पंजीकृत हैं वे 25 लाख, 50 लाख 1 करोड़, 2 करोड़ के काम करते हैं। उसी से उनका परिवार चलता है। इस श्रेणी के ठेकेदार खुद 1 इंजीनियर रखते ही हैं। फिर भी अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। अधिक जवाबदेह विभाग के इंजीनियरों को बनाया जाए। केवल मेजरमेंट और कमीशन लेने तक सीमित न रहें। इस मामले को लेकर जल्दी ही विभाग के मंत्री ताम्रध्वज साहू से मुलाकात कर आदेश का वापस लेने की मांग करेंगे।

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निर्माण कार्यों के लिए विभाग के इंजीनियर तो जवाबदार तो होंगे ही, हर श्रेणी के ठेकेदार को इंजीनियरों की नियुक्त करना जरूरी किया गया है। इसके लिए 15 हजार से 25 हजार रुपए वेतन भी तय किया गया है। जिसका पालन कराया जा रहा है।
- ज्ञानेश्वर कश्यप, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी

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