छेरछेरा पुन्नी और मकर संक्रांति पर हजारों श्रद्धालु रह गए पुण्य स्नान से वंचित

राजिम त्रिवेणी संगम का पानी प्रदूषित व बदबूदार, चारों ओर फैली गंदगी, शासन-प्रशासन की उदासीनता से रोष

नवापारा-राजिम. जिस त्रिवेणी संगम के चलते नवापारा और राजिम की पहचान बनी है, आज उसकी स्थिति किसी नाले से भी बदतर हो गई है। कभी पानी से लबालब भरे रहने वाला संगम आज पानी के लिए तरस रहा है। संगम में जिस ओर नजर दौड़ाएं केवल रेत, मुरूम या फिर कंटीले पेड़-पौधे ही दिखाई दे रहे हैं। संगम की सूखी धरती पर चारों ओर गंदगी फैली हुई है। थोड़ा पानी अगर है भी तो वह इतना प्रदूषित और बदबूदार है कि नहाना तो दूर आचमन तक नहीं किया जा सकता। छेरछेरा पुन्नी और मकर संक्रांति पर हजारों श्रद्धालु पुण्य स्नान करने से वंचित रह गए।
इस त्रिवेणी संगम की महत्ता इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम के तुल्य मानी जाती है । इसी कारण सालभर यहॉं प्रदेश के कोने-कोने से लोगों का विभिन्न अवसरों पर पुण्य स्नान करने, अपने पितरों का पिण्डदान, रिश्तेदारों का अस्थि विसर्जन व श्राद्ध करने आते हैं। इस साल पुण्य स्नाान के दो अवसर छेरछेरा पुन्नी व मकर संक्रांति निकल चुके हैं। दोनों ही अवसरों पर श्रद्धालु स्नान करने यहां आए भी, लेकिन नाममात्र व प्रदूषित पानी देखकर बिना स्नान किए लौट गए। अगले महीने राज्य शासन 15 दिनों तक चलने वाले राजिम माघी पुन्नी मेला का आयोजन करने जा रही है। इसमें प्रदेश के विभिन्न इलाकों से लोग मेला घूमने से ज्यादा संगम में स्नान का पुण्य लाभ अर्जित करने आते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाय कि राजिम मेले का मुख्य आकर्षण त्रिवेणी संगम है, तो आतिशयोक्ति नहीं होगी।
जनप्रतिनिधि भी नहीं कर रहे पहल
संगम आज किसी खेल के मैदान या फिर सुनसान पड़े घने जंगल की तरह नजर आ रहा है। संगम की इस दुर्दशा पर लोगों में काफी आक्रोश है। शासन-प्रशासन और सत्तारूढ़ कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों द्वारा संगम की दुर्दशा सुधारने के लिए कोई पहल नहीं करने से लोगों में हैरानी है।
स्थानीय लोग भुगत रहे खमियाजा
संगम की दुर्दशा का सबसे अधिक खमियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। निस्तारी के लिए संगम पर निर्भर रहने वाले दोनों ही शहरों के लोगों को निस्तार पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। मजबूरी में लोग न चाहते हुए भी वर्तमान में संगम में मौजूद प्रदूषित पानी में निस्तार कर रहे हैं। छेरछेरा पुन्नी में बाहर से पुण्य स्नान का लाभ लेने आए लोग इस गंदे पानी में स्नान करने की जगह अंजुली में थोड़ा पानी भरकर आचमन करते हुए निकल गए थे।

dharmendra ghidode Desk/Reporting
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