वनस्पति रंगों का प्रयोग वस्त्रों की रंगाई में

वनस्पति रंगों का प्रयोग वस्त्रों की रंगाई में
छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित की समीक्षा बैठक

Lalit Sahu | Updated: 06 Oct 2019, 07:42:44 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

अब ग्रामोद्योग विभाग ने नवाचार करते हुए हाथकरघा वस्त्रों की रंगाई में वनस्पति रंगों जैसे मेहंदी, अनार, हर्रा, कत्था, बबूल के छिलके और प्याज के रस से निर्मित रंगों का प्रयोग किया जा रहा है

रायपुर। ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्र कुमार ने कल नीर भवन में छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित रायपुर की समीक्षा बैठक ली। ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्र कुमार ने इस समीक्षा बैठक में संघ के कामकाज और संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। इस अवसर पर मंत्री गुरु रूद्र कुमार ने अधिकारियों से कहा कि हाथकरघा वस्त्रों के निर्माण और उनकी गुणवत्ता की उत्कृष्टता सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना बनाकर अतिशीघ्र प्रस्तुत करें। उल्लेखनीय है कि सरकार गठन के पश्चात अब ग्रामोद्योग विभाग ने नवाचार करते हुए हाथकरघा वस्त्रों की रंगाई में वनस्पति रंगों जैसे मेहंदी, अनार, हर्रा, कत्था, बबूल के छिलके और प्याज के रस से निर्मित रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। इन वस्त्रों को देश और विदेश में बहुत पसंद किया जाता है और इसकी काफी अच्छी मांग है। मंत्री गुरु रूद्र ने कहा कि रंगों के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले वनोपज को आदिवासी अंचलों से ग्रामोद्योग विभाग सीधा क्रय करें। जिससे आदिवासी अंचलों में विभाग के माध्यम से रोजगार उपलब्ध हो।

हाथकरघा संघ के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि हाथकरघा संघ द्वारा स्थानीय स्तर पर नेचुरल डाईंग को बढ़ावा देने के लिए राज्य के दो रंगरेजों को प्रशिक्षण हेतु नई दिल्ली भेजा गया था। प्रशिक्षण उपरांत लगभग 3000 मीटर कोसा वस्त्रों की रंगाई कर नई दिल्ली, नोएडा, मुंबई में विक्रय किया गया।

उन्होंने बताया कि विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा हथकरघा संघ को वर्ष 2018-19 में 194 करोड़ रुपए के वस्त्र क्रय आदेश प्राप्त हुए थे जिसकी आपूर्ति संघ द्वारा शत-प्रतिशत पूर्ण की गई। वर्ष 2019-20 में सितंबर तक 169 करोड़ के वस्त्र क्रय आदेश प्राप्त हुए हैं, जिसके विरुद्ध 166 करोड़ के वस्त्रों की संघ द्वारा आपूर्ति कर दी गई। चालू वित्त वर्ष में लगभग 205 करोड़ के शासकीय वस्त्र के आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री गुरु रूद्र द्वारा वर्ष 2019-20 में विभिन्न विभागों से प्राप्त क्रय आदेश एवं उनसे प्राप्त होने वाले भुगतान की समीक्षा की गई।

उन्होंने कहा कि शासकीय विभागों में मुख्यत: स्कूल शिक्षा, महिला बाल विकास, स्वास्थ्य, जेल, वन, पुलिस और आदिम जाति कल्याण विभाग को वस्तु वस्त्रों की आपूर्ति की जाती है। हाथकरघा संघ द्वारा वर्ष 2019-20 में 1457 करघों को उत्पादन कार्यक्रम देने का लक्ष्य रखा गया है। हाथकरघा वस्त्रों को और अधिक लोकप्रिय बनाने तथा विपणन करने हेतु रायपुर में 20 से 22 सितंबर में आयोजित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में 6 संस्थानों से एमओयू किया गया, जिसके तहत टाटा टाइटन कंपनी से 11 लाख 25 हजार रुपए के कोसा साडिय़ों के आदेश प्राप्त हुए हैं तथा मध्यप्रदेश हस्तशिल्प बोर्ड से लगभग 40 लाख रूपए के कोसा वस्तुओं के क्रय आदेश प्राप्त हुए हैं।

हथकरघा संघ द्वारा हाथकरघा वस्त्रों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश एवं राज्य के बाहर निरंतर प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। सितम्बर में छत्तीसगढ़ भवन में आयोजित प्रदर्शनी में 12 लाख रुपए के हाथकरघा वस्त्रों की बिक्री की गई। 2 से 3 अक्टूबर को आयोजित विशेष सत्र के दौरान विधानसभा परिसर में आयोजित प्रदर्शनी में लगभग 70 लाख रुपए के वस्त्रों का विक्रय किया गया। हथकरघा संघ द्वारा बुनकरों के कल्याण के लिए बुनकर बीमा योजना, छात्र-छात्राएं प्रोत्साहन पुरस्कार योजना और वरिष्ठ बुनकर सम्मान योजना संचालित की जा रही है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ हथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित रायपुर के अध्यक्ष मोती लाल देवांगन, ग्रामोद्योग सचिव एवं प्रबंध संचालक हेमंत पहारे सहित संघ के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

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