कुएं का मटमौला पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

देवभोग. बहालपारा में 15 परिवार आज भी विज्ञान के युग में मटमैला पानी पीकर जिन्दगी जीने को मजबूर हो गए है। इस मोहल्ले के 50 ग्रामीण बारहों महीने से मिट्टी खोद कर कुएंनुमा गड्ढे का मटमौला पानी निकालते हैं।

By: dharmendra ghidode

Published: 07 Mar 2020, 06:23 PM IST

देवभोग. बहालपारा में 15 परिवार आज भी विज्ञान के युग में मटमैला पानी पीकर जिन्दगी जीने को मजबूर हो गए है। इस मोहल्ले के 50 ग्रामीण बारहों महीने से मिट्टी खोद कर कुएंनुमा गड्ढे का मटमौला पानी निकालते हैं। यह गांव खजुरपदर पंचायत के आश्रित ग्राम है। 10 साल पहले गांव से दो किलोमीटर दूर बसा था। ग्रामीण टीकम सिंह की माने तो बहालपारा में पीने के पानी का एक ही जरिया मिटृी का कुंआ है। इसी कुएं के भरोसे पारा के पूरे 50 ग्रामीण हैं।
टीकम के मुताबिक मामले की जानकारी जिम्मेदार विभाग के अधिकारी वर्ग को भी दी जा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी आज तक उचित कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में मजबूरीवश ग्रामीण कुंए से पानी पीकर पिछले 10 वर्षों से जिन्दगी काटने को मजबूर हो गए हैं।
कुएं के गंदे पानी के भरोसे बुझती है प्यास
बहालपारा के महिलाओं की माने तो पानी हर महीने मटमैला रहता है। ऐसे में गांव से तीन किलोमीटर की दूरी पर खजुरपदर में हैंडपंप होने के चलते वहां जाकर पानी ला पाना मुश्किल होता है और उतना दूर से पानी लाने के लिए साधन की व्यवस्था भी नहीं हो पाता है। इसी के चलते पूरे बहालपारा की पूरी महिलाएं एक साथ बर्तन लेकर कुंए के सामने पहुंचती है, इसके बाद गांव के पुरुष महिलाओं की सहायता करते हुए कुंए से पानी खींचकर बर्तन में डालते जाते हैं। ग्रामीणों की माने तो ये क्रम पिछले 10 सालों से चला आ रहा है।
विज्ञान के युग में विकास की अजीब तस्वीर
यहां बताना लाजमी होगा कि शासन एक तरफ दावा कर रही हैं कि राज्य के हर जगह पीने के लिए शासन द्वारा स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जा चुकी है। वहीं छत्तीसगढ़ बने लगभग 19 साल हो चुके है। ऐसे में राज्य निर्माण के 19 साल बाद भी स्वच्छ पानी के लिए जद्दोजहद करते हुए मटमैला पानी से प्यास बुझाने की तस्वीर देखकर सरकार में सत्तासीन हो चुके जिम्मेदारों के विकास के दावों की पोल खोल देता हैं कि आज भी राज्य का अंतिम क्षेत्र विकास के लिए तरस रहा है। यहां बताते चले कि ग्रामीण जिस तरह से मटमैला पानी पीने के लिए उपयोग में ला रहे है, इसे देखकर यह भी कहना गलत नहीं होगा कि यदि समय रहते स्वच्छ पानी मुहैय्या करवाने के लिए जिम्मेदारों ने कोई उचित कदम नहीं उठाया तो ये आने वाले दिनों में ग्रामीणों के सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ होगा।
आपके माध्यम से मामले की जानकारी मिल रही है। मैं पीएचई विभाग को निर्देंशित करता हूं कि इस संबंध में जल्द ही उचित कदम उठाए।
श्याम धावड़े, कलेक्टर, गरियाबंद
मैंने तीन महीने पहले प्रभार लिया है। बहालपारा के 50 ग्रामीण कुंआ खोदकर अपना प्यास बुझाने को मजबूर हैं। मैंने अधिकारियों को मौखिक रूप से अवगत करवाया हैं कि बहालपारा के लिए हेडपंप की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। वहीं पीएचई विभाग को आवेदन कर जल्द ही हेडपंप किए जाने का अनुरोध करेंगे।
उपेन्द्र नेताम, सचिव, ग्रामपंचायत खजुरपदर

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