Patrika Utsav 2018: लेखक विनोद कुमार शुक्ल बोले - राजनीति ने लोगों का भोलापन खत्म कर दिया

पत्रिका उत्सव के शुरुआती सत्र में हिन्दी के सम्मानित लेखक विनोद कुमार शुक्ल ने कहा कि राजनीति की चालाकी ने लोगों का भोलापन समाप्त कर दिया है।

By: Ashish Gupta

Published: 04 Jan 2018, 06:10 PM IST

रायपुर . पत्रिका उत्सव के शुरुआती सत्र में हिन्दी के सम्मानित लेखक विनोद कुमार शुक्ल ने कहा कि राजनीति की चालाकी ने लोगों का भोलापन समाप्त कर दिया है। लेखन और जीवन से जुड़े अनेक सवालों के उन्होंने जवाब दिया। पत्रिका की ओर से ज्ञानेश उपाध्याय और राजकुमार सोनी ने उनके साथ संवाद किया।

आपकी रचना प्रकिया क्या है?
कोई स्थाई प्रक्रिया नहीं है। प्रत्येक रचना अपनी प्रक्रिया लेकर आती है और उसके साथ ही खत्म हो जाती है, इसलिए पाठक और लेखक के बीच कोई पथ नहीं। पाठक अपने अनुभव के साथ उस रचना से गुजरता है और अपनी जिंदगी में शामिल करता है।

आप बच्चों पर खूब लिख रहे हैं?
बच्चों के लिए लिखना कठिन है। आपको उनकी स्थिति में पहुंचना पड़ता है। हम कठोर यथार्थ में रहते हैं। उनकी दुनिया में प्रवेश करना बहुत कठिन होता है। बच्चों के लिए यथार्थ एक फैंटेसी की तरह होती है।

आपको दुनिया कैसे याद करे?
यह दुनिया तो भुला देने की दुनिया है। मेरे लेखन के जरिए मैंने जो कुछ दिया, विश्वास के साथ कह सकता हूं कि मैं न भी रहूं, तो मेरा भविष्य जरूर रहेगा।

आपके यहां दुख का मूल्य क्या है?
दुख का मूल्य यही है हम उसे भुलाकर खुश हों। गरीब आदमी हजार दुख के बाद भी खिलखिलाकर हंस देता है। एक बार अमरकंटक से लौटते समय गलत ट्रेन में बैठ गया। टीटीई को जुर्माना चुकाने के बाद भी वह रसीद देने को तैयार नहीं हुआ, तो मैंने पैसे वापस ले लिए और मुझे परिवार सहित भाटापारा स्टेशन पर उतार दिया गया। मैंने देखा, एक महिला ने अपने तीन बच्चों के लिए एक केला लिया और उसके टुकड़े खाने को दिए। इस दौरान जमीन पर केला नीचे गिर गया, लेकिन उसने उठाकर खा लिया। मां खुश थी कि उसने बच्चों को कुछ खिला दिया है। यह मुझे परेशान करने वाला था। जो सबको मिले, वही मुझको भी मिले, यही मेरा सुख है।

आपकी अपनी शैली है, आपकी कविताओं को पढ़कर ही लोग जान जाते हैं कि यह विनोद कुमार शुक्ल की कविता है, यह शैली कहां से हासिल हुई?
प्रयास से तो कोई भी रचना कभी नहीं की जा सकती। लिखने के पूर्व कभी किसी रचनाकार को मालूम नहीं होता, वह क्या लिखेगा। उसे तो कविता लिख लेने के बाद पता चलता है कि उसने क्या लिखा। कई बार जिन दो चार शब्दों से रचना शुरू की जाती है, अंत में वही शब्द गायब हो जाते हैं।

मुक्तिबोध का कितना प्रभाव खुद पर महसूस करते हैं?
लिखने-पढऩे पर सबका प्रभाव सब पर पड़ता है। मैं जब उनसे मिलता था, तब नहीं जान पाया, लेकिन बाद में जाना कि वह सबसे बड़े कवि हैं।

आप कैसे सपने देखते हैं?
मुझे अब नींद कम ही आती है। मैं कई बार समझ नहीं पाता कि कुछ सोच रहा हूं या सपने देख रहा हूं।

लेखक आज बाजार से संचालित हैं। मुकाबला कैसे करें?
बाजार की दुनिया बहुत खतरनाक दुनिया होती है, जो हमारी समझ-हमारे विचार पर बहुत भयानक रूप से आक्रमण करते हुए हमारी मनुष्यता को कमतर करते हुए एक ग्राहक के रूप में हमें प्रस्तुत करती है। यह खरीदार बना देती है। सारी सच्चाइयां जो मनुष्य को मनुष्य बनाती हैं, वह दूर होती चली जा रही हैं। महात्मा गांधी ने यह समझ लिया था और उन्होंने कहा था, बाजार से लडऩे का एक मात्र तरीका यह है कि अपनी जरूरत को समझकर उसे जरूरत बनाएं और इसे जितना कम कर सकें, उतना बेहतर। समूह के रूप में यदि आप अपनी मनुष्यता को पाने की कोशिश करेंगे, तो मुश्किल हो जाएगी।

राज्य की कौन-सी चीजें हैं, जो आपको भीतर तक सालती हैं?
पहले छत्तीसगढ़ के लोगों में बहुत भोलापन था। नि:श्चछलता बहुत थी। गरीबी में भी लोग यहां सफाई से रहना जानते थे। मैंने अद्भुत छत्तीसगढ़ देखा है। राजनीति ने स्थिति को खराब कर दिया है। राजनीति की चालाकी ने लोगों का भोलापन समाप्त कर दिया। शराब ने खराब स्थिति ला दी है, जो दुख की बात है।

रचनाओं पर जो फिल्में बनीं, उससे आप कितने संतुष्ट हैं?
रचना पर जब कोई दूसरी रचना होती है, तो उसे लेखक की रचना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। वह फिल्मकार की रचना हो जाती है।

कौन सा शहर आपको सर्वाधिक प्रिय है?
शहरों में राजनांदगांव का अनुभव ज्यादा रहा है। वैसे कोई शहर नहीं, जगह प्रिय होती है।

अपनी कौन-सी किताब आपको सबसे ज्यादा प्रिय है?
यह बहुत मुश्किल है और मैं इसका जवाब दे नहीं पाता, तो जो दूसरे कहते हैं, उसे ही मैं प्रिय मान लेता हूं।

आपका प्रिय रचनाकार कौन है?
यह भी बताना बहुत ज्यादा मुश्किल है। हां, मुक्तिबोध की रचनाएं अलग आनंद देती थीं।

आजकल के लेखकों में कौन ज्यादा पसंद है?
यह अच्छी बात है कि नए दौर के लेखक बहुत अच्छा लिख रहे हैं। ऐसे बहुतायत में हैं।

Show More
Ashish Gupta
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned