विप्रो के सीईओ आबिद अली ने रायपुर में दिए सफलता के एेसे मंत्र जिसे हर किसी के लिए जानना है जरूरी

एनआईटी का दसवां दीक्षांत समारोह, 1122 डिग्रियों के साथ 26 गोल्ड और 25 सिल्वर मैडल बांटे गए

By: Tabir Hussain

Published: 03 Dec 2019, 01:05 AM IST

ताबीर हुसैन @ रायपुर. गुड मॉर्निंग एनआईटी रायपुर, मैं काफी हंबल फील कर रहा हूं यहां आकर। आप सभी के भीतर इतनी स्किल है कि लाइफ में आने वाली दिक्कतों को फेस कर सकें। बस इसे इम्प्लीमेंट करने आना चाहिए। ये स्किल एजुकेशन से मिलती है। एजुकेशन से आपको कॉन्फिडेंट मिलता है और सही रास्ते पर लेकर जाने वाला नजरिया। जो कि मुझे एनाईटी से हासिल हुआ। ये कहना है 60 हजार करोड़ की कंपनी और 1 लाख 80 हजार कर्मचारियों को लीड करने वाले विप्रो के सीईओ आबिद अली नीमचवाला का। वे एनआईटी के दसवें दीक्षांत समारोह में बतौर चीफ गेस्ट बोल रहे थे। यहां पढ़ाई करते वक्त 5 साल में 5 चीजें सीखीं17 साल की उम्र में मैं एनआईटी (तब जीईसी) आया। पांच साल में मैं सिर्फ इंजीनियर हीं नहीं बना बल्कि हर साल कुछ न कुछ सीखता गया। नीमचवाला ने बताया कि यहां पढ़ाई करते वक्त पहले साल मैंने सीखा इंडिपेंडेंट। कैसे घर से दूर अकेले रहा जाता है। चीजों को अकेले रहते हुए कैसे टेकल किया जाता है। दूसरे साल में यह सीखा कि हमें अपने आप को दूसरों के लिए नहीं बदलना चाहिए। हमारी जो वैल्यूज है जो घर से मिली हैं उसे भूलना नहीं चाहिए। तीसरे साल मैंने लिडरशिप सीखी। खुद और दूसरों के आइडिए से ऐसी चीज निकालना जो सभी के लिए बेहतर हो। चौथे साल में लाइफ को एंजॉय करना सीखा। अच्छे-बुरे दिन चलते रहेंगे। मुझे समझ में आने लगा था कि अब कॉलेज से जाने का वक्त आ गया है और अच्छे-खासे दोस्त भी बन गए थे। आखिरी साल में मैंने प्रेशन और एंजायटी को हैंडल करना सीखा।

27 साल के कॅरियर का निचोड़, आप भी ले सकते हैं सीख

1. ईमानदारी : जो भी करो ईमानदारी से करो। पढ़ाई से लेकर काम सभी ऑनेस्टी से करो। 2. हमेशा सीखते रहो: हर क्षेत्र में कुछ न कुछ नया होते रहता है। अगर आप थोड़ा भी पीछे हुए तो दुनिया से पीछे हो जाओगे। 3. फेलियर से डरो नहीं: जब आप किसी चीज में फेलियर हो जाएं तो घबराने की बजाय देखना चाहिए कि गलती कहां हुई। उस गलती को दोबारा दोहराने की बजाय सबक लो। 4 रिस्क लो: अपने भीतर की आवाज सुनो। रिस्क से इनोवेशन निकलता है। मैं हमेशा रिस्क से खेलता हूं लेकिन सोच समझकर जोखिम लेता हूं और कुछ नया इनोवेट कर पाता हूं। 5. बीइंग ह्यमेनिटी- किसी भी काम को करते वक्त मानवता, सहानुभूति और विनम्रता बनाए रखें। भीतर के इंसान को मरने मत दो।

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मंदी के सवाल पर बोले

कभी भी आप इकोनॉमिक की हिस्ट्री देखें तो साइकलिकल होती है। बिजनेस में हम मानकर चलते हैं कि शुरू में इन्वेस्टमेंट करना होता है ताकि कैपिसिटी बने। जब सभी लोग निवेश करते हैं तो ओवरकैपेसिटी हो जाती है। इससे मंदी आती है। इसके बाद कैपेसिटी और निवेश कम या बंद हो जाता है। जब मंदी हो तो सरकार की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार ने ऑलरेडी कुछ पैकेजेस अनाउंस किए हैं इससे इंडस्ट्रीज को हेल्प मिलेगी। कंपनियों के लिए भी अच्छा मौका होता है कि वह अपने आप को ज्यादा कॉम्पीटेटिव बनाए। इससे वे वापस मार्केट शेयर गेन करते हैं। दोनों चीजें साथ-साथ चलती हैं।

ये हैं विप्रो की ग्रोथ की चार स्ट्रेटजी

डवलपर प्रोग्राम बनाना। पुरानी कंपनियों के आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर को मॉड्यूलाइज करना। कनेक्टिविटी पर ट्रस्ट जिसमें डेटा प्राइवेसी और सायबर सिक्योरिटी शामिल है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर काम करना।

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350 नहीं आ पाए डिग्री लेने

वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शुरू हुए समारोह में 859 ग्रेजुएट, 216 पोस्ट-ग्रेजुएट और 47 पी.एच.डी. उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही कुल 51 पदक जिनमें 26 स्वर्ण पदक और 25 रजत पदकों से मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। किसी वजह से 350 छात्र डिग्री लेने नहीं आ पाए। संस्थान के डायरेक्टर डॉ. ए. एम. रवाणी ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने संस्थान द्वारा एनआईआरएफ रैंक 74 अर्जित करने पर हर्ष जताया।


बेस्ट डिपार्टमेंट इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

देर शाम संस्थान ने अपना स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर बेस्ट डिपार्टमेंट का अवॉर्ड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को दिया गया। हर स्ट्रीम से बेस्ट स्टूडेंट का अवॉर्ड दिया गया। बेस्ट फैकल्टी में टाई हुआ और संयुक्त रूप से डॉ एस गुप्ता, एनडी लोंढे और डॉ नितिन जैन को दिया गया।

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मुझसे ज्यादा संघर्ष मां ने किया

ये हैं दुर्ग के पुनीत उपाध्याय। बॉयोटेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग पूरी की। चार साल तक मां प्रमिला उपाध्याय ने रोज अपडाउन किया। सुबह 9.30 बजे क्लास लाकर छोड़ती और छुट्टी होने के बाद लेकर जातीं। आज बेटा इंजीनियर बन गया। मां के आंखों में खुशी के आंसू थे। चुप्पी सबकुछ बयान कर रही थी कि उनकी तपस्या आज पूरी हुई। पुनीत कहते हैं मेरे से ज्यादा संघर्ष तो मां का रहा। मैं उनके जज्बे को सैल्यूट करता हूं। रोज आना-जाना इतना आसान नहीं होता है। दीक्षांत में उनके साथ मम्मी के साथ बहन कात्यानी उपाध्याय झा आईं थीं। कात्यानी ने बताया कि हमारा इंस्प्रिरेशन तो पुनीत है। उसने डिसएबिलिटी को कभी आड़े नहीं आने दिया। पुनीत फिलहाल जॉब चाह रहे हैं। उनकी शिकायत है कि सरकार ने कोई खास योजना नहीं बनाई है जिससे हमारे लिए जॉब अपॉरचुनिटी बढ़े।

दोनों ओवर ऑल टॉपर दो एक ही क्लास के, पैरेंट्स भी परिचित

कम्पयूटर सांइस एंड इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स इशान सिंघल और सिमरन गोयल एक साथ पढ़े। दोनों रायगढ़ से रहे हैं। दोनों के पैरेंट्स भी एक दूसरे से परिचत हैं। समारोह में इशान अपनी मॉम के साथ आए थे। उनकी मॉम सारिका सिंघल ने कहा कि हम चाहते थे कि बेटा भी हमारी तरह डॉक्टर बने लेकिन हमने कभी फोर्स नहीं किया। सिमनर के पैरेंट्स ने कहा कि हमें सारे जहां की खुशी मिल गई। हमारी एक ही बेटी है और हमें उस पर नाज है।

Wipro ceo Abid ali neemuchwala give success mantra in NIT Raipur

फैमिली का पांचवां इंजीनियर जय

पचपेड़ी नाका के जय सिकदर अपनी फैमिली के पांचवें इंजीनियर हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 9.59 सीपीआई के साथ गोल्ड मिला है। पापा जेएन सिकदर सीएसईबी में असिस्टेंट इंजीनियर हैं। मॉम रोमा हाउसवाइफ। जय की तीन बहनें हैं और तीनों इंजीनियर। जय ने बताया कि फस्र्ट ईयर में कुछ सब्जेक्ट काफी टफ थे, एक समय ऐसा भी आया था जब मैं हताश हो गया था। बहनों ने समझाया तो मैंने फिर कोशिश की और हर साल फस्र्ट आता रहा। आगे एमबीए करना है इसके लिए एक्सपीरियंस चाहिए इसलिए मैं अभी हैदराबाद में जॉब कर रहा हूं।

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Tabir Hussain Incharge
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