scriptWomen Reservation In Politics Husband Running Work From Parshad Office | राजनीति में आरक्षण या आरक्षण की राजनीति? जानिए कैसे महिला आरक्षण के नाम पर ठगी जा रही है जनता | Patrika News

राजनीति में आरक्षण या आरक्षण की राजनीति? जानिए कैसे महिला आरक्षण के नाम पर ठगी जा रही है जनता

हालांकि राजनीति में आरक्षण महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं, महिलाओं की जगह उनके पति पद और जिम्मेदारियां संभालते नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर राजनीति में आरक्षण चल रहा है या आरक्षण की ही राजनीति!

रायपुर

Published: June 12, 2022 06:53:20 pm

रायपुर. अनेक फिल्म और कहानियों में आपने देखा होगा कि महिलाओं को राजनीतिक पद मिलने के बाद उनके पति उनके पीछे से कमान संभाले हुए हैं। इस मामले में रील लाइफ और रियल लाइफ के बीच का अंतर खत्म होता नजर आ रहा है। मामला रायपुर नगर पालिका निगम का है जहां पर कागजों पर तो महिलाएं पार्षद हैं लेकिन उनकी कुर्सी पर महिलाओं के पति प्रशासनिक कार्यभार संभालते हुए दिखाई पड़ रहे हैं।

निगम के खर्चे पर कर आए इंदौर चंडीगढ़ टूर
जानकारी के मुताबिक पिछले महीने निगम की चार महिला पार्षदों के साथ उनके पति भी इंदौर और चंडीगढ़ के दौरे पर गए थे। वे निगम के खर्चे पर उसी होटल में ठहरे थे, जहां निगम ने पार्षदों को ठहराया था। इतना ही नहीं, हर अहम बैठक में भी वे शामिल हुए थे। जिन चार महिला पार्षदों के पति टूर पर गए थे उनका नाम अंजनी विभा (एमआईसी सदस्य), नीलम जगत (कांग्रेस पार्षद), गोदावरी साहू (भाजपा पार्षद) और टेस साहू (भाजपा पार्षद) है।

जोन अध्यक्ष के काम में भी हस्तक्षेप
जोन अध्यक्ष के केबिन में भी महिला अध्यक्षों के पति उनकी कुर्सी के पास अपनी कुर्सी सजाकर जोन के अधिकारियों की मीटिंग लेते रहते हैं। यहां तक कि जोन वार्डों में खुद पार्षदों के पति ही अधिकारियों के साथ दौरे पर जाते हैं।

आयुक्त ने महिला पार्षदों के पतियों से मिलने से किया इनकार
हाल ही में नए आयुक्त मयंक चतुर्वेदी ने जब प्रशासनिक कार्य के सिलसिले में महिला पार्षदों के पतियों से मिलने से इनकार किया और कहा कि वे सीधे पार्षदों ही से मिलेंगे तो इस बात पर महिला पार्षदों में हड़कंप मच गया। अब विपक्षी पार्षद भी आयुक्त के इस रवैये से नाराज़ हैं।

बता दें, इंदौर और चंडीगढ़ गए पार्षदों और अधिकारियों के दल में कुल 80 लोगों की टीम थी। इन सभी के खर्चे को लेकर तत्कालीन आयुक्त प्रभात मलिक ने कहा था कि स्टडी टूर के लिए 40 लाख रुपए ही स्वीकृत किए गए हैं, इससे अधिक राशि का खर्च स्वीकार नहीं होगा। वहीं टूर खत्म हुए एक महीना हो चुका है लेकिन अभी तक इसका बिल जमा नहीं किया गया है।

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