ब्लड डोनेट डे पर मिलिए इन महादानियों से

Tabir Hussain

Publish: Jun, 14 2018 01:11:34 PM (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
ब्लड डोनेट डे पर मिलिए इन महादानियों से

बूंद-बूंद खून की कीमत समझकर बचा रहे दूसरों की जिंदगी

ताबीर हुसैन @ रायपुर. रक्तदान करने से किसी के जीवन को करीब से छूने का अहसास होता है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। इससे न सिर्फ किसी को नवजीवन मिलता है बल्कि खुद को तसल्ली महसूस होती है। हालांकि ब्लड की जितनी जरूरत है उतनी सप्लाई नहीं है, लेकिन लोगों में इसे लेकर अवेयरनेस जरूर बढ़ रही है। सिटी में कई ग्रुप्स हैं जो ब्लड डोनेट के लिए काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया के आने से इसमें क्रांति आ गई है। क्योंकि जरूरतमंद को ब्लड मुहैया कराने के लिए मिनटों में सूचनाएं सैकड़ों किमी दूर पहुंच जाती है और वक्त रहते खून उपलब्ध हो जाता है।

24 साल की नौकरी में पहली बार देखा बाम्बे ब्लड ग्रुप डोनर
मैं 24 साल से मेकाहारा में ब्लड डोनेशन का काम देख रहा हूं। इन वर्षों में करीब एक लाख लोगों के ब्लड डोनेट करवाए हैं लेकिन आज पहली बार बाम्बे ब्लड ग्रुप के किसी डोनर को देख रहा हूं। यह कहना है सीनियर ब्लड बैंक टेक्नोलॉजिस्ट शब्बीर खान का। दरअसल, मेकाहारा में भर्ती एक बच्ची के लिए बाम्बे ब्लड ग्रुप की जरूरत पड़ी। इसके लिए रायगढ़ से ठाकुर सतीश सिंह ने रक्तदान किया। ठाकुर अब तक बेंगलूरु, कोलकाता, राउरकेला, रायगढ़, कटक में जाकर रक्त डोनेट कर चुके हैं। वे बताते हैं कि एक सिकलिन पेशेंट को खून की जरूरत थी। मैं उसे ब्लड देने गया था लेकिन खून की जांच में मेरा बाम्बे ग्रुप निकला। हालांकि उस बच्चे को मैं खून नहींं दे पाया। मालूम हो कि इसी बच्ची के लिए छह महीने पहले मुंबई से रक्तदान करवाकर बाय प्लेन भेजा गया था।

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एक्सीडेंट में ब्लड की जरूरत पड़ी, खुद करने लगे डोनेट
राजधानी से करीब 30 किमी दूर धरसीवां-चरौदा के हाजी अनवर अली वर्ष 2009 में हादसे का शिकार हो गए। उन्हें नौ बोतल खून की जरूरत पड़ी। वे आर्टिफिशियल पैर से चलते हैं। चूंकि उनका ग्रुप एबी नेगेटिव है। मशक्कत के बाद खून का इंतेजाम हो पाया था। तब से वे न सिर्फ ब्लड डोनेट कर रहे हैं बल्कि लोगों को जागरूक भी। उनकी मेडिकल शॉप है। 31 की उम्र में उन्होंने 40 बार ब्लड डोनेट किया है। ज्यादातर सिटी ब्लड बैंक, मॉडल ब्लड बैंक, एसएसडी में रक्तदान किया है।

World Blood Donor Day

ओम साईं रक्तदाता सेवार्थ समिति
फाउंडर वासुदेव राव रेलवे में कार्यरत हैं। इन्होंने अब तक 85 बार रक्तदान किया है। इन्होंने बताया कि ग्रुप की तरफ से 5500 जरूरतमंदों को खून मुहैया करा चुके हैं।
छग ब्लड डोनर फाउंडेशन
फाउंडर विवेक साहू के ग्रुप में करीब चार हजार डोनर हैं जिसमें से 800  रेयरेस्ट ग्रुप के हैं। विवेक की उम्र 24  वर्ष है। वे प्राइवेट जॉब करते हैं और उन्होंने अब तक 20 बार रक्तदान किया है।

डोनेशन : 53 
नाम : केएल यादव, निवासी डब्ल्यूआरएस कॉलोनी
मुख्य कार्यालय अधीक्षक डीएलएस
कैसे प्रेरित हुए- दोस्तों को देखकर
डोनेशन 54
नाम : रवि कुमार साहू निवासी संतोषी नगर खमतराई
ट्रेवल्स
कैसे प्रेरित हुए : ब्लड डोनर्स से इंस्पायर

World Blood Donor Day

रक्तदान को लेकर जरूरी बातें
- दो रक्तदान के बीच न्यूनतम समय का अंतर कम से कम 3 महीने होना चाहिए। इसका कारण यह है, सामान्य तौर पर रक्तदान के बाद शरीर में रक्त का पुनर्जन्म करने के लिए रक्त कोशिकाओं को लगभग तीन महीने लग सकते हैं। संख्याओं के अनुसार, आप एक वर्ष में चार बार रक्त दान कर सकते हैं।
- जब व्यक्ति रक्तदान करता है तो यह सुनिश्चित करें कि उसकी आयु 18 से 65 साल के बीच है और वजन 45 किलो से अधिक है, जो किसी भी व्यक्ति द्वारा रक्तदान करने के लिए महत्वपूर्ण मानदंड है। इसके अलावा अच्छे स्वास्थ्य के साथ आपकी हीमोग्लोबिन सामग्री 12.5 मिलीग्राम से अधिक होनी चाहिए।
- रक्तदान करने के बाद पानी पीना या किसी अन्य तरल पदार्थ का सेवन करना सुनिश्चित करें क्योंकि इससे आपको हाइड्रेटेड रहने में मदद मिलेगी। हालांकि, वायुकृत पेय या कार्बोनेटेड शीतल पेय पीने से दूर रहें।
- जहां तक आहार की बात है, रक्तदान करने से पहले कुछ हल्का खाएं।
- इसके अलावा, रक्तदान से पहले दिन में शराब पीने से बचें और रक्तदान से पहले धूम्रपान न करें। अक्सर ब्लड डोनेट करने के बाद क्या खाना चाहिए ये सवाल हर किसी को परेशान करता है तो सुनिश्चित करें कि आप ऐसे खाद्य पदार्थ का सेवन करते हैं जिनमें फोलिक एसिड, विटामिन बी 6 और बी 2 होते हैं।

कौन कर सकता है ब्लड डोनेट
वजन 45 किलो या उससे अधिक हो।
पल्स रेट 50 से 100 / के बीच होनी चाहिए।
शरीर का तापमान 99.5 से कम होना चाहिए।
उम्र 18 से 60 साल के बीच है।
रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12. ग्राम से ज्यादा होनी चाहिए।
लो ब्लड प्रेशर 100 एम एम से कम होना चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर 160 से कम होना चाहिए ।
पुरुष 90 दिन और महिलाएं 120 दिन बाद दोबारा रक्तदान कर सकती है।
आप स्वस्थ हैं और आपको मलेरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस आदि संक्रमक बीमारी नहीं है या काफी समय से नहीं हुई है।

14 जून को ही क्यों मनाते हैं
बहुत कम लोग जानते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए 14 जून को ही विश्व रक्तदाता दिवस के तौर पर क्यों चुना गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन कार्ल लेण्डस्टाइनर नामक विख्यात ऑस्ट्रियाई जीवविज्ञानी और भौतिकीविद की याद में उनके जन्मदिन के अवसर पर रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के तौर पर मनाता है। वर्ष 1930 में शरीर विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कार्ल को यह श्रेय जाता है कि उन्होंने रक्त में अग्गुल्युटिनिन की मौजूदगी के आधार पर रक्त का अलग अलग रक्त समूहों - ए, बी, ओ में वर्गीकरण कर चिकित्सा विज्ञान में अहम योगदान दिया था।

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