World Elder Abuse Awareness Day : जाएं तो जाएं कहां! बुजुर्गों पर भारी महामारी

पैसों की किल्लत और घर में बदसलूकी

By: lalit sahu

Published: 15 Jun 2021, 07:16 PM IST

आज दुनियाभर में विश्व बुजुर्ग दुव्र्यवहार जागरूकता दिवस (World Elder Abuse Awareness Day) मनाया जा रहा है। यह खास दिन हर साल दुनियाभर में 15 जून को बुजुर्गों के साथ होने वाले दुव्र्यवहार को रोकने और इसके प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 66/127 के परिणामस्वरूप इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई थी।

लेकिन पिछले कुछ समय से कोरोना नाम की महामारी ने दुनियाभर के बुजुर्गों का जीवन बेहद कठिन बना दिया है। जिसका खुलासा बुजुर्गों के कल्याण के लिए ही समर्पित एक गैर सरकारी संगठन, हेल्पएज इंडिया ने किया है। विश्व बुजुर्ग दुव्र्यवहार जागरूकता दिवस पर हेल्पएज इंडिया ने अपनी छह शहरों में हुए सर्वेक्षण की सर्वे रिपोर्ट जारी की है। इस सर्वेक्षण रिपोर्ट में कोरोना के दौरान अलगाव और भय की उन गहरी भावनाओं को उजागर करने वाली कुछ कठोर वास्तविकताओं को सामने लाया गया है, जिससे आज बुजुर्ग निपट रहे हैं। साथ ही घरेलू परिवेश और ओल्ड एज होम में रहने वाले बुजुर्गों के जीवन का भी आकलन किया गया।

'द साइलेंट टॉरमेंटर : कोविड 19 एंड द एल्डरली' नाम के शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में, छह शहरों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 3500 से अधिक हिस्सा लेने वाले बुजुर्गों ने बताया कि कैसे कोरोना नाम की महामारी ने उनकी दूसरों पर वित्तीय निर्भरता को बढ़ा दिया है। जबकि उनकी देखभाल करने वालों की आय में कमी आई है। इसके अलावा इस रिपोर्ट में बुजुर्गों के साथ बढ़ते दुव्र्यवहार, बुजुर्गों की शरणस्थली, वृद्धाश्रम, जीवित रहने के लिए संघर्ष के बारे में भी जिक्र किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार 58 प्रतिशत बुजुर्गों के परिवार के सदस्य कोरोना की वजह से वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे। दिन भर इतने पास रहते हुए भी बुजुर्ग चाहते थे कि कोई उनके साथ रहे, कोई उन्हें सिर्फ बात करने के लिए बुलाए। इस दौरान परिवार के इतने करीब रहते हुए भी बुजुर्गों ने खुद को फंसा हुआ और निराश महसूस किया।

एक और बड़ी समस्या जो इस दौरान बुजुर्गों के लिए चिंता का विषय रही, वो थी उनकी दूसरों पर बढ़ती वित्तीय निर्भरता। रिपोर्ट में बताया गया कि 80-89 वर्ष के आयु वर्ग के करीब 40 प्रतिशत बुजुर्ग अपने खर्च के लिए अपने परिवार के सदस्यों पर निर्भर थे। उनका कहना है कि उन्हें इस दौरान आवश्यक सहायता नहीं मिली, क्योंकि उनकी देखभाल करने वालों की या तो नौकरी चली गई थी या फिर वेतन में कटौती हुई। ऐसे लोगों में 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं।

इस दौरान एक और दर्दनाक रहस्य से पर्दा उठाते हुए अधिकांश बुजुर्गों ने उनके साथ दुव्र्यवहार की शिकायत की। हालांकि कई लोगों के साथ उनके परिवार के सदस्यों ने ही मौखिक रूप से दुव्र्यवहार किया था, तो 23 प्रतिशत को थप्पड़ या पीटा गया था। इस तरह का दुव्र्यवहार करने वालों में से लगभग आधे लोग बुजुर्गों के बेटे थे और एक चौथाई केस में ऐसी प्रतिक्रियाओं में उनकी बहूएं शामिल थीं। 15 प्रतिशत से भी कम बुजुर्गों ने कहा कि बेटियों ने भी उनके साथ अभद्रता का व्यवहार किया।

हेल्पएज इंडिया के मिशन हेड डॉ. इम्तियाज अहमद ने कहा, 'आज हम इस वास्तविकता में जी रहे हैं, कोरोना ने दुव्र्यवहार करने वाले की प्राथमिक भूमिका निभाई है, जो हर तरफ से बुजुर्गों को बेहद बुरे तरीके से प्रभावित कर रहा है।'

lalit sahu Desk
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