World Hearing Day: WHO ने दी चेतावनी, 2050 तक खराब हो सकते हैं 70 करोड़ लोगों के कान

सुनने की शक्ति इंसान के अंदर सबसे पहले आती है। लेकिन आज यही सबसे ज्यादा खतरे में आ गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2021 के वल्र्ड हिअरिंग डे पर इससे जुड़ी रिपोर्ट पेश करने की बात कही है, जिसके आंकड़े आपको भी हैरान कर सकते हैं।

By: lalit sahu

Published: 03 Mar 2021, 08:14 PM IST

कहा जाता है कि सबसे पहले इंसान की सुनने की शक्ति ही जागृत होती है। इसका उदाहरण हमें महाभारत के एक योद्धा अभिमन्यु को देख कर पता चलती है। जिसने युद्ध कौशल के गुण मां के पेट में रहते हुए ही केवल सुनकर सीख लिए थे। लेकिन आज के समय में दुनियाभर में करीब 400 मिलियन लोग अपनी सुनने की शक्ति को खो चुके हैं। यही नहीं, सुनने की शक्ति को लेकर वल्र्ड हिअरिंग की रिपोर्ट तो अधिक चौंका देने वाली है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक यह आंकड़ा 700 मिलियन से ज्यादा होगा। इसके बहुत से कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण है लंबे समय तक तेज आवाज़ में म्यूजिक सुनना। इस बाबत विश्व स्वास्थ्य संगठन वल्र्ड हिअरिंग डे पर यानी आज 3 मार्च को एक रिपोर्ट पेश करने वाला है।

रिपोर्ट के अंदर बताया जाएगा कि आखिर किस तरह आप अपने सुनने की शक्ति हमेशा बनाए रख सकते हैं? इस साल वल्र्ड हिअरिंग डे की थीम का नाम है Hearing care for All-Screen. Rehabilitate. Communicate"। आपको बता दें कि यह पहली बार होगा जब सुनने की शक्ति को लेकर विश्व में कोई रिपोर्ट लॉन्च की जा रही हो।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान
विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि आज पूरी दुनिया में सुनने की शक्ति की जो समस्या पैदा हो रही है। उसका कारण लंबे समय तक तेज आवाज़ में म्युजिक सुनना है। आज दुनियाभर में इस समस्या से 60 प्रतिशत युवा और किशोर प्रभावित हो रहे हैं।
रिपोर्ट बताती है कि बहरेपन की समस्या ज्यादातर उन देशों में बढ़ रही हैं जो पूरी तरह विकसित नहीं हुए हैं। इसके अलावा इन देशों में ना तो इस समस्या से निपटने के लिए किसी तरह की नीतियां बनाई हैं , ना ही यहां लोग जागरूक हैं। इसके अलावा इन देशों में एक बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की भी कमी है।
ऐसे में जब व्यक्ति अपने सुनने की शक्ति खो देता है, तो इसके कारण उसे भाषा सीखने में भी दिक्कत आती है और किसी वाद-संवाद करना भी बहुत ही सीमित सा हो जाता है।

कड़े कदम उठाना जरूरी
विश्व में लोगों के बहरेपन की ताजा स्थिति को देखते हुए WHO ने माना है कि इस मात्रा में लोगों के सुनने की शक्ति खोना बिल्कुल भी स्वीकार नहीं है। इसलिए बहरेपन और कानों से जुड़ी समस्या से वक्त रहते निपटा जाए इसके लिए कुछ कड़े कदम उठाने जरूरी हैं।
अब लोगों को बहरेपन का शिकार न होना पड़े, इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन दुनियाभर की सरकारों को इससे जुड़ी योजनाएं लागू करने की सलाह दे रहा है। इन योजनाओं के जरिए लोग बहरेपन से बच सकें और अपनी सुनने की शक्ति को बनाए रख सकें।

कैसे करें बचाव
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि बहरेपन और कानों से जुड़ी किसी भी समस्या से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप तेज आवाज़ में म्युजिक सुनना बंद कर दें। इसके अलावा अगर आपको लग रहा है कि आपको कम सुनाई देने लगा है, तो इसकी तुरंत जांच भी करवाए। इसके अलावा यूएन हेल्थ एजेंसी का कहना है कि कानों से जुड़ी समस्या या सुनने की शक्ति से जुड़ी समस्या होने पर किसी अच्छे डॉक्टर को ही दिखाएं।

इन कारणों से भी हो सकते हैं बहरे
अगर आपको लग रहा है कि बहरेपन की समस्या केवल लाउड म्युजिक के कारण होती है, तो बता दें कि आप गलत है। यह समस्या बहुत से लोगों को जन्म से भी हो सकती है। इसके अलावा इंफेक्शन और खराब लाइफ स्टाइल भी बहरेनपन का एक कारण हो सकता है।
कानों में इंफेक्शन होने की वजह से कई बार आपको कम सुनाई दे सकता है। यह स्वाभाविक भी है। लेकिन अगर यह इंफेक्शन बार-बार होता है, या कानों से द्रव निकलता है तो यह बहरेपन का कारण भी बन सकता है।
वहीं युवाओं में बहरेपन का कारण ओटोस्क्लेरोसिस नाम की बीमारी भी हो सकती है। बता दें कि यह बीमारी कान के बीच में होती है। इसके अलावा कान के अंदर होने वाली बीमारी, जिसे मेनिएरेस कहा जाता है। यह भी बहरेपन का कारण बन सकती है। साथ ही बहरेपन की वजह एकोस्टिक न्यूरोमा नाम की बीमारी भी हो सकती है।

lalit sahu Desk
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