90 फीसदी लोगों को पता नहीं कि वे साइलेंट किलर है, कंट्रोल नहीं किया तो हो सकती है मौत

अगर इसे वक्त पर कंट्रोल नहीं किया गया तो दिल-दिमाग और गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण अंग को नुकसान पहुंच सकता है।

रायपुर. हाइपरटेंशन एक ऐसी गैर संक्रामक बीमारी है जो तेजी से पूरी दुनिया में पैर पसार रही है। इसमें हम सबसे आगे हैं। हायपरटेंशन साइलेंट किलर बीमारी है। अगर इसे वक्त पर कंट्रोल नहीं किया गया तो दिल-दिमाग और गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण अंग को नुकसान पहुंच सकता है। व्यक्ति की असमय मौत हो सकती है।

हमारे देश में कम उम्र के व्यक्ति यहां तक कि बच्चे भी उच्च रक्तचाप के गिरफ्त में आ रहे हैं। इसके लिए बदलती लाइफ स्टाइल काफी हद तक जिम्मेदार है। अनिंद्रा, असंतुलित भोजन, फिजिकल एक्टिविटी न होना, जंक व फास्ट फूड्स का ज्यादा सेवन, स्मोकिंग, ज्यादा अल्कोहल, मोटापा और टेंशन से युवा पीडि़त हैं। 90 परसेंट लोगों को पता ही नहीं कि वे हायपरटेंशन के शिकार हो चुके हैं। स्मोकिंग पूरी तरह से छोड़ दें। अल्कोहल लिमिट में लें।

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क्या है हाइपरटेंशन
जब दिल सिकुड़ता है तो झटके के साथ बॉडी के सभी धमनियों में रक्त दौडऩे लगता है। शरीर के सभी अंगों तक पहुंचता है। रक्त के प्रवाह की वजह से धमनियों की दीवारों पर जो दबाव पड़ता है उसे रक्तचाप कहते हैं। जब यह रक्तचाप तय मापदंडों से ज्यादा बढ़ जाता है तो इसे हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं। जब हृदय संकुचित होता है (सिस्टोल) तो धमनियों में जो दबाव पैदा होता है उसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहते हैं। संकुचन के बाद हृदय की मांसपेशियां शिथिल होने लगती हैं। इस समय दबाव कम जरूर हो जाता है, लेकिन बिल्कुल खत्म नहीं होता। क्योंकि, खून के दौरे को बनाए रखने के लिए कुछ भी दबाव जरूरी होता है। शिथिलीकरण (डायस्टोल) के समय जो दबाव पैदा होता है उसे डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहते हैं।

कितना होना चाहिए ब्लडप्रेशर
नॉर्मल: सिस्टोलिक 130 मिमी मरकरी से कम। डायस्टोलिक 85 मिमी मरकरी से कम।
हाई नॉर्मल: सिस्टोलिक 130-139 मिमी। डायस्टोलिक 85-89 मिमी
हाइपरटेंशन: सिस्टोलिक 140 मिमी या उससे अधिक। डायस्टोलिक 90 मिमी या उससे अधिक।

ये हैं सिम्पटम्स
- 90 प्रतिशत पीडि़तों में कोई लक्षण नहीं पाए जाते, इसलिए इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। जब बॉडी में दिक्कत होने लगती है तब यह सामने आता है।
- सिर के पिछले हिस्से में दर्द, थकान, चक्कर, घबराहट, नाक से ब्लड आना।
- कम मेहनत में सांस फूलना और धड़कन तेज होना।

इससे होने वाले नुकसान
-हार्ट अटैक, अंजाइना, वेंट्रीकुलर फेलुअर, गुर्दे की निष्क्रियता, दिमाग की नसों का फटना या उसमें थक्का जमना। लकवा, अंधापन, पुरुषों में नपुंसकता।

यह करें
- टेंशन कम लें। शांत व खुशमिजाज रहें। चिड़चिड़ापन व गुस्से को इग्नोर करें।
- संतुलित आहार लें। एक दिन में लगभग 6 ग्राम से ज्यादा नमक न खाएं। याद रखें पापड़, अचार, नमकीन, चिप्स और चटनी में नमक होता है।

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चंदू निर्मलकर Desk
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