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जोखिम उठाकर नाला पार करते बच्चे

वर्षों बीते नाले पर नहीं बन सका पुल, चुनाव में वादे कर भूल जाते हैं जनप्रतिनिधि

रायसेन

Published: August 01, 2022 12:28:13 am

दीवानगंज. राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में 15 जून से स्कूल खोल दिए हैं कक्षाओं का संचालन भी पूरी क्षमता से शुरू हो गया। दीवानगंज क्षेत्र में कई बच्चे जान जोखिम में डालकर, नाला पार करके स्कूल पहुंच रहे हैं। इस तरह की स्थिति ग्राम पंचायत गीदगढ़ के पास बसे गांव महुआखेड़ा की है।जहां छात्र-छात्राओं और सैकड़ों ग्रामीणों को नाले पर पत्थर के दासे रखकर पार करना पड़ता है। अगर जरा सी भी चूक हुई या नजर झुकी तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। पहले कई बार हादसे भी हो चुके हैं। मगर उसके बाद भी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बने बैठे हैं। ऐसे में आवागमन को ग्रामवासियों ने ही इस तरह जुगाड़ का पुल बनाया है।

वर्षों बीते नाले पर नहीं बन सका पुल, चुनाव में वादे कर भूल जाते हैं जनप्रतिनिधि
जोखिम उठाकर नाला पार करते बच्चे

गांव के लोग कई वर्षों से प्रतिदिन यहां से अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर आवाजाही कर रहे हैं। महुआखेड़ा में प्राइमरी कक्षा तक स्कूल संचालित है इसके आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को दीवानगंज हायर सेकंडरी स्कूल जाना पड़ता है। इसके लिए इसी नाले से होकर गुजरना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों की होती है, जब वे यहां से स्कूल जाने के लिए निकलते हैं। बच्चों का कहना है कि डर तो लगता है मगर हमें पढऩा है। इसलिए अव्यवस्थित और जुगाड़ के पुल को पार करके निकलना पड़ रहा है। सरकार विभिन्न तरह के अभियान चलाकर करोड़ों रुपए खर्च करती है। मगर स्कूल तक कैसे पहुंचा जाता है, उस रास्ते की तरफ ध्यान नहीं देती। हालांकि चुनाव के समय राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करने जरूर आते हैं, लेकिन चुनाव के बाद यहां आना जरुरी नहीं समझते। यही कारण है कि कई वर्षों में एक पुल नहीं बन सका है। ग्रामीणों और छोटे बच्चों की परेशानी को जनप्रतिनिधियों ने आज तक नहीं समझा।

गांव के सैकड़ों लोग जान जोखिम में डालकर निकलते हैं। पूर्व में यहां कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। फिर भी यहां पुल नहीं बनाया गया। यदि जल्द इस समस्या का निराकरण नहीं हुआ तो ग्रामवासी आंदोलन को मजबूर होंगे।
-रमेश गौर, महुआखेड़ा।
मुझे गांव से स्कूल जाने के लिए नाले पर रखी फर्सियों के सहारे उस तरफ जाना पड़ता। वहां डर लगता है।
-अमित गौर, छात्र।
गांव के रास्ते को लेकर बहुत बड़ी समस्या है। आवागमन के लिए न सड़क है और ना पुल। बच्चे और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर जुगाड़ के पुल से निकलते, जिससे यहां हादसे होते रहते हैं।
-राजेश गौर, स्थानीय ग्रामीण।

पुल के दोनों तरफ निजी जमीन है और गांव में जाने के लिए कोई सरकारी जगह नहीं है, जिससे पुल का निर्माण नहीं हो पा रहा है। मैंने पांच साल पहले रास्ता खुलवाकर नाले पर पत्थर रखवा दिए थे। दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत इस रोड की मंजूरी हुई थी, लेकिन जमीन विवाद के चलते निर्माण नहीं हो सका, सिर्फ चार किमी की सड़क बन पाई थी।
-वृंदावन शर्मा, सरपंच प्रतिनिधि गीदगढ़।
इतने बरसों से नाला टूटा पड़ा हुआ है ग्रामीण और बच्चे फर्सियों के ऊपर से निकल रहे हैं, इसकी जानकारी मुझे आपके माध्यम से लगी है। किसी ने भी इस विषय में मुझे आज तक नहीं बताया। बच्चों और ग्रामीणों को परेशानी आ रही है तो हम उस नाले का निर्माण शीघ्र करवाएंगे।
-प्रदीप छलोत्रे, सीईओ।

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