शोकलपुर घाट पर स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु, सोशल डिस्टेंस रही नदारद

सावन माह का तीसरा सोमवार और हरियाली अमावस्या होने के कारण नर्मदा तटों पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही

By: chandan singh rajput

Published: 21 Jul 2020, 02:04 AM IST

थालादिघावन. श्रावण कृष्ण पक्ष में इस बार हरियाली अमावस्या के दिन ही सोमवती अमावस्या का योग भी बना गया। ज्योतिषों के अनुसार अमावस्या का यह संयोग 15 साल बाद बना है। इससे पहले 2004 में ऐसा संयोग बना था। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहा। वहीं सावन माह का तीसरा सोमवार और हरियाली अमावस्या होने के कारण नर्मदा तटों पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। सुबह से ही नर्मदा तटों के लिए श्रद्धालुओं का आना प्रारंभ हुआ और दोपहर तक निरंतर चलता रहा। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु नर्मदा तटा शोकलपुर घाट पहुंचे। यहां पर सोशल डिस्टेसिंग का पालन नहीं किया गया। श्रद्धालुओं ने बिना दूरी बनाए नर्मदा स्नान किए और पूजन-पाठ, अभिषेक किया।

बिना मास्क के पहुंचे
श्रद्धालु बिना मास्क पहने ही नर्मदा घाटों पर पहुंचे। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी यह स्पष्ट नहीं किया गया। सुबह से ही स्थिति असमंजस में रही। इस दौरान पुलिस, प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी भी रही, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती रही, जबकि इन दिनों फिर देश भर में कोरोना के मरीजों की संख्या बढऩे लगी।
वाहनों की लगी कतार
नर्मदा तट शोकलपुर घाट पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी रही। जहां देखो वहां वाहन खड़े नजर आए। इससे लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

नर्मदा में डुबकी लगाने वालों की सुबह से लगी रही भीड़
उदयपुरा. सोमवार को आई अमावस्या को सोमवती कहलाती है इस वर्ष दोहरा संयोग बना, क्योंकि सोमवार को हरियाली अमावस्या भी मनाई गई। इस कारण सुबह से नर्मदा तटों पर डुबकी लगाने वालों की भीड़ अधिक रही। इसी बीच अधिकतर श्रद्धालुओं के चेहरे पर कोरोना का भय नहीं देखा गया। क्योंकि कई श्रद्धालु बिना मास्क लगाए घाटों पर पहुंचे और स्नान कर पूजा-अर्चना की। वहीं सोशल डिस्टेंस भी पूरी तरह से गायब रही। हालांकि इस दौरान पुलिस बल भी तैनात रहा। मगर लोगों सोशल डिस्टेंसिंग सहित नियमों का पालन करना जरूरी नहीं समझा।

अमावस्या का महत्व
इस अमावस्या का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है। हर घर मेंं महिलाओं द्वारा इस दिन अपने पतियों के दीर्घायु कामना के लिए व्रत रखकर पीपल अथवा तुलसी की प्रदक्षिणा भी की जाती है। पीपल या तुलसी के चारों ओर 108 बार परिक्रमा कर धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधान पूर्वक तुलसी के पेड़ को चढाया गया। अनेक घरों में रुद्राभिषेक के आयोजन किए गए। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नर्मदा में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ और सभी दु:खों से मुक्त होगा। ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसलिए नर्मदा के चौरास-बोरास, शोकलपुर, सिंहनाद आदि तटों पर अधिक भीड़ रही।

श्रावण सोमवार होने के कारण भी श्रद्धालु शिव मंदिरों में अभिषेक करते नजर आए तो समीपस्थ भोलेनाथ के मंदिर मृगेंद्रनाथ मन्दिर जाने वालों का भी तांता लगा रहा। बोरास घाट से नर्मदा जल लेकर लोग बड़ी संख्या में मृगेंद्रनाथ धाम शिव अभिषेक करने पहुंचे। वहीं पुलिस बल श्रद्धालुओं के दो पहिया, चार पहिया वाहनों को रोक-रोककर भेजते रहे, जिससे जाम की स्थिति नहीं बने।

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