जीवन में सुख चाहते हो तो किसी को कष्ट मत देना: डॉ. उपाध्याय

मनुष्य को चाहिए कि वह समस्त चराचर में व्याप्त जीवों का सम्मान करें, उनके प्रति दया करें

By: chandan singh rajput

Published: 03 Jan 2020, 11:43 PM IST

जैथारी. बीकलपुर में आयोजित श्रीरामचरित मानस सम्मेलन का गुरुवार को समापन हो गया। समापन दिवस पर आचार्य डॉ. रामाधार उपाध्याय ने कहा कि मनुष्य को चाहिए कि समस्त चराचर में जितने भी प्राणीं हैं, उनको किसी तरह का कष्ट और दुख ना दें। मनुष्य एक ऐसा विवेकवान प्राणी है, जो समस्त प्राणियों को समन्वित रूप से लेकर चलता है, सभी के पालन-पोषण संरक्षण में योगदान मनुष्य का ही होता है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह समस्त चराचर में व्याप्त जीवों का सम्मान करें, उनके प्रति दया करें। दया ही धर्म का मूल है दया करुणा यदि अंत: करण में व्याप्त है, तो परमात्मा की कृपा भी हमें सहज ही प्राप्त हो जाती है। उपाध्याय जी कहते हैं कि सभी प्राणियों में जो परमात्मा का तत्व है वह चराचर में व्याप्त हैं।

उस तत्व को समस्त प्राणियों में अनुभव करके आप प्रयास यह कीजिए की समस्त प्राणियों की भावनाओं का संरक्षण हो सके और विशेष तौर पर गाय का संरक्षण, संवर्धन करना हमारी सनातन परंपरा का एक श्रेष्ठतम अंग है। मानस सम्मेलन में कानपुर से पधारे आलोक मिश्र और झांसी से पधारे हुए पंडित अरुण गोस्वामी जी ने भी प्रवचन दिए।
गाय का सम्मान और सेवा करें
वर्तमान में जो गाय की दुर्दशा हो रही है, लोग गाय पालन से विमुख होते जा रहे हैं। गाय की सेवा, उसका सम्मान करने में स्वयं को संलग्न नहीं कर रहे, यह उचित नहीं है। देखा जाता है कि गाय का दुग्ध निकालकर लोग उसे मार्ग में भटकने के लिए छोड़ देते हैं। यह प्रवृत्ति हमें पाप का भागी बनाती है।

हमारे यहां कहा गया है गाय में समस्त देवताओं का वास होता है और गाय अत्यंत दया, करुणा की प्रतिमूर्ति है। हमें चाहिए कि हम गाय का सम्मान करें, गाय की सेवा करें और उसे तिरस्कार भाव से बिल्कुल भी ना देखें, जो तिरस्कार भाव से देखेंगे, वह अनंत काल तक कष्ट भोगेंगे।

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