scriptFarmers upset due to non-receipt of money in accounts | एक माह पहले बेचे गेहूं का भुगतान असफल होने का संदेश अब आ रहा है किसानों के पास | Patrika News

एक माह पहले बेचे गेहूं का भुगतान असफल होने का संदेश अब आ रहा है किसानों के पास

- बैंक मैसेज: आपका भुगतान विफल हो गया, बैंक का खाता आधार से नहीं किया गया है लिंक

- खातों में अब तक नहीं आई राशि, बैंकों के चक्कर लगाकर किसान हुए परेशान

रायसेन

Published: May 29, 2022 05:01:05 pm

रायसेन । Raisen

समर्थन मूल्य पर गेहूं, चना बेचने के बाद शासन के नियमों के अनुसार एक सप्ताह में किसानों के खातों में भुगतान की राशि आ जाना चाहिए। मगर सैकड़ों किसान ऐसे हैं, जो एक माह बाद भी उपज भुगतान के लिए बार-बार बैंक शाखा पहुंच रहे। लेकिन उन्हें भुगतान नहीं मिल पा रहा। किसानों के खातें में भुगतान आने के बजाए उनके मोबाइल पर यह संदेश आ रहा कि बैंक खाता आधार से लिंक नहीं होने के कारण आपका भुगतान विफल हो गया।

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मोबाइल पर मिल रहे इस संदेश से किसान परेशान होकर फिर से बैंक पहुंच रहे। वहां से उन्हें बैंक खाता आधार से लिंक करवाने की सलाह दी जा रही है। किसानों का कहना है कि अब हमने खाता भी लिंक करा लिया, बाबजूद इसके उपज का आधा भुगतान ही मिल सका, जबकि गेहूं, चना विक्रय किए हुए करीब एक से डेढ़ माह बीतने को है। बताया जा रहा है कि फंड की कमी के चलते सरकार के स्तर से ही भुगतान की प्रक्रिया को धीमा किया गया है।

गौरतलब हो कि बीते चार अप्रेल से जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू हुई। तब से किसान स्लॉट बुकिगं के आधार पर अपनी उपज नियत खरीदी केन्द्रों पर बेच रहे। मगर उपज बेचने के बाद किसानों को भुगतान प्राप्त करने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है, जबकि इन दिनों वैवाहिक कार्यक्रमों का दौर भी चल रहा है।

ऐसे में ज्यादातर किसान खाली हाथ बैठे हैं। पिछले दो वर्षों से कोविड संक्रमण के चलते लोग मांगलिक कार्य बड़े स्तर पर नहीं कर सके थे, लेकिन इस बार भी उनके सामने आर्थिक समस्या आ रही, क्योंकि ज्यादातर किसानों को फसल के रुपए नहीं मिल पाए।

आंकड़ों की बाजीगरी
नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अब तक 44 हजार 448 किसान समर्थन मूल्य पर गेहूं बेच चुके हैं, जबकि जिले भर में 77 हजार 35 किसानों ने पंजीयन करवाया था। फिलहाल 148 खरीदी केन्द्रों पर चार लाख 23 हजार 871 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है।

इसमें चार लाख 18 हजार 950 मीट्रिक टन गेहूं का परिवहन कर गोदामों में पहुंचा दिया है।

वहीं किसानों को अब तक 922 करोड 65 लाख रुपए का भुगतान करना बताया जा रहा है। इसके बाद भी जिले में करीब आठ से दस हजार किसान भुगतान के लिए कई दिनों से चक्कर काट रहे।

बनखेड़ी सोसाइटी में 27 किसानों का भुगतान रुका
जानकारी के अनुसार बनखेड़ी सोसाइटी में लगभग 27 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने अप्रेल माह में गेहूं बेचा था, लेकिन अभी तक उनके खाते में राशि नहीं पहुंची। शनिवार को भी किसान सोसाइटी कार्यालय भुगतान के लिए पहुंचे थे। हालांकि किसानों का भुगतान नागरिक आपूर्ति निगम एनआइसी के माध्यम से सीधे खातों में भेजेगा, लेकिन परेशान किसान सोसाइटी और बैंक शाखाओं तक पहुंचकर अपनी समस्या बता रहे।

53 खरीदी केन्द्र हुए बंद
गेहूं खरीदी कार्य 31 मई तक चलेगा, लेकिन इसके पहले ही जिले के 148 खरीदी केन्द्रों में से 53 खरीदी केन्द्र 28 मई तक की स्थिति में बंद हो गए। बताया जा रहा है कि इन केन्द्रों पर पिछले छह दिनों से एक भी किसान गेहूं बेचने नहीं पहुंचा। भुगतान में देरी होने और समर्थन मूल्य से अधिक दाम मंडी एवं बाजार में मिलने से ज्यादातर किसानों ने गेहूं व्यापारियों को बेचा। पंजीकृत किसान और गेहूं बेचने वाले किसानों की संख्या देखी जाए तो 32 हजार 587 किसान समर्थन मूल्य केन्द्रों पर उपज बेचने नहीं पहुंचे।

कैसे होगी अगली फसल की तैयारी?
रबी सीजन की फसल के बाद किसान उपज बेचकर कुछ दिनों तक खेती किसानी के काम से निश्चित रहते हैं, लेकिन जैसे ही बारिश होने की आहट शुरू हो जाती, तो फिर से फसलों की बोवनी की तैयारियां शुरू हो जाती है। वर्तमान में भी यही स्थिति बन रही है, अब किसानों को धान रोपे लगाने के साथ बीच तैयार करना और सोयाबीन, उड़द आदि फसलों की बोबनी करना है, लेकिन इसके लिए बीज खरीदना जरूरी है, लेकिन गेहूं बेचने के बाद भी किसान खेती के आवश्यक संसाधन नहीं जुटा पा रहे, क्योंकि सरकार ने समर्थन मूल्य पर बेची उपज का भुगतान ही नहीं किया।

ज्यादातर किसानों ने समय रहते अपने बैंक खाते आधार से लिंक नहीं करवाए। इस कारण भुगतान विलंब हुआ। इसके अलावा ईपीओ यानी इलेक्टिॉनिक पेमेंट ऑर्डर बैंक तक पहुंचने में समय लगना और वहां जाकर फेल होने की स्थिति ने भी किसानों का भुगतान लेट किया है।
- विवेक रंगारी, जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम रायसेन

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