पिता का हुआ एक्सीडेंट और अब टॉपर लड़की के पास नहीं है किताब खरीदने के पैसे,अगले महीने है परीक्षा

पिता का हुआ एक्सीडेंट और अब टॉपर लड़की के पास नहीं है किताब खरीदने के पैसे,अगले महीने है परीक्षा
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Amit Mishra | Updated: 11 Oct 2019, 03:06:06 PM (IST) Raisen, Raisen, Madhya Pradesh, India

छात्रा वैशाली नामदेव ने वाणिज्य संकाय से रायसेन जिले में किया था टॉप

रायसेन @प्रवीण श्रीवास्तव/ मिथलेश रघुवंशी की रिपोर्ट...
औद्योगिक शहर की एक प्रतिभावान छात्रा आर्थिक तंगी के चलते अपनी पढ़ाई छोडऩे के लिए मजबूर हो रही है। छात्रा ने शिक्षा सत्र 2018-19 में वाणिज्य संकाय से रायसेन जिले में girls topper प्रथम स्थान प्राप्त किया था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने कारण भोपाल कॉलेज आने जाने और कॉपी किताबों का खर्च वहन नहीं कर पाने के कारण छात्रा आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रही है। इस बात का खुलासा छात्रा के पिता ने बुधवार को अभय ज्ञान जन समिति के सदस्यों से मिलकर किया और छात्रा की मदद करने की अपील की।

exam topper

पैसे की तंगी होने लगी
शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल की छात्रा वैशाली नामदेव ने कक्षा 12वीं में 92.6 प्रतिशत अंक अर्जित कर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। परीक्षा परिणाम आने पर स्कूल में छात्रा धूमधाम से स्वागत किया गया था। वैशाली को अंकों के आधार पर भोपाल के नूतन कॉलेज में प्रवेश भी मिल गया था और उसने कॉलेज जाना भी शुरू कर दिया था, लेकिन कॉलेज की फीस जमा करने के बाद प्रतिदिन भोपाल अपडाउन करने के लिए पैसे की तंगी होने लगी।

वैशाली किताबें नहीं खरीद पाई
हालत यह हो गई कि कॉलेज खुलने के दो माह बाद भी वैशाली किताबें नहीं खरीद पाई। जबकि अगले माह से उसकी परीक्षा शुरू होने जा रही है। यह स्थिति केवल वैशाली की नहीं है, घर में वैशली की बड़ी बहन सोनम की भी है। सोनम ने भी इसी वर्ष 76 प्रतिशत अंकों के साथ कक्षा 12वीं की परीक्षा पास की है, लेकिन उसका एडमिशन मंडीदीप के राजाभोज कॉलेज में हुआ है, किताबे उसके पास भी नहीं हैं।

संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं
शासन से नहीं मिली प्रोत्साहन राशि: प्रदेश सरकार की ओर पिछले वर्ष तक 75 प्रतिशत से ज्यादा अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को 25 हजार रुपए की राशि लैपटॉप खरीदने के लिए मिलती थी, लेकिन इस वर्ष अभी तक शासन की ओर इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई। इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारी भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

पिता घर पर ही करते हैं काम
सतलापुर के वार्ड 15 निवासी वैशाली के परिवार में बहन और माता-पिता हैं। मां कारखानों में काम कर पिता का हाथ बंटाती थी, लेकिन दो माह पहले एक्सीडेंट हो गया। पिता राजेन्द्र घर पर ही टेलरिंग का काम कर खर्च चला रहे हैं। बारिश के दिनों में काम नहीं मिलने से हालात बिगड़ गए।


मेरी दोनों बेटियां पढऩे में बहुत होशियार हैं, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति के चलते मैं उन्हें कॉपी, किताबें नहीं दिलवा पा रहा हूं, शासन से भी बाच्च्यिों को कोई मदद नहीं मिल रही है।
राजेन्द्र नामदेव, वैशाली के पिता

छात्राओं की आर्थिंक तंगी की जानकारी मिली है, समिति की ओर से जल्द ही मदद की जाएगी।
अमित तिवारी, वरिष्ठ सदस्य अभय ज्ञान जन समिति

शासन स्तर पर मेघावी छात्र-छात्राओं को मिलने वाली योजना के संबंध में अभी तक कोई दिशा निर्देश प्राप्त हुए हैं, इसलिए यह कह पाना मुश्किल है कि राशि मिलेगी या नहीं।
आलोक खरे, जिला शिक्षा अधिकारी

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