मां कंकाली माता मंदिर और मां छोलेवाली मंदिर खंडेरा में पुजारियों ने की घट स्थापना

इस बार स्थिति यह बनी कि मंदिरों में ताले लगे रहे। परिसरों में सन्नाटा पसरा रहा

By: chandan singh rajput

Published: 27 Mar 2020, 02:04 AM IST

रायसेन. कोरोना के कहर के चलते चैत्र नवरात्र के पहले दिन के बाद दूसरे दिन गुरुवार को भी जिले के प्रसिद्ध सिद्ध शक्तिपीठ माता काली कंकाली देवी मंदिर गुदावल, छौले वाली माता रनी मंदिर खंडेरा, मां हिंगलाज देवी शक्तिपीठ बाड़ी, हरसिद्धी माता मंदिर परवरिया सहित सभी देवी मंदिरों में सन्नाटा पसरा रहा। ऐसा पहली बार है नहीं तो चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से ही इन मंदिरों में हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगता है। इस बार स्थिति यह बनी कि मंदिरों में ताले लगे रहे। परिसरों में सन्नाटा पसरा रहा। माता काली कंकाली और मां हिंगलाज देवी शक्तिपीठ के 550 साल के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनी कि सिर्फ दो मंदिर के पुजारियों व पुरोहितों ने आपस में एक विशेष दूरी बनाए रखते हुए चैत्र नवरात्रि पर्व में माता की उपासना करते हुए अखंड ज्योति जलाई व जवारे बोए और पूजन आरती की।

श्रद्धालु अपने घर से ही करें माता को नमन
संक्रमण से बचाव के लिए देवी मंदिर के पट बंद किए मां काली कंकाली देवी शक्तिपीठ मंदिर के पुजारी आचार्य भुवनेश्वर महाराज ने बताया कि कोरोना के संक्रमण से लोगों को बचाने और एहतियात के मद्देनजर मंदिर के पट बंद किए गए हैं। चैत्र नवरात्रि पर्व में बुधवार को सुबह मात्र दो पंडितों द्वारा माता कालिका का पूजन किया गया। इसके बाद सुबह सवा 11 बजे से दोपहर साढ़े बजे तक घट स्थापना की व अखंड ज्योति जलाई गई। इस दौरान मंदिर परिसर में सन्नाटा रहा। उन्होंने बताया कि 550 साल में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है। कभी ऐसा सुनने में नहीं आया कि मां काली कंकाली के मंदिर के पट बंद किए गए हों, जबकि चैत्र और शारदीय नवरात्रि पर्व में तो हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं। अनाज व्यापारी मिथलेश, मनोज सोनी, गनेशराम पंथी, अमित अहिरवार परिवार सहित अन्य हिन्दू परिवार टोटल लॉकडाउन के चलते घरों में देवी मां जगदंबे की उपासना भजन पूजन आरती कर कर रहे हैं।

महामारी खत्म हो इसके लिए करेंगे विशेष अनुष्ठान
मां काली कंकाली मंदिर के पुजारी पंडित भुवनेश्वर महाराज ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से देश के साथ-साथ पूरी दुनिया को मुक्ति मिले, इसके लिए मां जगदंबे से प्रार्थना की जाएगी। पूरे नौ दिनों तक चैत्र नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का विशेष पाठ और अनुष्ठान किया जाएगा। भुवनेश्वर महाराज ने बताया कि मंदिर में आरती का समय सुबह 8 और रात को आठ बजे का रखा गया है।
चैत्र में होने वाले सभी आयोजन निरस्त
हरसिद्धी माता मंदिर परवरिया कहूला कंकाली माता मंदिर में भी आयोजन निरस्त कर दिए गए हैं। सिद्धपीठ माता हरसिद्धी मंदिर परविरया में सभी सुबह पंडितों ने ही की घट स्थापना ,जवारे बोए और आरती पूजन किया।

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