विकास की योजना बनाने से कतराए अधिकारी

रायसेन. जिले के विकास के लिए तीन साल की योजनाएं बनाने की बात हो और विकास के मामले में महत्तवपूर्ण विभागों के अधिकारी ही बैठक में नहीं पहुंचे, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास की योजनाएं बनाने और उनके क्रियान्वयन के जिम्मेदार अधिकारी विकास के मुद्दे पर कितने गंभीर हैं।

By: praveen praveen

Published: 17 Nov 2016, 11:28 PM IST

रायसेन. जिले के विकास के लिए तीन साल की योजनाएं बनाने की बात हो और विकास के मामले में महत्तवपूर्ण विभागों के अधिकारी ही बैठक में नहीं पहुंचे, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास की योजनाएं बनाने और उनके क्रियान्वयन के जिम्मेदार अधिकारी विकास के मुद्दे पर कितने गंभीर हैं।

    गुरुवार को कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव की अध्यक्षता में योजना एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा आगामी तीन वर्षों के लिए जिले की योजना का प्रस्ताव तैयार करने के लिए बैठक आयोजित की गई थी। इसमें कलेक्टर ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आगामी तीन सालों के लिहाज से विकास कार्यों, जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाने पर चर्चा के साथ जरूरी दिशा निर्देश दिए। इस बैठक से कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी नदारद थे। इनके विभाग जिले के विकास में तहत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं। ऐसे अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराज कलेक्टर जाटव ने अनुपस्थित अधिकारियों को शोकाज नोटिस देने और वेतन काटने के निर्देश दिए।

इन विभागों के अधिकारी रहे नदारद
इस महत्वपूर्ण बैठक से उद्यान, जिला पंचायत, उद्योग, जलसंसाधन, महिला बाल विकास सहित कुछ अन्य विभागों के अधिकारी नदारद थे। जबकि ये विभाग सीधे जन और विकास से जुड़े हैं। कृषि प्रधान जिले में परंपरागत खेती से हटकर उद्यानिकी खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, ऐसे में तीन साल की योजना बनाने के लिए हुई बैठक में उद्यान अधिकारी का न होना, जिले में उद्यानिकी खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों के प्रति उनकी लापरवाही को उजागर करता है।

ये तय होना था बैठक में
बैठक में आगामी तीन सालों में जिले में विभिन्न विभागों के माध्यम से विकास कार्यों की योजना की समीक्षा होनी थी। योजनाओं के प्रावधानों के अनुसार बजट की मांग का प्रस्ताव तैयार होना था। ताकि अगले तीन सालों में लोगों की जरूरत के मुताबिक जिले में विकास कार्यों के लिए शासन से बजट मांगा जा सके और कार्यों की रूपरेखा तैयार हो सके।
 
फिर से बनाएं योजना
बैठक में कुछ विभागों के अधिकारी अधूरी जानकारी के साथ पहुंचे। उन अधिकारियों को कलेक्टर  ने योजनाओं में वृद्धि कर उसके अनुसार बजट के प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना के प्रस्ताव अधिक से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित करने तथा जिले के चहुंमुखी विकास को दृष्टिगत रखते हुए बनाएं। बैठक में जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी रजनी आनंद सहित अन्य विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे।

दिए जाएंगे शोकाज नोटिस
जिले के विकास कार्यों की योजना बनाने और बैठक में नहीं पहुंचने वाले अधिकारियों को कलेक्टर जाटव ने शोकाज नोटिस देने तथा वेतन काटने के भी निर्देश दिए।

ये कहा कलेक्टर ने
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि जिले के सभी विभाग अपनी योजनाएं वर्तमान परिस्थितियों तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाएं। इससे विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके और अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके। जाटव ने जिन विभागों से योजनाएं पहुंचीं, उन पर चर्चा कर दिशा निर्देश दिए। उन्होंने अगले पांच सालों में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के अनुसार योजनाएं बनाने और उसके अनुसार बजट का प्रस्ताव देने के लिए कहा। तीन वर्षों में पेयजल की जरूरत को ध्यान में रखते हुए पीएचई विभाग को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। अनुसूचित जाति, जनजाति आश्रमों, शालाओं, स्कूलों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने योजना बनाने के लिए कहा।

कितने महत्वपूर्ण हैं ये विभाग
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की पूरी जिम्मेदारी जिला पंचायत पर रहती है। इस विभाग से बैठक में एक भी अधिकारी, कर्मचारी विकास की योजना लेकर नहीं पहुंचा। फिर कैसे तीन सालों के विकास के लिए खाका तैयार किया जाएगा। आंगनबाडिय़ों के माध्यम से भविष्य को संवारने, बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महिला बाल विकास से भी कोई अधिकारी बैठक में शामिल नहीं था। इससे जाहिर है कि उनके पास विकास की कोई योजना नहीं है। केवल सरकारी आदेशों की खानापूर्ति से ही काम चल रहा है। मंडीदीप के अलावा जिले में कहीं उद्योग की इकाइयां नहीं हैं, लेकिन लगाई जा सकती हैं। इसकी योजना बनाकर काम किया जा सकता है। लेकिन तीन साल के लिए तैयार की जा रही योजनाओं के लिए आयोजित बैठक में इस विभाग से अधिकारी शामिल नहीं हुए। कृषि प्रधान जिले में फसलों की सिंचाई के लिए बांधों, जलाशयों से पानी उपलब्ध कराने वाले जल संसाधन विभाग ने भी जिम्मेदारी नहीं निभाई। बैठक में यह तय किया जा सकता था कि अगले तीन सालों में जिले में सिंचाई का रकबा कितना और कैसे बढ़ेगा। लेकिन अधिकारियों ने इसकी तैयारी नहीं की।
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