भगवान राम के चरणों में ही परमार्थ है: राजन महाराज

भगवान राम के चरणों में ही परमार्थ है: राजन महाराज

chandan singh rajput | Updated: 24 Apr 2019, 02:04:04 AM (IST) Raisen, Raisen, Madhya Pradesh, India

श्री रामायण पाठ करते समय शब्दों का ध्यान रखें

सिलवानी. 'जो सीता-राम के विवाह को गाएगा, या सुनेगा हमेशा ही सुखी रहेगा। जीवन की स्थिति कैसी भी हो यदि भगवान की भक्ति है तो हर हाल में प्राणी सुखी है। भगवान का यश, भगवान का राम रस, प्राणी को मंगल कर देते हैं। श्री रामायण पाठ करते समय शब्दों का ध्यान रखें। शब्द के अर्थ अलग अलग होते हैं, यह उद्गार सिलवानी नगर के मां कर्मा मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के पंचम दिवस व्यासगादी से राजन महाराज ने व्यक्त किए। महाराज ने कहा कि प्रतिष्ठा नाम, बढ़ाना है तो भगवान की शरण में चले जाओ।

पुत्र का सबसे बड़ा धर्म है पिता की बात मानना। जल के बिना नदी का अस्तित्व नहीं है, उसी तरह पति के बिना पत्नी का अस्तित्व नहीं होता है। राम ही नैया है, राम ही किनारा है, राम ही जीवन है राम ही सहारा है। यह नर तन का चोला राम ने दिया है, इसलिए इसे रामभजन से सींझे। राम ब्रह्म है, राम के चरणों में परमार्थ है। सुख-दु:ख अपने कर्मों से प्राप्त होता है। कभी भी किसी पर अत्याचार इतना ना करें कि उसकी रोजी रोटी न छीने।

आज युवा धर्म से नहीं भटक रहा है, बल्कि युवाओं के माता-पिता धर्म से भटके हैं, जो युवाओं को धर्म का ज्ञान नहीं बता पा रहे हैं। भगवान का भक्त कभी दु:खी नहीं रहता, जरा कष्ट जरूर होता है पर राम सबसे पार निकाल देता है। जब तक भेद मन में है प्राणी कुछ नहीं कर पाएगा, कितनी ही माला जप कर ले, मन से भेद मिटाने के बाद प्राणी जीवन में उजाला ही उजाला है।

गुरु वह है जो भगवान का दर्शन करा दे। वह ही सही सतगुरु है। अर्थात स्वयं भगवान ही धरती पर क्यों ना आए बगैर सतगुरु के पार नहीं हो सकते।

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