scriptNumber of dropouts increasing by the eighth pass policy | शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में खुलासा, ये बच्चे स्कूल छोड़कर बैठ रहे घर, जानिए क्यों | Patrika News

शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में खुलासा, ये बच्चे स्कूल छोड़कर बैठ रहे घर, जानिए क्यों

-आठवीं तक हर हाल में पास करने की नीति बढ़ा रही ड्रॉपआउट की संख्या
-सारी सुविधाएं मिलने के बावजूद जिले में सबसे ज्यादा पढ़ाई छोड़ रहे बच्चे
-जिले में सबसे ज्यादा पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चे बाड़ी विकासखंड में

रायसेन

Published: May 13, 2022 05:14:37 pm

रायसेन। सरकारी स्कूलों का स्तर बढ़ाने सरकार सीएम राइज स्कूलों जैसी योजना ला रही है। बच्चों को पुस्तकें, साइकिल, यूनीफार्म सब दिया जा रहा है, लेकिन फिर भी बच्चे स्कूल छोड़कर बैठे हैं। जिले के 6147 बच्चे ड्रॉप आउट की सूची में शामिल हैं। शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में ये बच्चे अब स्कूल नहीं आते हैं। जिले में ऐसे बच्चों की सबसे ज्यादा संख्या बाड़ी ब्लॉक में है। दरअसल आठवीं तक किसी को फेल न करने की नीति और नवमीं में आते ही सीधे कठिन पाठ्यक्रम से सामना होना इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। एक बार फेल होने के बाद फिर आगे की पढ़ाई से मोह भंग हो जाता है और वे खेती किसानी या फिर मजदूरी में लग जाते हैं।

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खास बात यह भी इनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा होती है। जिन्हें पालक घर ग्रहस्थी के काम में लगा देते हैं। जिले के बाड़ी ब्लॉक में सबसे ज्यादा बच्चों ने अधूरी पढ़ाई छोड़ स्कूल को अलविदा कहा है। इस ब्लॉक में कक्षा 9वीं से 12 वीं के बीच 1192 बच्चों ने स्कूल छोड़ा है। जबकि पूरे जिले में इसी स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या 06 हजार 147 है। शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार की नीति ही ऐसी है, जिससे ड्राप आउट बच्चों की संख्या बढ़ रही है। आठवीं तक किसी बच्चे को फेल नहीं करने की नीति इसका सबसे अहम कारण है।

पहले पांचवीं आठवीं बोर्ड परीक्षाएं होती थी, जिसमें पास-फेल का डर होता था, शिक्षक को भी चिंता रहती थी और बच्चों में भी प्रतियोगी क्षमता का विकास होता था, जिससे वे आठवीं के बाद के कठिन पाठ्यक्रम को भी सहज स्वीकार कर लेते थे। मगर अब किसी को भी आठवीं तक फेल न करने की नीति के कारण पढ़े लिखे बिना ही बच्चे नवमीं तक पहुंच जाते हैं। जहां कठिन कोर्स से सामना होता है तो एक बार फेल होने पर पढ़ाई छोड़ बैठते हैं।

क्या कहते हैं जानकार

सेवानिवृत्त शिक्षक हरिनारायण श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार की नीति ही बच्चों को शिक्षा से दूर कर रही है। रायसेन जिले में ग्रामीण परिवेश अधिक है। यहां एक बार फेल होने के बाद माता पिता बच्चों को खेती किसानी या काम धंधे से लगा देते हैं, जबकि लड़कियों को ग्रहस्थी में लगाकर विवाह की तैयारी शुरू कर देते हैं। समाजसेवी एचबी सेन का कहना है कि बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि जगाने और आगे पढ़ने की ललक जगाने की कोई रीति नीति अभी तक नहीं बनी है। सुविधाएं देकर आगे पढ़ाने की नीति से वे बच्चे आगे बढ़ते हैं, जो सुविधाएं नहीं मिलने से पढ़ाई छोड़ते हैं।

ऐसे बच्चों के लिए 'आ अब लौट चलें’

ड्रॉप आउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए 'आ अब लौट चलें’ योजना है। इसमें ऑनलाइन आवेदन कर आगे की परीक्षा दी जा सकती है। योजना के तहत आवेदन की अंतिम तिथि 20 मई है। जिले के सभी संकुल प्राचार्यों को ड्रॉप आउट बच्चों को तलाशकर इस योजना के तहत आवेदन कराने के लिए कहा गया है।

-एमएल राठोरिया, जिला शिक्षाधिकारी

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