धान के रोपे किए तैयार, पर लगाने के लिए नहीं मिल पा रहे मजदूर

जिले में धान की खेती करने वाले किसानों को धान के रोपे लगाने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं

By: chandan singh rajput

Published: 02 Jul 2020, 02:04 AM IST

रायसेन. कोरोना संक्रमण के चलते मजदूरों का टोटा किसानों पर भारी पड़ रहा है। जिले में धान की खेती करने वाले किसानों को धान के रोपे लगाने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं, जिससे तैयार रोपे भी लगाना मुश्किल हो रहा है। किसानों ने धान रोपने के लिए गड़े तैयार कर लिए हैं, क्यारियों में रोपे तैयार हैं, लेकिन रोपने को मजदूर नहीं मिल रहे हैं।

जिले में घट रहा है धान का रकबा
बीते कुछ सालों में जिले में धान का रकबा तेजी से बढ़कर साढ़े तीन लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था।
हालांकि इस बार भी कृषि विभाग ने धान का लक्ष्य तीन लाख ८० हजार हेक्टेयर से अधिक रखा है, लेकिन इसकी पूर्ति होने की संभावनाएं नहीं हैं। किसानों का कहना है कि धान रोपने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में धान की खेती मुश्किल हो रही है। इस वजह से कई किसानों ने इस साल धान की जगह सोयाबीन की फसल लगाने का निर्णय लिया है।

बिहार से आते थे मजदूर
धान की खेती में बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत होती है। जिले में हर साल बिहार से कई मजदूर धान रोपने के लिए आते थे। इस साल कारोना संक्रमण के चलते बाहरी मजदूर जिले में नहीं आए हैं।
इधर कृषि विभाग धान की खेती के लिए किसानों को सीधे बोवनी की सलाह दे रहे हैं। मगर किसानों का कहना है कि सीधी बोवनी केवल क्रांति किस्म की धान की ही की जाती है, जबकि जिले में अधिकतर किसान पूसा बासमती किस्त की खेती करते हैं। ऐसे में सीधी बोवनी करना संभव नहीं है।

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