किसानों से सुविधा शुल्क की मांग भी करते हैं पटवारी

योजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ा रोड़ा पटवारी ही नजर आ रहे हैं

By: chandan singh rajput

Published: 10 Oct 2020, 02:04 AM IST

थालादिघावन. प्रधानमंत्री के बाद अब मुख्यमंत्री भी किसानों को सम्मान निधि का लाभ देना चाहते हैं, जिससे किसानों की स्थिति बेहतर हो सके। मगर योजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ा रोड़ा पटवारी ही नजर आ रहे हैं। क्योंकि सरकार के निर्देश है कि इस काम में लगे सभी पटवारी गांव जाएं और किसान का फोटो उसके खेत पर ही अपलोड करें, जबकि पटवारी नेटवर्क न मिलने की बात कहकर गांव जाने से बच रहे हैं, जिससे किसान पात्र होने के बावजूद योजना के लाभ से वंचित हो रहे। जबकि देवरी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि पटवारियों द्वारा निजी दफ्तर में किसानों को बुलाकर सुविधा शुल्क की मांग भी की जाती है। यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके बाद भी पटवारियों की कार्यप्रणाली में कोई खास सुधार नहीं देखा जा रहा है। आज भी किसान ऑनलाइन आवेदन कराने के लिए परेशान होते देखे जा सकते हैं।

अब मिलना है दस हजार रुपए
किसान को सम्मान निधि देने के लिए केन्द्र सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरु की थी, जिसके तहत किसानों को 6 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। मगर अब प्रदेश सरकार ने भी सीएम किसान कल्याण निधि योजना शुरु कर दी है, जिसके तहत किसानों को साल भर में दो किश्तों में चार हजार रुपए दिए जाएंगे। इस तरह से किसानों को कुल दस हजार रुपए सम्मान निधि के रूम में मिलेंगे।

ऐप में आ रही परेशानी, पंजीयन के बाद भी नहीं पहुंची राशि
ऐप में शामिल खातेदारों के नाम न आना। जिन किसानों को पीएम सम्मान निधि योजना का लाभ मिल रहा है। उन किसानों के नाम मुख्यमंत्री किसान कल्याण सम्मान निधि की सूची से गायब हैं।
सीएम सम्मान निधि योजना में जो किसान पात्र हैं, उनका नाम ऐप पर दी गई सूची में भी नहीं है, जिससे विवाद की स्थिति बन रही है। जिन किसानों का पटवारी द्वारा पंजीयन कर लिया गया है, उनके खाते में भी राशि नहीं पहुंची।

किसान और पटवारियों के अपने-अपने तर्क
पटवारियों का कहना है कि इस ऐप में कई तरह की तकनीकी खामियां हैं, जिससे काम करने में बहुत परेशानी आ रही है। जैसे कि दो किसानों का डाटा अपलोड करने के बाद यह ऐप एरर देने लगता है। वहीं योजना के तहत किसान की संपूर्ण जानकारी ऑनलाइन फीड करने के अलावा उक किसान का फोटो उसके खेत पर ही खींचना है, लेकिन अधिकांश पटवारी गांव में ही नहीं जा रहे हैं। वे मुख्यालय पर ही बैठकर किसानों से आवेदन व फोटो मंगवा रहे हैं।

- मेरी तबीयत खराब होने के कारण में छुट्टी पर चला गया हूं। एक दो दिन में वापस आ रहा हूं, ड्यूटी पर। वापस आकर जानकारी लूंगा कि कौन पटवारी ऑनलाइन पंजीयन करने के लिए रुपए की मांग कर रहा है।
-छोटेलाल गोस्वामी, तहसीलदार देवरी।

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