पीएम मोदी ने कहा- नए कृषि कानून से मंडियां बंद नहीं होगी, किसानों को मिलता रहेगा MSP, कुछ लोग भ्रम फैला रहे

हमारे देश में किसानों के साथ धोखाधड़ी का बहुत ही बड़ा उदाहरण है, कांग्रेस सरकारों द्वारा की गई कर्जमाफी।

By: Pawan Tiwari

Updated: 18 Dec 2020, 02:53 PM IST

रायसेन. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के किसानों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज किसानों के खाते में बिना किसी बिचौलिए के 1600 करोड़ जमा कराए गए। टेक्नोलॉजी के कारण ये संभव हुआ है। भारत ने ये जो आधुनिक व्यवस्था बनाई है, दुनियाभर में उसकी चर्चा हो रही है। आज यहां कई किसानों को क्रेडिट कार्ड सौंपे गए हैं।

मोदी को क्रेडिट क्यों मिला
पीएम मोदी ने नए कृषि कानून पर कहा कि विपक्ष इसलिए परेशान है कि मोदी ने सारे काम क्यों कर दिए। उन्होंने कहा- सचमुच में तो देश के किसानों को उन लोगों से जवाब मांगना चाहिए जो पहले अपने घोषणापत्रों में इन सुधारों की बात लिखते रहे, किसानों के वोट बटोरते रहे, लेकिन किया कुछ नहीं। सिर्फ इन मांगों को टालते रहे और देश का किसान, इंतजार ही करता रहा। बीते दिनों से देश में किसानों के लिए जो नए कानून बने, उनकी बहुत चर्चा है। ये कृषि सुधार कानून रातों-रात नहीं आए। पिछले 20-22 साल से हर सरकार ने इस पर व्यापक चर्चा की है। कम-अधिक सभी संगठनों ने इन पर विमर्श किया है।

विपक्षी दलों के नेता जो कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं, दरअसल उनके मन में यह चल रहा है कि जो काम हम कहते थे लेकिन कभी करते नहीं थे, वह काम मोदी ने कैसे किया और क्यों किया। मैं तो केवल अपने किसान भाइयों का कल्याण चाहता हूँ। मैं सभी राजनीतिक दलों को कहना चाहता हूं कि आप अपना क्रेडिट अपने पास रखिए। मुझे क्रेडिट नहीं चाहिए। मुझे किसान के जीवन में आसानी चाहिए, समृद्धि चाहिए, किसानी में आधुनिकता चाहिए। कृपा करके किसानों को बरगलाना, उन्हें भ्रमित करना छोड़ दीजिए।

जिनकी अपनी राजनीतिक जमीन चली गई है, वे ही भ्रमित कर रहे हैं कि किसानों की जमीन चली जायेगी। स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट जो पहले ही लागू हो जानी चाहिए थी, उसे वे 8 साल तक दबाये बैठे रहे, मैंने कदम उठाये, तो इन्हें दर्द हो रहा है। हर चुनाव से पहले कांग्रेस के नेता कर्ज़माफी की बात करते हैं लेकिन जितनी घोषणा करते हैं, उसका लाभ किसानों को कभी मिलता ही नहीं है। किसानों को मिलता है तो बैंक का नोटिस और गिरफ्तारी का वॉरंट।

एमएसपी बंद नहीं होगी
पीएम मोदी ने कहा- नए कृषि कानून में इस बात का भ्रम फैलाया जा रहा कि एमएसपी बंद हो जाएगी। लेकिन मैं बता दूं कि हमारी सरकार MSP को लेकर इतनी गम्भीर है कि बोवनी के समय ही इसकी घोषणा कर दी जाती है। ये कृषि कानून बनने के बाद भी MSP की घोषणा पहले की तरह की गई। कोरोना के बावजूद MSP पर सरकारी खरीदी हुई, उन्हीं मंडियों में हुई। स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने का काम हमारी ही सरकार ने किया। अगर हमें MSP हटानी ही होती तो स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते?

पिछली सरकार के समय मसूर की दाल पर MSP थी 2,950 रुपये प्रति क्विटल। हमारी सरकार प्रति क्विंटल मसूर दाल पर 5,100 रुपये MSP दे रही है। पिछली सरकार के समय तूअर दाल पर MSP थी 4300 रुपए प्रति क्विंटल। हमारी सरकार तूर दाल पर प्रति क्विंटल 6000 रुपए MSP दे रही है। पिछली सरकार के समय मूंग दाल पर MSP थी 4500 रुपए प्रति क्विंटल। हमारी सरकार मूंग दाल पर करीब 7200 रुपए MSP दे रही है।

ये इस बात का सबूत है कि हमारी सरकार MSP समय-समय पर बढ़ाने को कितनी तवज्जो देती है, कितनी गंभीरता से लेती है। MSP बढ़ाने के साथ ही सरकार का जोर इस बात पर भी रहा है कि ज्यादा से ज्यादा अनाज की खरीदारी MSP पर की जाए। पिछली सरकार ने अपने पांच साल में किसानों से लगभग 1,700 लाख मिट्रिक टन धान खरीदा था। हमारी सरकार ने अपने पांच साल में 3,000 लाख मिट्रिक टन धान किसानों से MSP पर खरीदा है। यानि हमारी सरकार ने न सिर्फ MSP में वृद्धि की, बल्कि ज्यादा मात्रा में किसानों से उनकी अपज को MSP पर खरीदा है। इसका सबसे बड़ा लाभ ये हुआ है कि किसानों के खाते में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा पैसा पहुंचा है।

मंडियां बंद नहीं होंगी
पीएम मोदी ने कहा- कृषि सुधारों से जुड़ा एक और झूठ फैलाया जा रहा है APMC यानि हमारी मंडियों को लेकर। हमने कानून में क्या किया है? हमने कानून में किसानों को आजादी दी है, नया विकल्प दिया है।

कांग्रेस पर हमला
पीएम मोदी ने कहा- हमारे देश में किसानों के साथ धोखाधड़ी का बहुत ही बड़ा उदाहरण है, कांग्रेस सरकारों द्वारा की गई कर्जमाफी। जब 2 साल पहले मध्य प्रदेश में चुनाव होने वाले थे तो 10 दिन के भीतर कर्जमाफी का वादा किया गया था। कितने किसानों का कर्ज माफ हुआ? मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद क्या-क्या बहाने बताए गए। ये मध्य प्रदेश के किसान मुझसे भी ज्यादा अच्छी तरह जानते हैं। राजस्थान के लाखों किसान भी आज तक कर्जमाफी का इंतजार कर रहे हैं। किसान सोचता था कि अब तो पूरा कर्ज माफ होगा और बदले में उसे मिलता था बैंकों का नोटिस और गिरफ्तारी का वॉरंट। कर्जमाफी का सबसे बड़ा लाभ किसे मिलता था? इन लोगों के करीबियों को।

अब यूरिया की किल्लत नहीं
हमारी सरकार ने जो पीएम-किसान योजना शुरू की है, उसमें हर साल किसानों को लगभग 75 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे। यानि 10 साल में लगभग साढ़े 7 लाख करोड़ रुपये। किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर। कोई लीकेज नहीं, किसी को कोई कमीशन नहीं। देश के किसानों को याद दिलाऊंगा यूरिया की। याद करिए, 7-8 साल पहले यूरिया का क्या हाल था? रात-रात भर किसानों को यूरिया के लिए कतारों में खड़े रहना पड़ता था या नहीं? कई स्थानों पर, यूरिया के लिए किसानों पर लाठीचार्ज की खबरें आती थीं या नहीं? आज यूरिया की किल्लत की खबरें नहीं आतीं, यूरिया के लिए किसानों को लाठी नहीं खानी पड़तीं। हमने किसानों की इस तकलीफ को दूर करने के लिए पूरी ईमानदारी से काम किया।

अगर पुरानी सरकारों को चिंता होती तो देश में 100 के करीब बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट दशकों तक नहीं लटकते। सोचिए, बांध बनना शुरू हुआ तो पच्चीसों साल तक बन ही रहा है। बांध बन गया तो नहरें नहीं बनी, नहरे बन गई तो नहरों को आपस में जोड़ा नहीं गया। हमारी सरकार अनाज पैदा करने वाले किसानों के साथ ही मधुमक्खीपालन, पशुपालन और मछलीपालन करने वाले किसानों को भी बढ़ावा दे रही है। देश का किसान जितना शहद पहले निर्यात करता था, आज उससे दोगुना शहद निर्यात कर रहा है।

मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए हमारी सरकार ब्लू रिवॉल्यूशन स्कीम चला रही है। कुछ समय पहले ही 20 हजार करोड़ रुपए की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भी शुरू की गई है। इन्हीं प्रयासों का ही नतीजा है कि देश में मछली उत्पादन के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं।

भारत का किसान आधुनिक सुविधाओं और टेक्नोलॉजी के अभाव में पिछड़ता जाये, यह स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती है। ऐसे प्रयासों को हमने बढ़ाने का काम किया है, जिस पर वर्षों से पिछली सरकारें केवल विचार-विमर्श करती रही हैं। भारत की कृषि और किसान अब और पिछड़ेपन में नहीं रह सकता। दुनियाभर में किसानों को आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध है, भारत के किसानों को भी वह मिलना चाहिए। अब इसमें और देर नहीं होना चाहिए। हमारी सरकार ने इसकी पहल की है। तेजी से बदलते हुए वैश्विक परिदृष्य में भारत का किसान, सुविधाओं के अभाव में, आधुनिक तौर तरीकों के अभाव में असहाय होता जाए, ये स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। पहले ही बहुत देर हो चुकी है। जो काम 25-30 साल पहले हो जाने चाहिए थे, वो अब हो रहे हैं।

ये बात सही है कि किसान कितनी भी मेहनत कर ले, लेकिन फल-सब्जियों का सही भंडारण न हो तो बहुत नुकसान होता है। ये सिर्फ किसान का नहीं, ये पूरे हिंदुस्तान का नुकसान है। करीब एक लाख करोड़ के फल-सब्जियां इस वजह से बर्बाद हो जाते हैं। पहले इसे लेकर बहुत उदासीनता थी। हमारी प्राथमिकता देश में कोल्ड स्टोरेज का स्ट्रक्चर बनाना है। मैं उद्योग जगत से कहूंगा कि भंडारण, फूड प्रोसेसिंग की व्यवस्था करने के लिए आगे आएं। हो सकता है कि आपकी कमाई कुछ कम हो, लेकिन किसानों का भला होगा।

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