चार लाख टन कम हुई गेहूं खरीदी चना की खरीदी 30 मई तक होगी

चार लाख टन कम हुई गेहूं खरीदी चना की खरीदी 30 मई तक होगी

chandan singh rajput | Updated: 25 May 2019, 02:04:04 AM (IST) Raisen, Raisen, Madhya Pradesh, India

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी आज के बाद बंद हो जाएगी

रायसेन. समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी आज के बाद बंद हो जाएगी। आज गेहूं खरीदी का अंतिम दिन है। शुक्रवार को जिन किसानों को टोकन दिए गए हैं, आज केवल उनकी उपज की ही खरीदी होगी। चना की खरीदी 31 मई तक जारी रहेगी। गेहूं खरीदी के मामले में इस साल जिला लक्ष्य से बहुत पीछे रहा है। जिले में गेहूं खरीदी का लक्ष्य चार लाख 50 हजार मेट्रिक टन रखा गया था, इसके विपरीत 24 मई तक चार लाख 46 हजार 910.62 मेट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई। यानि लगभग चार लाख मेट्रिक टन गेहूं कम खरीदा गया।

जबकि बीते सालों में लक्ष्य से अधिक गेहूं की खरीदी होती रही है।
इसलिए कम हुई खरीदी
24 मार्च से गेहूं खरीदी केंद्र शुरू होना था, लेकिन इस साल लापरवाहियों के चलते गेहूं खरीदी केंद्रों का निर्धारण ही बहुत देरी से हुआ। खरीदी केंद्रों पर तमाम अव्यवस्थाओं का आलम अंत तक रहा। केंद्रों पर खरीदी का काम लगभग एक माह देरी से शुरू हुआ। मजबूरी में किसानों ने सीधे व्यापारियों को अपनी उपज बेची, इसी वजह से खरीदी का आंकड़ा कम रहा।

अब टोकन पर खरीदी
नागरिक आपूर्ति निगम के अनुसार शुक्रवार को खरीदी केंद्र पर मौजूद किसानों को टोकन जारी किए गए, आज इन टोकन के आधार पर ही खरीदी की जाएगी। रविवार से खरीदी पूरी तरह बंद हो जाएगी। जबकि चना की खरीदी केंद्र 31 मई तक खुले रहेंगे।

42 हजार टन गेहूं केंद्रों पर रखा
गेहूं खरीदी की शुरुआत से ही परिवहन को लेकर खासी दिक्कतों का सामना केंद्र प्रभारियों के साथ किसानो को करना पड़ा। कई बार तो परिवहन के अभाव में केद्रों पर जगह नहीं बचने से खरीदी रोकना पड़ी। आज भी खरीदी केंद्रों पर लगभग 42 हजार मेट्रिक टन गेहूं रखा हुआ है। किसानों से चार लाख 46 हजार 910.62 मेट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है, जिसमें से चार लाख चार हजार 909 मेट्रिक टन का परिवहन हो सका है।

जिले के 47 हजार किसानों ने बेची गेहूं की उपज
गेहूं खरीदने के लिए जिले में बनाए गए 122 केंद्रों पर अपनी उपज बेचने के लिए 67 हजार 720 किसानों ने पंजीयन कराया था, जिसमें से 47274 किसानों ने ही अपनी उपज केंद्रों पर बेची, बाकी किसानों ने व्यापारियों को उपज बेचकर काम चलाया, जिससे किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ा।

 

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