दिल्ली तक महक बिखेरते हैं इनके गुलाब

रायसेन के कैलाश सक्सेना ने गांव में पांच साल पहले शुरू की गुलाब की खेती, आज 50 लाख रुपए साल का धंधा बना।

By: praveen shrivastava

Published: 05 Feb 2021, 09:36 PM IST

प्रवीण श्रीवास्तव, रायसेन. रायसेन निवासी कैलाश सक्सेना ने परंपरागत खेती के साथ उद्यानिकी खेती को अपनाकर खेती को लाभा का धंधा बनाने में मिसाल पेश की है। छोटे गुलाब उद्यान से शुरू कर आज दो एकड़ में पॉली हाउस बनाकर गुलाब की उच्च किस्म की खेती कर रहे सक्सेना उद्यानिकी के एक सफल किसान के रूप में जाने जाते हैं। इनके पाूली हाउस में खिलने वाले गुलाब केवल भोपाल ही नहीं बल्कि इंदौर और दिल्ली तक अपनी महक बिखेर रहे हैं। हर साल आयोजित होने वाली गुलाब प्रदर्शनी में जिले के लिए पहना इनाम कैलाश सक्सेना के गुलाब उद्यान को ही मिलता है। बीते पांच साल से यह पुरस्कार वे लगातार जीतते आ रहे हैं।
सक्सेना ने बताया कि परंपरागत खेती में लगातार नुकसान होने के कारण उन्होंने नया प्रयोग करने का मन बनाया और अपने पैत्रिक गांव उचेर में पहले छोटे स्तर पर गुलाब की खेती शुरू की। पहल ही साल में अच्छा उतपादन बाजार मिलने पर उनका उत्साह बढ़ा और फिर गुलाब को प्रमुख खेती के रूप में अपनाया। आज दो एकड़ में पॉलीहाउस बनाकर गुलाब की खेती कर रहे हैं। सक्सेना ने बताया कि वे हर साल लगभग पचास लाख रुपए का गुलाब बेच रहे हैं। दिल्ली और भोपाल व्यापारी उनके गुलाब को प्रमुखता से खरीदते हैं।
20 लोगों को दिया रोजगार
सक्सेना के गुलाब उद्यान से केवल उन्हे ही लाभ नहीं हो रहा है, बल्कि उन्होंने लगभग 20 लोगों को अपने उद्यान में रोजगार से लगाया है। इनमें कुछ माली, कुछ मजदूर और कुछ फूल चुनने और छांटकर पैक करने वाले हैं। सीजन के समय इनकी संख्या और बढ़ जाती है।
इनका कहना है
उद्यानिकी खेती में परंपरागत खेती से अधिक लाभ है। फूलों की खेती में कम समय में अच्छी पैदावार होती है, जिसका दाम भी अच्छा मिलता है। किसानो को इस क्षेत्र में भी प्रयास करना चाहिए। जिले में उद्यानिकी खेती का रकबा हर साल बढ़ रहा है।
एनएस तोमर, जिला उद्यानिकी अधिकारी
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praveen shrivastava Bureau Incharge
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