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रायसेन में हुआ गबन, कैग की आंखे खुली

सरकार को सिस्टम का
सुरक्षा ऑडिट कराने की दी सलाह
- जिले में विधायक निधि और सांसद स्वेच्छानुदान में हुआ था 97 लाख का गबन।

रायसेन

Published: December 24, 2021 01:44:50 pm

रायसेन. जिले में योजना एवं सांख्यिकी विभाग में विधायक निधि एवं सांसद स्वेच्छानुदान की राशि मे लगभग एक करोड़ के घोटाले के बाद कैग (नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) ने सरकार को सिस्टम का सुरक्षा ऑडिट कराने की सलाह दी है। रायसेन के योजना एवं सांख्यिकी विभाग के दस्तावेजों की जांच में यह मामला उजागर हुआ था। जिसमे कार्यालय में पदस्थ संविदा कम्प्यूर ऑपरेटर को दोषी पाते हुए उसके विरुद्ध एफआईआर कराई गई थी, उक्त ऑपरेटर राजेश विश्वकर्मा फिलहाल जेल में है।
दस्तावेज की जांच में पाया गया था कि यहां विधायक निधि और सांसद स्वेच्छानुदान की राशि में गड़बड़ी कर 97 लाख से अधिक राशि का गबन किया गया था। इस आधार पर कैग ने सरकार को अपने सिस्टम का निश्चित समय अंतराल में सुरक्षा ऑडिट कराने की सलाह दी है।
कैग की सामान्य एवं सामाजिक क्षेत्र की रिपोर्ट में इसकी अनुशंसा करते हुए सरकारी योजना के हितग्राहियों के आवश्यक विवरण आधार से लिंक कर बैंक खातों से अभिप्रमाणित करने को कहा गया है। साथ ही केवल अधिकृत व्यक्तियों की ही इस प्रणाली तक पहुंच हो। धोखाधड़ी और आर्थिक अनियमितता रोकने के लिए सुरक्षा उपायों जैसे लेनदेन संबंधी सावधानी, पासवर्ड की गोपनीयता के संबंध में स्टाफ को जागरुक करने की सलाह भी दी गई है।

पासवर्ड की गोपनीयता नहीं रखी इसलिए हुआ था गबन
कैग की रिपोर्ट में इस गबन का उल्लेख है। रायसेन जिले में जनवरी से अगस्त 2019 के दस्तावेज के ऑडिट में मालूम चला कि विधायक निधि योजना एवं सांसद स्वेच्छानुदान के हितग्राहियों को भुगतान की गई राशि का मिलान नहीं हो रहा। कैश बुक और बिल रजिस्टर की प्रविष्टियां कोषालय की वाउचर स्लिप से अलग थीं। इसकी वजह आहरण एवं संवितरण अधिकारी द्वारा देयकों का हितग्राहियों के बैंक खातों से सत्यापन नहीं किया गया। यही नहीं अधिकारी ने अपने लॉगइन-पासवर्ड की गोपनीयता भी नहीं रखी। इसको डाटा एंट्री ऑपरेटर को बता दिया गया। जबकि वह संविदा कर्मचारी था। यही वजह रही कि उसने इसका दुरुपयोग किया।
इस तरह की गड़बड़ी
डाटा एंट्री ऑपरेटर ने अपने व्यक्तिगत खाते, पत्नी और भाई समेत अन्य अनाधिकृत व्यक्तियों, संस्थाओं, एनजीओ के बैंक खातों से हितग्राहियों के नाम जोड़कर बड़ा हेरफेर कर दिया। इसमें 97 लाख 6 हजार रुपए का गबन सामने आया। इसके खिलाफ इसी साल जनवरी में एफआईआर कराई गई।
हालांकि आरोपी राजेश विश्वकर्मा के परिजनों का कहना है कि इस मामले में तत्कालीन दो अधिकारी तथा एक वर्तमान अधिकारी दोषी हैं, उन्होंने ही गबन में सहयोग किया था।
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