उत्तम अकिंचन धर्म खाली होने का धर्म है

श्री दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के तहत प्रवचन।

By: praveen shrivastava

Published: 18 Sep 2021, 09:43 PM IST

रायसेन. तराजू के जिस पलड़े पर ज्यादा वजन रहता है, उसकी गति अधोगति रहती है, किंतु कम वजनी पलड़ा स्वभाव से ही उध्र्व गति रहता है। अकिंचन धर्म हल्का होने का धर्म है। यह यात्रा जो हमें निज स्वरूप तक मुक्ति धाम तक ले जाती है, उसमें हल्का और खाली होना बहुत जरूरी है। यह बात बुद्धसेन जैन ने श्री दिगंबर जैन मंदिर में पार्युषण पर्व के दौरान प्रवचन करते हुए कही। उन्होंने कहा कि यह मेरा है, इस प्रकार के अभिप्राय का त्याग करना अकिंचन धर्म है। संसार में रहने वालों की स्थितियों का जब विचार करते हैं तो तरह-तरह की चिंतन चरिया दृष्टिगोचर होती है।
शाम के समय मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें महिलाओं ने पंखिड़ा तू उड़ के आना पावापुर रे गीत पर गरबा नृत्य किया। मंदिर में उत्सव सा माहौल बन गया। समाज के प्रचार प्रसार ववस्थापक्र राकेश जैन ने बताया कि महापर्व के आठवें दिन टीम ए पाŸवनाथ द्वारा रखे गए सांस्कृतिक कार्यक्रम में आरती एवं गरबा महोत्सव रखा गया था। इसी महोत्सव के चलते जैन समाज की सभी बालिकाएं महिलाएं एवं पुरुष गरबा ड्रेस में हाथों में डांडिया लेकर पहुंचे और जमकर नृत्य किया। पिछले 2 साल से मंदिर जी में कोई कार्यक्रम नहीं हो पा रहे थे, इस वर्ष जब दसों दिन कार्यक्रम का आयोजन किया गया तो सकल दिगंबर जैन समाज रायसेन ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा।
किया जाएगा सम्मान
पिछले 2 माह से समाज को एकता के सूत्र में बांधने वाले और 10 लक्षण पर्व पर नियमित मंदिर में आकर द्रव्य की थाली सजाने वाले, भगवान के अभिषेक एवं शांति धारा करने वालों एवं व्यवस्था में सहयोग करने वालों का सम्मान किया जाएगा। यह सम्मान क्षमावाणी के दिन मंगलवार को मुख्य अतिथि डॉ अवधेश अग्रवाल, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. वैभव सिंघई की उपस्थिति में किया जाएगा।
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praveen shrivastava Bureau Incharge
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