ईमानदार उपभोक्ताओं से हो रही बिजली चोरी की भरपाई

कहीं कंपनी के अधिकारी या कर्मचारी तो बिजली चोरी को बढ़ावा तो नहीं दे रहे

By: chandan singh rajput

Published: 30 Sep 2020, 11:54 PM IST

सुल्तानगंज. क्षेत्रभर में बिजली की चोरी विद्युत वितरण कंपनी के लिए सिरदर्द बनी है। मगर बिजली चोरी क्यों हो रही, कौन लोग हैं, जिम्मेदार कौन है। कहीं कंपनी के अधिकारी या कर्मचारी तो बिजली चोरी को बढ़ावा तो नहीं दे रहे। इन मसलों पर ध्यान देने और व्यवस्था दुरुस्त करने की बजाए कंपनी द्वारा लाइनलॉस बताया जाता है। इससे आम उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ रही। अपनी खामियों को दुरुस्त करने की बजाए कंपनी उसका हर्जाना उपभोक्ताओं से वसूल रही है। इससे आम उपभोक्ता परेशान हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील के ग्रामीण क्षेत्र में करीब 26 हजार वैध बिजली उपभोक्ता हैं। अब लाइनलॉस या बिजली चोरी के चलते कंपनी के समक्ष मांग और आपूर्ति के लिहाज से संपूर्ण राजस्व की प्राप्ति नहीं हो रही है। बताया जा रहा है कि हर महीने कंपनी को लगभग 30 से 40 फीसदी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में कंपनी इसकी भरपाई आम ईमानदार उपभोक्ताओं से वसूली करके कर रही है।

सिंचाई पंपों से जोड़ रहे लाइन लॉस
बिजली कंपनी बारिश के महीने को ऑफ सीजन मानकर चलती है। मगर अब बारिश कम होने के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में पंप से हो रही सिंचाई को कंपनी लाइनलॉस से जोड़ कर देख रहा है। तर्क यह दिया जा रहा है कि अगर उपभोक्ता आठ घंटे बिजली का उपयोग करें तो लाइनलॉस घट सकता है, लेकिन बिजली रहने पर 24 घंटे मोटर पंप का चलना संदेह पैदा करता है। सिंचाई के लिए अस्थाई कनेक्शन लेने पर कंपनी यह मानती है कि 100 यूनिट तक ही बिजली महीने भर में खर्च होगी, लेकिन एक हार्स पावर वाले मोटर पंप भी महीने भर में करीब 12 सौ यूनिट बिजली खपा डालते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं रुकी बिजली चोरी
डोरी फं साकर ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली बिजली चोरी सबसे बड़े घाटे की वजह बनी हुई है। मगर ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात बिजली कर्मचारी ऊपरी कमाई के चक्कर में बिजली चोरी को नजर अंदाज कर देते हैं। कार्रवाई उन्हीं के खिलाफ होती है, जो इन कर्मचारियों के झांसे में नहीं आते। बताया जा रहा है कि ग्रामीण अंचल में कई जगह आटा चक्की भी अवैध रूप से डोरी डालकर चलाई जा रही है। ऐसें में कनेक्शन लेकर चक्की चलाने वालों पर दोहरी मार पड़ रही। हालांकि राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत क्षेत्र में अधिकांश तारों को बदल दिया गया है। इन नंगे तारों की जगह एबीसी एरियल बंच कंडक्टर लगाए गए हैं, जिससे डोरी फं साना आसान नहीं। इसके बाद भी चोरी रुक नहीं रही।

बगैर रीडिंग के दे रहे भारी भरकम बिल
उपभोक्ता श्रीवन गोस्वामी ने बताया कि हमारे गांव में विद्युत कनेक्शन तो हंै मगर मीटर नहीं लग, जिससे हम लोग रीडिंग नहीं देख पाते हैं और बगैर रीडिंग के ही भारी-भरकम बिल विद्युत कर्मी थमा जाते हैं। यही हाल तहसील के समूचे ग्रामीण अंचल का है।
एक घर में कर दिए पांच कनेक्शन : बिंद्रावन गोस्वामी ने बताया कि बिजली चोरी की भरपाई करने बिजली कंपनी द्वारा एक ही घर में पांच-पांच विद्युत कनेक्शन कर दिए। वह भी उपभोक्ताओं की बगैर सहमति और दो साल से भारी भरकम बिल आ रहे हैं, जबकि हमारे परिवार की आय तीन हजार रुपए प्रतिमाह है और पांच कनेक्शनों के पांच हजार रुपए प्रतिमाह आ रहे, जबकि हमारा संयुक्त परिवार है। घर में ती कमरे और पांच कनेक्शन कर दिए।

- यह बात सही है कि कुछ लोग विद्युत चोरी कर रहे हैं। मगर कंपनी द्वारा चोरी से बढ़़ी रीडिंग का ईमानदार उपभोक्ताओं पर लोड नहीं डाला जाता। चोरी रोकने के लिए कंपनी द्वारा लगातार छापामार कार्रवाई की जा रही है। 18 से 20 प्रतिशत तक लाइनलॉस होता है, जबकि पांच से सात प्रतिशत क्षेत्र में विद्युत चोरी की जा रही है।
-अमित प्यासी, जेई बिजली कंपनी।

Show More
chandan singh rajput
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned