scriptStudents forced to go out of the district to study PG in Science | सांइस में पीजी की पढ़ाई करने जिले से बाहर जाने को मजबूर विद्यार्थी | Patrika News

सांइस में पीजी की पढ़ाई करने जिले से बाहर जाने को मजबूर विद्यार्थी

जिले की आबादी लगभग 15 लाख होने के साथ ही दस तहसीलें गठित की गई हैं। मगर हायर सेकंडरी छात्रों को तहसील मुख्यालयों पर उच्च शिक्षा के लिए पढ़ाई की सुविधा नहीं है।

रायसेन

Published: December 27, 2021 05:08:50 pm

राजेश यादव/ रायसेन. क्षेत्रफल की दृष्टि से बड़ा कहलाने वाला रायसेन जिला उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। जिले की आबादी लगभग 15 लाख होने के साथ ही दस तहसीलें गठित की गई हैं। मगर हायर सेकंडरी छात्रों को तहसील मुख्यालयों पर उच्च शिक्षा के लिए पढ़ाई की सुविधा नहीं है। क्योंकि ज्यादातर मुख्यालयों पर संचालित कॉलेज में स्नातक कक्षाएं ही एक-दो संकाय की संचालित हो रही हैं। गणित, विज्ञान संकाय की पढ़ाई करने के लिए छात्रों को भोपाल, सागर, जबलपुर सहित अन्य स्थानों के सरकारी कॉलेजों में जाना पड़ रहा है। यदि वहां जाकर उन्हें शासकीय कॉलेजों प्रवेश नहीं मिल पाता तो उन्हें मजबूरी में प्राइवेट कॉलेज में दाखिला लेना पड़ रहा है। इसी तरह की स्थिति पीजी यानि स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए बनी हुई है। जिला मुख्यालय पर संचालित अग्रणी कॉलेज स्वामी विवेकानंद कॉलेज में बीए, बीकॉम, बीएससी, एमए, एमकॉम की कक्षाएं लगती होती हैं। मगर एमएससी की पढ़ाई नहीं होती, ऐसे में रायसेन शहर सहित आसपास के गांव के छात्र-छात्राओं को एमएससी पढऩे भोपाल, विदिशा सहित प्राइवेट कॉलेजों में जाना पड़ रहा है।

सांइस में पीजी की पढ़ाई करने जिले से बाहर जाने को मजबूर विद्यार्थी
सांइस में पीजी की पढ़ाई करने जिले से बाहर जाने को मजबूर विद्यार्थी

ये है पीजी कॉलेजों की स्थिति
जिले में सबसे पुराना बरेली का शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भी पीजी संकाय की पूरी पढ़ाई नहीं होती है। यहां एमएससी में बॉटनी, जूलॉजी, कैमिस्टी और गणित विषय की कक्षाएं लगती है। एमए में मात्र दो विषय समाज शास्त्र और अर्थशास्त्र की पढ़ाई होती है। इसी तरह की स्थिति बेगमगंज के स्नातकोत्तर कॉलेज की है, यहां पर पीजी तक शिक्षा के लिए एमए के दो विषय समाज शास्त्र और राजनीति शास्त्र में पढ़ाई होती है। एमएससी और एमकॉम विषय की कक्षाएं यहां शुरु नहीं हो सकी हैं। मंडीदीप कॉलेज में एमए संकाय में समाज शास्त्र और राजनीति शास्त्र विषय की कक्षाएं लग रही हैं। जिले का लीड कॉलेज स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय रायसेन में सिर्फ स्नातक स्तर पर ही तीनों संकाय बीए, बीकॉम और बीएससी की कक्षाएं लगती हैं। मगर स्नातकोत्तर के लिए तीनों संकाय की सुविधा नहीं है। एमएससी की पढ़ाई यहां भी नहीं होती।

स्नातक स्तर के कॉलेजों की स्थिति
जानकारी के अनुसार औबेदुल्लागंज, मंडीदीप, गैरतगंज में बीए, बीएससी और बीकॉम संकाय की कक्षाएं लग रही हैं। जबकि सिलवानी शासकीय कॉलेज में बीए और बीकॉम की पढ़ाई हो रही है। उदयपुरा कॉलेज में मात्र बीए संकाय की कक्षा लग रही हैं। जबकि नए खुले बाड़ी और सुल्तानपुर कॉलेज में भी एक मात्र बीए संकाय ही पढ़ाया जा रहा है। कन्या महाविद्यालय रायसेन के पास स्वयं का बड़ा भवन होने के बावजूद बीए और होमसाइंस विषय की पढ़ाई कराई जाती है।

यहां हैं कॉलेज भवन की सुविधा
जानकारी के अनुसार गैरतगंज, सिलवानी, बेगमगंज, औबेदुल्लागंज, उदयपुरा, बरेली, स्वामी विवेकानंद रायसेन और गल्र्स कॉलेज रायसेन के पास स्वयं के भवन की सुविधा उपलब्ध है। जबकि मंडीदीप कॉलेज एकेव्हीएन की पुरानी बिल्ंिडग में लग रहा और बाड़ी, सुल्तानपुर कॉलेज भी शासकीय स्कूल के भवन में संचालित हो रहे।

जिले में शा.कॉलेज:- 11
स्वयं के भवन में संचालित कॉलेज:- 08
जिले भर में दर्ज छात्र-छात्राएं:- लगभग 8000

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जिला मुख्यालय पर संचालित स्वामी विवेकानंद शासकीय अग्रणी कॉलेज के छात्रों को वर्षों पुराने भवन से जल्द निजात मिल जाएगी। क्योंकि इसी परिसर में विश्व बैंक परियोजना की मदद से 16 करोड़ रुपए की लागत से तीन मंजिला भवन का निर्माण चल रहा है। इसके पीछे राÓय सरकार द्वारा छह कक्ष अलग से बनवाए गए। अधिकारियों के मुताबिक अगले सत्र नए भवन की सुविधा मिल सकती है।

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लैब की जरूरत होती है
स्वामी विवेकानंद कॉलेज का नया भवन बन रहा है, शासन से स्वीकृति मिलते ही एमएससी संकाय की कक्षाएं प्रारंभ हो सकेंगी। अन्य स्थानों पर भी की स्वीकृति मिलना जरूरी है। क्योंकि सांइस विषय की कक्षाओं के लिए लैब की आवश्यकता भी होती है।
-डॉ. इशरत खान, प्राचार्य स्वामी विवेकानंद कालेज रायसेन

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