अस्पताल में नहीं मिल रही दवाइयां, मरीजों की आफत

जिला अस्पताल में सुविधाओं को भी तरस रहे मरीज, गर्मी में हो रही परेशानी

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Published: 15 Apr 2016, 11:53 PM IST

रायसेन। जिला अस्पताल की हालत इन दिनों एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद से भी ज्यादा बदतर है। मरीजों को न तो पूरी दवाइयंा मिल रही हैं और न अन्य सुविधाएं। बावजूद इसके जिम्मेदार व्यवस्थाएं सुधारने के दावे कर रहे ह,ैं लेकिन बदलाव कुछ नजर नहीं आ रहा है। यह सब जानते हैं कि जैसे-जैसे गर्मी परवान बढ़ती है वैसे-वैसे ही संक्रामक सहित अन्य बीमारियां भी पांव पसारने लगती हैं। बीमार होते ही आखिर मरीज जाएंगे कहां। जाहिर है इसका जबाव जिला अस्पताल होगा। लेकिन दवाईयों के अभाव में अस्पताल कैसा होगा।इसकी कल्पना मात्र से शरीर में सिहरन पैदा होने लगती है।

इधर तेज गर्मी की वजह से बीमारियंा फैलने लगी हैं। बीमारियों के इस मौसम में शासकीय जिला अस्पताल में सरदार वल्लभ भाई पटेल नि:शुलक औषधि केंद्र में कई दवाओं की कमी लंबे समय से बनंी हुई है। वर्तमान में जिला अस्पताल की ओपीडी में पंजीयन मरीजों की संख्या प्रतिदिन 700-800 हो रही है।

नई दवा नीति बनी गले का फांस
जानकारों का कहना है कि जबसे प्रदेश में नई दवा नीति लागू हुई है। तबसे स्वास्थ्य विभाग सहित मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में प्रदेश मे मध्यप्रदेश दवा नीति चलन लागू की गई है। जिसके तहत प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में मप्र मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन को आर्डर देंगी। इससे पहले तमिलनाडु दवा नीति के तहत दवाईयां क्रय की जाती थीं। इसके लिए रायसेन जिले में दवा नीति के तहत 344 तरह की दवाईयां सप्लाई की जा रही हैं।  
इन दवाइयों की कमी  
जिला अस्पताल के मुफ्त दवा विन्डों पर पेट दर्द की डाइसाइक्लोसिन टेबलेट, आईड्रॉप, ईयरड्रॉप सहित पेरासीटामॉल गोली, मुंह, पेट में छाले के लिए गोली कैप्शूल के अलावा पेन किलर, छोटे बच्चों के बुखार के लिए पेरासिटामोल, कफ सिरप, सर्दी-खांसी, डायक्लोपैनिक जेल दर्द में उपयोगी, एप्रोडेबिन ब्लड प्रेशर टेबलेट, रोसाटेन, एंटीबायेाटिक एनोसिलिन कैप्शुल, बीसीलेक्स, महिलाओं के दर्द के लिए आईवोपेरा, ओफलोक्सीन टेबलेट, एंटीबॉयोटिक जैसी जीवन रक्षक दवाईयों की कमी बनी हुई है।  

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