कुम्हारों पर छाया रोजी-रोटी का संकट

कोरोना और लॉकडाउन ने रोजगार को किया प्रभावित, पिछले एक वर्ष से नही बिक रहे हैं मिट्टी के बर्तन

By: chandan singh rajput

Updated: 22 Apr 2021, 01:12 AM IST

सलामतपुर. मिट्टी के बर्तन बनाकर अपनी आजीविका चलाने वाले कुम्हार जाति के लोगों के लिए कोरोना कफ्र्यू में दोहरी मार पड़ रही है। पहले से ही ये लोग सरकार की उदासीनता के चलते उपेक्षा के शिकार हंै। हालात इसलिए भी बदतर होते जा रहे हैं कि अब मिट्टी के बर्तनों के ग्राहक कम मिल रहे हैं। ऐसे में पीढिय़ों से इस कला को जीवित रखकर अपना पेट पालने वालों को मुश्किल दौर से गुजरना पड़ रहा। ऐसा ही कुछ सलामतपुर ग्राम पंचायत मुख्यालय और आसपास क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। जहां पर कुम्हार अपनी आजीविका चलाने के लिए चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाकर इस कला को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं। मगर परिस्थितियां उनके प्रतिकूल बनी हुई है।

लोग ठंडे पानी की जगह, पी रहे गरम पानी
कोरोना महामारी के चलते लोगों में दहशत है, लोग ठंडे पानी की जगह गरम पानी पी रहे हैं। यही वजह है कि मिट्टी के बर्तन नहीं बिक रहे। कुम्हार परिवारों ने महीनों पहले मटकों और सुराही का निर्माण शुरू कर दिया था, ताकि जैसे ही ग्रीष्म ऋ तु की शुरुआत होगी तो इसकी बिक्री कर सकें। मगर इस बार ऐसा हो नहीं सका। ग्राम के मलखान प्रजापति ने बताया कि कोरोना संक्रमण ने घर की आर्थिक स्थिति को काफी प्रभावित किया है। इसके चलते मटके नहीं बिक पा रहे।
परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट
बाजार बंद है और हम लोग अपने घरों में ही कैद हैं। इसलिए मटका बिकना भी मुश्किल हो गया है। जो मटके पहले से बने हैं, वह भी घर में ही रखे हैं। महीनों की मेहनत घर के बाहर रखी है। इन हालातों में परिवार का गुजर करना भी मुश्किल हो गया।

दरअसल आज भी ऐसे लोग हैं जो मटके के पानी को प्राथमिकता देते हैं। मगर इस बार तो इनको बड़ा घाटा हो रहा है। ऐसे में इनका परिवार कैसे चलेगा, जब कोई भी मटके खरीदने ही नहीं आ रहा, जिससे इन परिवारों पर रोजी रोटी का संकट मंडराने लगा है।
सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए
मेरे परिवार में 11 लोग हैं। परिवार का मुख्य काम मिट्टी के मटके, दिये, बर्तन व तवा आदि सामान बनाकर बेचना हैं। इसी से परिवार का जीवन यापन होता है। मगर कोरोना के चलते मिट्टी के बर्तन नही बिक रहे। ऐसे में सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए।
-शांति बाई प्रजापति, मिट्टी के बर्तन बेचने वाली महिला।

कोरोना के चलते पिछले एक वर्ष से हमारा व्यवसाय ठप्प पड़ा है। इस वर्ष अच्छे व्यापार की उम्मीद में बड़ी संख्या में मिट्टी के मटके व बर्तन बना लिए थे। ग्राहक बोल रहे हैं, ठंडा पानी पीने से सर्दी जुकाम हो रहा है। ऐसे में मेरे परिवार के आगे भरण-पोषण का संकट पैदा हो गया है।
-मलखान प्रजापति, मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगर
जीवनयापन करना हो रहा मुश्किल
बड़ी संख्या में मिट्टी के मटके बना लिए थे, कि गर्मी के मौसम में इन्हें बेचकर कुछ अच्छी आमदनी हो जाएगी। मगर कोरोना की वजह से हाट बाजार लगना बंद हो गए और मटके बिक ही नहीं रहे हैं। जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है।
-घासीराम प्रजापति, कारीगर।

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