धान की उपज वापस ले गए किसान

धान की उपज वापस ले गए किसान
MP Agricultural Produce Market,

praveen praveen | Updated: 15 Nov 2016, 11:28:00 PM (IST) Raisen, Madhya Pradesh, India

बरेली. किसानों से देश की अर्थव्यवस्था चल रही है इन्ही किसानों के सामने अब अगली फसल लेने का संकट गहराने लगा है, क्योंकि लाखों रुपए कर्ज लेकर किसानों ने कई एकड़ खेतों में धान की फसल तैयार की, लेकिन अब उसे बेचने का संकट खड़ा हो गया है।

बरेली. किसानों से देश की अर्थव्यवस्था चल रही है इन्ही किसानों के सामने अब अगली फसल लेने का संकट गहराने लगा है, क्योंकि लाखों रुपए कर्ज लेकर किसानों ने कई एकड़ खेतों में धान की फसल तैयार की, लेकिन अब उसे बेचने का संकट खड़ा हो गया है। किसानों द्वारा मंडी में हजारों क्विंटल धान की फसल नीलामी के लिए लाई गई थी, परंतु पिछले सप्ताह आदेश जारी हुआ कि अब पुराने एक हजार और पांच सौ के नोट नहीं चलेंगे। तुरंत ही कृषि मंडी में मुनादी करवाई गई कि पिछले गुरुवार से रविवार तक मंडी बंद रहेगी। बाद में मंगलवार से मंडी में धान की डांक लगने के आदेश हुए। मंगलवार को सैकड़ों किसान धान लेकर कृषि मंडी पहुंचे परंतु जैसे ही उन्हें पता चला कि हमारी उपज आरटीजीएस से खरीदी जाना है, यह सुन सैकड़ों किसान अपनी धान वापस लेकर चले गए। उन किसानों की उपज कि डांक लगी जिनकी उपज पिछले एक सप्ताह से मंडी में रखी हुई थी।

कृषि उपज मंडी के लायसेंस सुदा व्यापारियों द्वारा किसानों को हजार एवं पांच सौ रुपए के नोट की कमी बताकर उनकी उपज क्रय नहीं की गई। इससे किसान भडक़ गए और उन्होंने मंडी सचिव को व्यापारियों की मनमर्जी के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। किसानों ने कृषि मंडी सचिव विनय प्रकाश पटैरिया को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि आपके आदेशानुसार व्यापारियों द्वारा बैंक एवं आरटीजीएस से धान खरीदी जा रही है। इससे किसानों को भुगतान नहीं मिल रहा है। व्यापारियों के बैंक खाते में पर्याप्त राशि न होने से बैंक से भुगतान नहीं हो रहा है। हम सभी किसानों को इस स्थिति में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मंडी सचिव पटेरिया का कहना है कि व्यापारियों के पास नगद भुगतान नहीं होने से किसानों को परेशानी हो रही है। 

मजदूरों को मिल रहे पांच सौ के नोट
सिलवानी. 500 व 1000 के नोट बंद होने के बाद बड़े कारोबारियों व कालाधन रखने वालों ने सरकार से एक कदम आगे चलते हुए ऐसे कामगारों को खोज निकाला, जो चंद पैसे लेकर बैंकों में कतार में खड़े हाकर उनके लिए राशि एक्सचेंज कर सके। लेकिन यह एक्सचेंज ऑफर गरीबों के लिए मुसीबत न बन जाए, क्योंकि एक्सचेंज ऑफर में लिया जा रहा आधार कार्ड नंबर बैंक खातों से लिंक है। यदि कोई बीपीएल कार्डधारी या कामगार मजदूर थोड़े से लालच में आकर राशि प्रतिदिन राशि एक्सचेंज करता हैं तो वह सरकार की निगाह में आ जाएगा। और एक्सचेंज ऑफर पचास हजार अधिक होने पर उसे शासकीय योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता हैं।  
कैसे होगा शादी क ा इंतजाम
आगामी 24 नवंबर को नगर के कई घरों में शादी है, लेकिन सात फेरों से पहले ही उनके बैंकों में फेरे लगना शुरू हो गए। लोगों ने बताया कि शादी की तैयारी के लिए पैसा बैंक में जमा किया था। शादी से एन पहले सरकार द्वारा पांच और हजार के नोट बंद कर देने से समस्या खड़ी हो गई है। शादी में महज 10 दिन का समय रह गया है और तैयारी नहीं हुई है। हलवाई, गार्डन, शहनाई, ज्वेलरी, कपड़े, किराना आदि की खरीदी बाकी है और बैंक से एक सप्ताह में 20 हजार से अधिक राशि नहीं मिल रही हैं। ऐसे मैं तैयारी करना मुश्किल हो गया है।

व्यापारी रख रहे फूंक-फूंक कर कदम
नोटबंदी की घोषणा के बाद आयकर विभाग द्वारा कई महानगरों व नगरों में की गई छापेमार कार्रवाई से नगर का व्यापारी भी सकते में हैं। आयकर की टीम कहीं नगर में छापेमार कार्रवाई न कर दे इससे पूर्व ही व्यापारियों द्वारा व्यापार में फूंक-फूंक कर कदम उठाए जा रहे हैं। छोटा लेनदेन तो नगद में हो रहा है, लेकिन बड़े लेनदेन इस समय पूरी तरह से बंद पड़े हुए हैं। 

बैंकों में रख रहे बुजुर्गों का ध्यान
बेगमगंज. बेगमगंज के बैंकों में कार्यरत कर्मचारी सुबह 9 बजे से रात 11 बजे तक बैंकों में कार्य कर रहे हैं। सभी बैंक कर्मचारी राष्ट्रहित एवं देश भावना को लेकर एक हफ्ते का कार्य एक दिन में ही कर रहे हैं। कुछ लोग बोले सरकार के फैसले का हम स्वागत करते हैं हम नोट बदलने के लिए बैंक में लाइन लगाकर खड़े हुए हैं और हमें नोट के बदले नोट ही मिलेगा, हम कहीं बॉर्डर पर नहीं लगे हैं जो हमें गोली मिलेगी। नोट बंदी के फैसले के बाद से ही देश भर में एटीएम और बैंक के बाहर लोगों की लंबी लाइन लगी हुई है। इस मुश्किल वक्त की समय यह देश भक्ति की परीक्षा है इन दिनों हम यह सब कुछ देख रहे हैं यह देशभक्ति का इम्तिहान है। वरना सामान्य दिनों में तो हर कोई देशभक्त बनता है। कुछ लोग इस फैसले से नाराज जरूर हैं, लेकिन इसका असर आपको 6  महीने बाद देश हित में जो दिखेगा।
ऐसे बना रहे व्यवस्था
सेंट्रल बैंक एवं स्टेट बैंक में बैंक कर्मचारी कोई भी काउंटर बंद न हो इसलिए सभी कर्मचारियों का अलग-अलग लंच टाइम दिया गया है। इससे आम जनता को परेशान न होना पड़े उन्हें पानी की व्यवस्था भी की जा रही है। बुजुर्ग महिला पुरुष एवं बीमार लोगों को विशेष ध्यान में रखकर लाइन में लगे हुए लोगों से अपील कर उन्हें सुविधाएं दी जा रही है।
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